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Thursday, January 11, 2018

चित्तौड़गढ़ का किला chittorgarh ka kila

प्राचीन नाम चित्रकूट, यह राजस्थान के किलों का सिरमौर दुर्ग है।
यह एक गिरि दुर्ग है। यह राजस्थान का दक्षिणी पूर्वी द्वार है।
कहावत ‘गढ़ तो चित्तौड़गढ़ बाकी सब गढ़ैया।’
निर्माणः 7वीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य ने
यह किला मेसा के पठार पर स्थित है।
इसका अधिकतर निर्माण व आधुनिकरण का कार्य राणा कुंभा ने करवाया था जिसमें चार दीवारी, सात द्वार, विजय स्तम्भ, कुम्भ स्वामी मंदिर, कुंभा के महल, श्रृंगाल चंवरी का मंदिर, किले के भीतर स्थित नौखण्डा विजय स्तम्भ (हिन्दू देवी-देवताओं का अजायबघर) सबसे भव्य इमारत जिसका निर्माण 1438 ई. में महाराणा कुंभा ने मालवा के सुल्तान महमूद शाह खिलजी पर विजय के उपलक्ष्य में करवाया था आदि।
विजयस्तम्भः नौ खण्ड़ों वाला यह स्तम्भ 120 फीट ऊंचा हैं,  इसके नौ खण्ड़  नौ निधियों के प्रतीक हैं। ये देवता रामायण व महाभारत से सम्बन्धित हैं। इसका वास्तुकार जैता था।
पद्मिनी महल- जलाशय के मध्य स्थित
इसके दक्षिण-पूर्व में गोरा बादल के महल है।
दुर्ग की पूर्वी प्राचीर के निकट एक सात मंजिला जैन कीर्तिस्तम्भ है, जिसे आदिनाथ का स्मारक माना जाता है। इसका निर्माण बघेरवाल जैन जीजा द्वारा 11वीं शताब्दी के लगभग करवाया गया था।
कुंभा द्वारा निर्मित विष्णु के वराह अवतार का कुम्भश्याम मंदिर, नीलकंठ का मंदिर एवं मीराबाई का मंदिर भी प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है।
दुर्ग के पूर्व की ओर सूरजपोल का दरवाजा तथा दूसरी ओर लाखोटा बारी स्थित है।
किले के पहले दरवाजे का नाम पाडलपोल है।
दूसरा दरवाजा भैरवपोल, जहां जयमल राठौड़ व कल्ला राठौड़ की छतरियां है।
तीसरा गणेशपोल
चौथा लक्ष्मण पोल, पांचवा जोड़न पोल, छठा रामपोल है।
किले का 7वां दरवाजा त्रिपोलिया
जयमल की हवेली का निर्माण महाराणा उदयसिंह के काल में हुआ
राजस्थान का प्राचीनतम सूर्य मंदिर है जो वर्तमान में कालिका माता का मंदिर है।
परमार राजा भोज द्वारा बनवाया गया समिद्धेश्वर का मंदिर है। इसका जीर्णोद्धार महाराजा मोकल ने करवाया था। नागर शैली का यह शिवालय बाहर से अलंकृत एवं अन्दर से सादगी पूर्ण है।


 जौहर 


इस किले में तीन जौहर (केवल स्त्रियों द्वारा अग्नि में कूदकर खुद की जीवन लीला समाप्त करना) एवं साके (जौहर के साथ-साथ पुरुष भी केसरिया बाना पहन कर युद्ध करते हुए प्राणोत्सर्ग करतेे हैं) हुए हैं वे निम्न हैं-

1303 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया था उस समय शासक रतन सिंह था
1534 ई. में कर्मावती या कर्णावती (विक्रमादित्य की माता) के समय गुजरात के शासक बहादुर शाह ने आक्रमण किया था।
1567-68 ई. में उदय सिंह के समय अकबर ने आक्रमण किया।


समिद्धेश्वर महादेव मंदिर, चित्तौड़गढ़

राजस्थान का चित्तौड़गढ़ किलों का सिरमौर है। स्थापत्य एवं शिल्प कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस किले में बने समिद्धेश्वर महादेव का मंदिर अपनी स्थापत्य एवं शिल्प सौंदर्य के लिए अलग पहचान रखता है।
गौमुख कुण्ड के पास स्थित इस भव्य मंदिर का निर्माण मालवा के प्रसिद्ध राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में किया था। इसे त्रिभुवन नारायण का शिवालय और भोज का मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग और पीछे की दीवार में शिव की विशाल आकार की त्रिमूर्ति बनी है।
यहीं मण्डप के पश्चिमी दीवार पर खुदा शिलालेख बताता है कि मंदिर का जीर्णोद्धार सन् 1428 में महाराणा मोकल द्वारा करवाया गया। उस समय से ही यह मोकलजी के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

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