प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण चैत्यगृह (गुहामंदिर)

चैत्यगृह


बराबर

  • बराबर शैलकृत गुफा का निर्माण अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ई.पू. में बिहार के गया जिले में स्थित बराबर चट्टानों को काटकर कराया गया था। इन्हें सुदामा, कर्ण और लोमश ऋषि की गुफा नाम से जाना जाता है। 
  • बराबर पहाड़ी पर स्थित चार में से तीन गुफाओं में अशोक के शिलालेख होने से यह ज्ञात होता है कि दो गुफाएं अशोक द्वारा शासन के बारहवें वर्ष और उन्नीसवें वर्ष भिक्षुओं को प्रदान की गई थी। 
  • चौथी गुफा में पांचवीं शताब्दी ई. के मौखरी शासक अनंत वर्मा का लेख अंकित है।

नागार्जुनी

  • नागार्जुनी शैलकृत गुफा का निर्माण अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ई.पू. में बिहार के गया जिले में स्थित नागार्जुनी चट्टानों को काटकर किया गया था। 
  • नागार्जुनी पहाड़ी की तीनों गुफाओं में अशोक के पौत्र ‘देवानाप्रिय दशरथ’ के अभिलेख अंकित है जो भिक्षुओं के आजीवक संप्रदाय को प्रदान करने से सम्बद्ध हैं।

उदयगिरी

  • भुवनेश्वर (उड़ीसा) के समीप उदयगिरी पर्वत को काटकर अनेक गुफाएं निर्मित की गयी थी, इन गुफाओं में निर्मित चैत्यगृह जैन धर्म से संबंध रखते हैं, उदयगिरी चैत्यगृह का निर्माण शुंग काल में हुआ था। 

भाजा 

  • द्वितीय शताब्दी ई. पू. में निर्मित भाजा गुफा महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है। इसमें कुल 22 गुफाएं हैं, इनमें चैत्यगृह, विहार और स्तूप सम्मिलित हैं। भाजा चैत्यगृह के आयताकार कक्ष की लंबाई 16.75 मीटर,चौड़ाई 8.25 मीटर और ऊँचाई 3.85 मीटर है, प्रदक्षिणा पथ 2.90 मीटर चौड़ा है। चैत्य गवाक्ष गोल आकार का है।

पीतलखोरा 

  • महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित पीतलखोरा में कुल 13 गुफाएं हैं। गुफा संख्या 3 चैत्यगृह है और गुफा संख्या 4 विहार है। 37 अठपहलू स्तंभों में 12 सुरक्षित है, स्तूप नष्ट हो चुका है। अवशेषों के आधार पर पीतलखोरा का चैत्यगृह 15 मीटर लंबा 10.25 मीटर चौड़ा 6.10 मीटर ऊँचा रहा था, इसका निर्माण संभवत द्वितीय शताब्दी ई. पू. में हुआ था।

अजंता

  • महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित अजंता में 29 पूर्ण गुफाएं हैं। प्रारम्भिक काल की गुफाओं में 6 गुफाएं निर्मित हुई थी। जिनमें 9 एवं 10 चैत्यगृह है शेष चार (8,12,13,15) विहार हैं। इनका निर्माण काल द्वितीय शताब्दी ई. पू. से प्रथम शताब्दी ई. के मध्य स्वीकार किया जाता है। 
  • परवर्ती काल की गुफाओं का निर्माण पांचवीं शताब्दी ई. के मध्य स्वीकार किया जाता है। परवर्ती काल की गुफाओं का निर्माण पांचवीं शताब्दी ई. के उतरार्द्ध से प्रारम्भ हुआ था। इन गुफाओं में गुफा नंबर 19,26,29 चैत्यगृह हैं शेष 20 विहार हैं। 
  • अजंता गुफा का चैत्यगृह अपनी सुंदर चित्रकला के लिए विश्व में चर्चित है। इन चित्रों के विषय बौद्ध धर्म से सम्बद्ध हैं।

कार्ले

  • महाराष्ट्र में स्थित कार्ले का चैत्यगृह वास्तु कला का प्रसिद्ध चैत्य स्वीकार किया जाता है। यहां का विशाल चैत्यगृह 38.25 मीटर लंबा, 15.10 मीटर चौड़ा, 14.50 मीटर ऊंचा है। इसके आगे का भाग दो मंजिला है और नीचे के भाग में तीन दरवाजे हैं, ऊपर एक बरामदा है, जिसमें एक विशाल चैत्य गवाक्ष है। 
  • चैत्यगृह के अंदर एवं बाहर कई अभिलेख उत्कीर्ण हैं। इसका निर्माण प्रथम शताब्दी ई. में हुआ था।

कन्हेरी

  • मुंबई के समीप स्थित कन्हेरी में दूसरी शताब्दी ई. में निर्मित (चट्टानों को काटकर) 10 गुफाओं का निर्माण किया गया था, कन्हेरी के चैत्यगृह की बनावट कार्ले के चैत्यगृह के सदृश है। कन्हेरी के चैत्यगृह के प्रवेश द्वार के सामने एक आंगन है जो अन्य किसी चैत्यगृह में नहीं पाया जाता है।

एलोरा

  • महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित एलोरा में सातवीं से नवीं शताब्दी के मध्य 34 शैलकृत गुफाएं निर्मित हुई थी, जिनमें 1 से 12 तक बौद्धों तथा 13 से 29 तक हिंदुओं और 30 से 34 तक जैनों की गुफाएं हैं। एलोरा की गुफा में 10 चैत्यगृह हैं, ये चैत्यगृह शिल्प देवता विश्वकर्मा को समर्पित है। 
  • एलोरा गुहामंदिर का निर्माण राष्ट्र्कूट शासकों के काल में हुआ था, यहां सर्वाधिक प्रसिद्ध है एलोरा का कैलाश गुहामंदिर।

एलीफेंटा 

  • मुंबई स्थित एलीफेंटा पौराणिक देवताओं की अत्यंत भव्य मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है, इन मूर्तियों में त्रिमूर्ति शिव की मूर्ति सर्वाधिक चर्चित है, एलीफेंटा का गुहा मंदिर राष्ट्रकूट काल में निर्मित हुआ था। एलीफेंटा की पहाड़ी में शैलोत्कीर्ण करके उमा-महेश गुहामंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी ई. का है।

बाघ

  • मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित बाघ नामक स्थान पर यह गुफा स्थित है, इसमें कुल 9 गुफाएं हैं। गुफा नं 2 पांडव गुफा कहलाती है, गुफा नं 3 हाथी खाना और गुफा नं 4 रंगमहल कहलाती है। 
  • इनका निर्माण काल पांचवीं छठी शताब्दी ई. स्वीकार किया जाता है, शेष गुफा नं 1,5,6,7,8,9 नष्टप्राय हैं।

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