बंगाल के नवाब और अंग्रेजों के मध्य सत्ता संघर्ष

बंगाल के नवाब और अंग्रेजों के मध्य सत्ता संघर्ष 

  • अंग्रेजों ने बंगाल में अपनी प्रथम कोठी 1651 ई. में हुगली में तत्कालीन बंगाल के सूबेदार शाहशुजा (शाहजहां का दूसरा बेटा) की अनुमति से बनायी तथा बंगाल से शोरे, रेशम और चीनी का व्यापार आरम्भ किया।
  • उसने अंग्रेजों को 3000 रुपये वार्षिक में बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा में मुक्त व्यापार की अनुमति प्रदान की।
  • 1658 ई. में औरंगजेब ने मीरजुमला को बंगाल का सूबेदार नियुक्त किया। उसने अंग्रेजों के व्यापार पर कठोर प्रतिबन्ध लगा दिया।
  • 1698 में सूबेदार अजीमुशान द्वारा अंग्रेजों को सूतानती कालीघाट एवं गोविन्दपुर की जमींदारी दे दी गई।
  • मुर्शीदकुली जफर खां जो औरंगजेब के समय में बंगाल का दीवान तथा मुर्शिदाबाद का फौजदार था, बादशाह की मृत्यु के बाद 1717 में बंगाल का स्वतंत्र शासक बन गया।
  • मुर्शिदकुली खां ने बंगाल की राजधानी को ढ़ाका से मुर्शिदाबाद हस्तांनरित कर दिया।
  • अलीवर्दी खां ने यूरोपियों की तुलना मधुमक्खियों से करते हुए कहा कि ‘यदि उन्हें न छेड़ा जाय तो वे शहद देंगी और यदि छेड़ा जाय तो काट-काट कर मार डालेंगी।’
  • 1756 में अलीवर्दी के पौत्र सिराजुद्दौला नवाब बना।
  • पूर्णिया का नवाब शौकत जंग (सिराज की मौसी का लड़का) तथा घसीटी बेगम सिराज की मौसी दोनों ही सिराजुद्दौला के प्रबल विरोधी थे।
  • अक्टूबर 1756 ई. में ‘मनिहारी के युद्ध’ में सिराज ने शौकत को पराजित कर उसकी हत्या कर दी।
  • सिराज का अंग्रेजो से सम्बन्ध कडुवाहट भरा था, जिसके लिए कई कारण जिम्मेदार थे-
  1. अंग्रेजों द्वारा नवाब की सत्ता की अवहेलना कर उसके विरूद्ध षड्यंत्र में शामिल लोगों को बढ़ावा देना।
  2. नवाब के राज्यारोहण के समय उसे उचित सम्मान एवं उपहार कंपनी द्वारा न देना।
  3. नवाब को कंपनी द्वारा कासिम बाजार फैक्ट्री के निरीक्षण की अनुमति न मिलना।
  4. नवाब की अनुमति के बिना फोर्ट विलियम की किलेबन्दी को सुदृढ़ करना।
  5. फर्रूखसियर द्वारा प्रदत्त व्यापार का विशेष अधिकार दस्तक (फ्री पास) का कम्पनी के कर्मचारियों द्वारा अपने निजी व्यापार में किया जा रहा दुरूपयोग।
  • दस्तक वस्तुतः कर मुक्त व्यापार करने का परमिट या पारपत्र था। 1717 में मुगल सम्राट फर्रूखसियर द्वारा जारी फरमान में सीमाशुल्क से मुक्त व्यापार करने की अनुमति के बाद कलकत्ता की अंग्रेज फैक्ट्री का प्रेसीडेंट दस्तक को जारी करता था।
  • कलकत्ता पर अधिकार 15 जून 1756 को
  • कलकत्ता के गवर्नर डूके को ज्वारग्रस्त फुल्टा द्वीप में शरण लेनी पड़ी। मिस्टर हॉलवेल ने नवाब के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया।
ब्लैक हाल ट्रेजडी
  • 20 जून को फोर्ट विलियम के पतन के बाद सिराज ने बंदी बनाये गये 146 कैदियों को जिसमें स्त्री और बच्चे भी थे, को एक घुटन युक्त अंधेरे कमरे में ही बंद कर दिया।
  • 9 फरवरी 1757 को ‘अलीनगर की संधि’ करनी पड़ी।

  • 9 फरवरी 1757 को कंपनी और नवाब सिराज के मध्य सम्पन्न अलीनगर की संधि की शर्तों के अनुसार नवाब ने मुगल बादशाह द्वारा कंपनी को प्रदत्त समस्त व्यापारिक सुविधा को स्वीकार कर लिया।
  • क्लाइव ने कूटनीति के सहारे नवाब के उन अधिकारियों को अपनी ओर मिलाना चाहा जो नवाब से असंतुष्ट थे, इनमें सेनापति मीर जाफर, साहूकार जगत सेठ, मानिक चन्द्र, कलकत्ता का व्यापारी राय दुर्लभ तथा अमीनचन्द्र थे।

प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 ई.

  • अंग्रेजों और सिराजुद्दौला की सेनाओं के बीच मुर्शिदाबाद के दक्षिण में नदिया जिले में भागीरथी नदी के किनारे प्लासी नामक गांव मे आमने-सामने हुई।
  • पर यह युद्ध दोनों सेनाओं के बीच प्रतीकात्मक ही रहा, क्योंकि साजिश के चलते नवाब की ओर से मीरजाफर व रायदुर्लभ अपनी विशाल सेनाओं के साथ चुपचाप खड़े रहे।
  • सिराजुद्दौला की ओर से मीरमदान, मोहनलाल जैसे देशभक्त थे, जिसे एक फ्रांसीसी अफसर से सहायता मिल रही थी।
  • इस युद्ध में अंग्रेजी सेना के मात्र 29 और नवाब पक्ष के 500 लोग मारे गये। इस प्रकार बिना कोई विशेष लड़ाई लड़े अंग्रेज यह युद्ध जीत गये। इस युद्ध को भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता का आरंभ माना जा सकता है।
  • के.एम. पणिक्कर के अनुसार ‘ यह एक सौदा था जिसमें बंगाल के धनी सेठों तथा मीरजाफर ने नवाब को अंग्रेजों के हाथों बेच डाला।’
  • प्लासी के बाद बंगाल में ल्यूक स्क्राफ्ट्रम को नवाब के दरबार में अंग्रेज रेजिडेंट नियुक्त किया गया।
  • मीरजाफर क्लाइव की कठपुतली के रूप में जब तक अंग्रेजों की महत्त्वाकांक्षा को पूरा कर सकने में समर्थ था तब तक पद पर बना रहा। उसकी दयनीय स्थिति पर मुर्शिदाबाद के एक दरबारी ने ‘इसे कर्नल क्लाइव का गीदड़’ की उपाधि दी थी।
  • 24 परगनों की जमींदारी से पुरस्कृत किया।
  • क्लाइव को 2,34,000 पाउंड की निजी भेंट दी।
  • 150 लाख रुपये सेना तथा नाविकों को पुरस्कार स्वरूप ।
  • जब मीरजाफर क्लाइव की बढ़ती धनपिपासा को शान्त नहीं कर सका तो 1760 ई. में उसे पदच्युत कर उसके जामाता मीरकासिम को बंगाल का नवाब बनाया गया। भारतीय इतिहास में इस वर्ष को शांतिपूर्ण क्रांति का वर्ष कहा जाता है।
  • 27 सितम्बर 1760 को अंग्रेजों एवं मीरकासिम के मध्य एक संधि हुई जिसके आधार पर मीरकासिम ने कंपनी को बर्दवान, मिदनापुर तथा चटगांव के जिले देने की बात मान ली और इसके साथ ही दक्षिण के सैन्य अभियानों में कम्पनी को 5 लाख रुपये देने की बात कही।

सन्धि की अन्य शर्तें निम्नलिखित थी-

  • मीरकासिम ने सिल्हट के चूने के व्यापार में कम्पनी के आधे भाग को स्वीकार किया।
  • मीरकासिम ने कम्पनी के मित्र अथवा शत्रु को अपना मित्र अथवा शत्रु मानना स्वीकार किया।
  • दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आसामियों को अपने-अपने प्रदेशों मे बसने की छूट दी।
  • कंपनी नवाब के आंतरिक मामलों मे हस्तक्षेप नहीं करेंगी।
  • उसने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानान्तरित किया क्योंकि वह मुर्शिदाबाद के षड्यंत्रमय वातावरण से स्वयं को दूर रखना चाहता था।
  • उसने अपनी सेना को यूरोपीय ढ़ंग से गठित करने के लिए मुंगेर में तोडेदार बंदूकों एवं तोपों के कारखानों की स्थापना की तथा सैनिकों की संख्या में वृद्धि की।
  • सेना को गुर्गिन खां नामक आर्मेनियाई के नियंत्रण में रखा।

बक्सर के युद्ध से पहले मीर कासिम अंग्रेजों से निम्नलिखित युद्धों में पराजित हुआ-



  • करवा का युद्ध 9 जुलाई 1763 ई.
  • गिरिया का युद्ध 4-5 सितम्बर
  • उद्यौनला का युद्ध 1763 ई.

बक्सर का युद्ध 23 अक्टूबर 1764 ई.

  • मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मीरकासिम ने मिलकर अंग्रेजों के विरूद्ध एक सैन्य गठबंधन का निर्माण किया। दूसरी ओर अंग्रेजी सेना का नेतृत्व कुशल सेनापति कैप्टन मुनरो ने किया।

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