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Sunday, September 17, 2017

भारत में समाचार-पत्रों का विकास

  • भारत में प्रिंटिंग प्रेस लाने का श्रेय पुर्तगालियों को जाता है। 1557 ई. में गोवा के कुछ पादरी लोगों ने भारत की पहली पुस्तक छापी।
  • 1684 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भी भारत में प्रिंटिंग प्रेस ‘मुद्रणालय‘ की स्थापना की।
  • भारत में पहला समाचार-पत्र निकालने का प्रयत्न कम्पनी के असंतुष्ट कार्यकर्त्ताओं ने किया था, जिनका उद्देश्य कम्पनी के अधिकारियों के अनुचित कार्यो का भण्डाफोड करना था।
  • इस दिशा में पहला प्रयत्न 1776 ई. में विलियम बोल्ट्स ने किया था लेकिन शासकीय पक्ष की प्रतिक्रिया के कारण वह समाचार पत्र निकानले मे सफल नही हुआ था।
  • भारत का पहला समाचार पत्र 1780 ई. में जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने निकाला था जिसका नाम ‘द बंगाल गजट‘ अथवा ‘द कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर‘ था। लेकिन सरकारी अधिकारियो की आलोचना करने के कारण इसका प्रेस जब्त कर लिया गया।
  • नवंबर 1780 में प्रकाशित ‘इण्डिया गजट‘ दूसरा भारतीय समाचार पत्र था। उसके बाद 1784 में 'कलकत्ता गजट', 1785 में ‘बंगाल जनरल‘ 1785 में ही ‘द ओरिएण्टल मैंग्जीन ऑफ कलकत्ता‘ 1786 में ‘कलकत्ता क्रॉनिकल' 1788 में 'मद्रास कूरियर' इत्यादि।
  • 19वीं शताब्दी में अ्रग्रेजों द्वारा सम्पादित पत्र 'टाइम्स ऑफ इण्डिया, 1861, स्टेट्स मैन 1878 फ्रेंड ऑफ इण्डिया तथा 'इंग्लिश मैन' कलकत्ता से मद्रास मेल 1865 पायनियर 'इलाहाबाद'  सिविल एण्ड मिलिटरी गजट, 1876 'लाहौर'
  • इनमें 'इंग्लिश मैन' रूढिवादी एवं प्रतिक्रियावादी था जबकि 'स्टेटस मैन' उदार विचारों का अखबार था।

1799 का समाचार पत्रों का सेंसरशिप अधिनियम 

  • लार्ड वेलेजली ने 1799 में समाचार पत्रों का सेंसरशिप अधिनियम पारित कर दिया। इसके अनुसार-
  • 1. समाचार पत्रोंको सम्पादक मुद्रक और स्वामी का नाम छापना अनिवार्य कर दिया गया।
  • 2. प्रकाशक को प्रकाशित किए जाने वाले सभी तत्वों का सरकार के सचिव के सम्मुख प्री-सेंसरशिप के लिए भेजना होता था। 'पत्रेक्षण अधि.'
  • - 1818 में समाचार पत्रों का प्री सेंसरशिप बन्द कर दिया गया।

1823 का अनुज्ञप्ति अधिनियम The Licensing Regulations
  • 1823 का अनुज्ञप्ति अधिनियम जॉान एडमस ने लागू किया जब वह कार्यवाहक गवर्नर जनरल था। इसके मुख्य प्रावधान इस प्रकार थे-
  1. मुद्रक तथा प्रकाशक को मुद्रणालय स्थापित करने के लिए अनुज्ञप्ति लेनी होगी।
  2. अनुज्ञप्ति के बिना किसी भी साहित्य को मुद्रण अथवा प्रकाशित करने पर 400 रूपए जुर्माना अथावा उसके बदले कारावास का दण्ड होगा और दण्डनायको को अनुमति थी कि बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त मुद्रणालय को जब्त भी कर लें।
  3. गवर्नर-जनरल को अधिकार था कि वह किसी अनुज्ञप्ति को रद्द कर दे अथवा नया प्रार्थना पत्र मांग ले।
  • यह आज्ञा विशेशतया उन समाचार-पत्रों के विरूद्ध ली जो भारतीय भाशाओं में प्रकाशित थे। राजा राममोहन राय की 'मिरात-उल-अखबार' पत्रिका को बन्द होना पड़ा।

The Liberation of the Indian Press 1835
भारतीय समाचार पत्रों का स्वतंत्र होना, 1835
 

  • कार्यवाहक गवर्नर जनरल चार्ल्स मेटकाफ 1835-36 ने 1823 के नियमों को रद्द करके एक ऐसा अधिनियम बनाया कि अब मुद्रक तथा प्रकाशक को केवल प्रकाशन के स्थान की निश्चित सूचना ही देनी थी और वह सुगमता से कार्य कर सकता था।
  • चार्ल्स मेटकाफ भारतीय समाचार पत्रों के मुक्तिदाता कहलाए और उनके द्वारा बनाए गए नियम 1856 तक चलते रहे।

1857 का अनुज्ञप्ति अधिनियम

  • 1857 का अनुज्ञप्ति अधिनियम 1857 के विद्रोह से उत्पन्न हुई आपता कालीन स्थिति से निपटने के लिए लागू किया गया था।
  • इस अधिनियम के अनुसार बिना अनुज्ञप्ति के मुद्रणालय रखना और प्रयोग करना रोक दिया गया और सरकार को किसी भी समय अनुज्ञप्ति देने अथवा रद्द करने का अधिकार था।
  • इस अधि. की अवधि केवल एक वर्ष थी। इसके बाद मेटकाफ के बनाए नियम ही चलते रहे।

1867 का पंजीकरण अधिनियम 

  • 1867 के पंजीकरण अधिनियम का उद्देश्य समाचार पत्रों अथवा मुद्रणालयों पर रोक लगाना नही था बल्कि नियमित करना था।
  • इस अधिनियम के अनुसार मुद्रित पुस्तक तथा समाचार-पत्रा पर मुद्रक प्रकाशक और मुद्रण स्थान का नाम होना आवश्यक था।
  • इसके अलावा प्रकाशन के 30 दिन के भीतर पुस्तक की एक प्रति बिना मूल्य के स्थानीय सरकार को देनी होती थी।

देशी भाषा समाचार पत्र अधिनियम The Vernacular Press Act 1878

  • 1878 के देशी भाषा समाचार पत्र अधिनियम से सरकार ने भारतीय समाचार पत्रों को अधिक नियंत्रण में लाने का प्रयत्न किया और इसे सरकार के खिलाफ छपने वाले लेखों को दबाने और दण्डित करने का अधिक सफल अस्त्र बनाया।

 इस अधिनियम के अनुसार-

  1. डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेटों को स्थानीय सरकार की आज्ञा से किसी भारतीय भाशा के समाचार पत्र को आज्ञा देने का अधिकार दे दिया कि वे बंधन पत्रों पर हस्ताक्षर कराऐं कि कोई समाचार पत्र ऐसी सामग्री प्रकाशित नही करेगा जिससे सरकार विरोधी भावना भडके अथवा सम्राज्ञी की प्रजा के भिन्न-भिन्न जाति वर्ण और धर्मावलम्बियों में एक-दूसरे के विरूद्ध वैमनस्य बढें।
  2. जिला दण्डनायक को यह अधिकार दे दिया गया कि वह सरकार विरोधी भावना भडकानें वाले समाचार पत्रों को जमानत देने पर बाध्य कर सकता था और आज्ञा भंग करने पर जब्त कर सकता था पुनः अपराध करने पर मुद्रणालय भी जब्त किया जा सकता था।
  3. मजिस्ट्रेट का निर्णय अंतिम होता था और उसमें अपील की अनुमति नही होती थी।
  4. यदि कोई समाचार पत्र इस अधिनियम से बचना चाहता था तो उसे छापी जाने वाली सामग्री का प्रफू सरकार की सेंसर को पहले देनी होती थी।

  • देशी भाषा समाचार पत्र अधिनियम 1878 को मुंह बन्द करने वाला अधिनियम 'Gagging Act' कहा गया। इस अधिनियम का सबसे घिनौना पक्ष यह था कि इसके द्वारा देशी भाषा तथा अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्रों में भेद किया गया था तथा इसमें अपील करने का अधिकार भी नही दिया गया था।
  • इस अधिनियम के अधीन सोमप्रकाश, भारत मिहिर, ढाका प्रकाश, सहचर तथा अन्य अनेक समाचार पत्रों के विरूद्ध मामले दर्ज किए गए।
  • नए भारत सचिव लार्ड क्रेनबुक ने इस अधिनियम के पूर्व-पत्रेक्षण धारा का विरोध किया। सितंबर 1878 मे पूर्व-पत्रेक्षण धारा हटा दी उसके बदले एक समाचार पत्र आयुक्त नियुक्त किया गया, जिसका काम सच्चे और यथार्थ समाचार देना था।

1908 समाचार पत्र अधिनियम

  • लार्ड कर्जन की नीतियों द्वारा उत्पन्न अशान्ति से राष्ट्रीय कांग्रेस में उग्रवादी दल का उत्थान हुआ और हिंसक घटनाऐ हुई। समकालीन समाचार पत्रों ने भी सरकार की कडी आलोचना की।
  • इनको दबाने के लिए सरकार ने एक अधिनियम Newspper (Incitement to offences) Act 1908 पारित किया।
  1. जो समाचार पत्र आपत्तिजनक सामग्री, जिससे लोगों को हिंसा अथवा हत्या की प्रेरणा मिले, प्रकाशित करेगा उसकी सम्पत्ति अथवा मुद्रणालय को जब्त किया जा सकता था।
  2. स्थानीय सरकार 1867 के समाचार पत्रों तथा पुस्तकों के पंजीकरण के अधिनियम के अधीन किसी मुद्रक अथवा प्रकाशक की दी गई घोषणा को रद्द कर सकती थी।
  3. समाचार पत्रों के मुद्रक तथा प्रकाशकों को मुद्रणालय के जब्त होने के 15 दिन के भीतर उच्च न्यायालय में अपील करने की अनुमति थी।
  • इस अधिनियम के अधीन सरकार ने 9 समाचार पत्रों पर मुकद्दमें चलाए और 7 मुद्रणालय जब्त कर लिये।

1910 का भारतीय समाचार पत्र अधिनियम 

  • 1910 के समाचार पत्र अधिनियम के द्वारा 1878 के अधिनियम के सभी घिनौने पक्षों को पुनर्जीवित कर दिया गया। इस अधिनियम में निम्नलिखित प्रावधान किए गए थे।
  1. सरकार किसी मुद्रणालय के स्वामी अथवा समाचार पत्र के प्रकाशक से पंजीकरण जमानत मांग सकती थी। जो कम से कम 500 तथा अधिक से अधिक 2000 रूपये होती थी।
  2. सरकार को जमानत जब्त करने और पंजीकरण रद्द करने का अधिकार था।
  3. सरकार को पुनः पंजीकरण के लिए कम से कम 1000 रूपये और अधिक से अधिक 10,000 रूपये मांगने का अधिकार था।
  • इस अधिनियम के अधीन 991 मुद्रणालयों एवं समाचार पत्रों के विरूद्ध कार्यवाही की गयी।
  • 1921 में सर तेजबहादुर सप्रू, जो उस समय विधि सदस्य थे, की अध्यक्षता में एक समाचार पत्र समिति नियुक्त की गई, जिसका उद्देश्य समाचार पत्रों के कानून की समीक्षा करना था।
  • इसकी सिफारिशों पर 1908 और 1910 के अधिनियम रद्द कर दिए गए।
  • 1931 का भारतीय समाचार पत्र ‘संकटकालीन शक्तियां‘ अधिनियम
  • 1931 का भारतीय समाचार पत्र अधिनियम प्रान्तीय सरकारों को सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रचार को दबााने के लिए अत्यधिक शक्तियां देने के उद्देश्य से पारित किया गया था।
  • अधिनियम की धारा 4‘1‘ के अनुसार सरकार को शब्द, संकेत अथवा आकृति द्वारा किसी हत्या के अथवा अन्य किसी संज्ञेय अपराध को करने की प्रेरणा देने पर अथवा ऐसे अपराध की प्रशंसा अथवा अनुमोदन करने पर कडा दण्ड देने की अनुमति थी।

Press Enquiry Committee, 1947  समाचार पत्र जांच समिति 

  • 1947 में संविधान सभा में स्पश्ट किए मौलिक अधिकारों के प्रकाश में समाचार पत्र कानूनों की समीक्षा करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने एक समाचार पत्र जांच समिति नियुक्त किया।
  • इस समिति ने 1931 के अधिनियम पंजीकरण अधिनियम, 1931 के देशी राज्य ‘ असन्तोष के विरूद्ध रक्षा‘ अधिनियम इत्यादि को रद्द किए जाने की सिफारिश की।
  • 1951 का समाचार पत्र ‘आपत्तिजनक विषय‘ अधिनियम
  • 1951 के समाचार पत्र ‘ आपत्तिजनक विषय‘ अधि. के द्वारा केन्द्रीय तथा राजकीय समाचार पत्र अधिनियम जो उस समय लागू था, समाप्त कर दिया गया।
  • इस एक्ट से सरकार को समाचार पत्रों तथा मुद्रणालयों से आपत्तिजनक विषय प्रकाशित करने पर जमानत मांगने, जब्त करने तथा अधिक जमानत मांगने का अधिकार दे दिया गया।
  • समाचार पत्रों के पीड़ित प्रकाशक तथा मुद्रणालय के स्वामियों को जूरी द्वारा परीक्षा मांगने का अधिकार दे दिया गया और यह एक्ट 1956 तक लागू रहा।
  • इस एक्ट का कडा विरोध होने के कारण न्यायाधीश जी.एस.राजाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया गया। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट अगस्त 1954 में प्रस्तुत की। इस आयोग की सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार किया और कुछ को नहीं।
  • हाल के वर्षों में सरकार ने ‘डेलिवरी ऑफ बुक्स एण्ड न्यूज पेपर्स ‘पब्लिक लाइब्रेरीज‘ एक्ट 1954 कार्यकर्त्ता पत्रकार ‘सेवा शर्ते‘ तथा विविध आदेश, 1955
  • समाचार पत्रों का पन्ने तथा मूल्य अधिनियम, 1956 तथा संसद कार्यवाही ‘संरक्षण तथा प्रकाशन‘ अधि. 1960 पारित किए है।

19 वीं सदी के समाचार-पत्र 

  • किसी भी भारतीय द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित समाचार-पत्र गंगाधर भट्टाचार्य का साप्ताहिक बंगाल गजट 1816 ई. था।
  • मॉर्शमैन के नेतृत्व में 1818 के अप्रैल में दिग्दर्शन नामक पत्रिका बंगाली में निकाली।
  • इसी वर्ष काशीसेन के संपादन में समाचार दर्पण का ।
  • 1818 में ब्रिटिश व्यापारियों ने जेम्स सिल्क बर्किंघम नामक पत्रकार की सेवा प्राप्त की। बर्किंघम ने कलकत्ता जर्नल का संपादन किया। बर्किंघम ने ही प्रेस को जनता का प्रतिबिम्ब बनाया था।
  • भारत में राश्टृीय प्रेस की स्थापना का श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। इन्होंने 1821 में बंगाल में ‘संवाद कौमुदी‘ 1822 में फारसी में ‘मिरात-उल-अखबार‘ अंग्रेजी में ‘ब्राह्मीनिकल मैग्जीन‘ 1822 में 'चंद्रिका' "सामाजिक तथा धार्मिक विचारों का विरोध करने"
  • उसी वर्ष गुजराती में 'दैनिक बम्बई' 1830 में बांग्ला में 'बंगदत्त' का प्रकाशन द्वारकानाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार शुरू किया।
  • बंबई से गुजराती में 1831 में जाने जमशेद का और 1851 में 'रफ्त गोफ्तार' दादा भाई नौरोजी तथा अखबारे सौदागर का प्रकाशन आरंभ हुआ।
  • स्टेट्समैन का सम्पादन रॉबर्ट नाइट ने किया।
  • पायनियर सरकार का समर्थक तथा भारतीयों का आलोचक।
  • मद्रास का मद्रास मेल यूरोपीय वाणिज्य, भू स्वामी तथा महाजनों का प्रतिनिधित्व करता था।

 भारतीयों द्वारा प्रकाशित एवं संपादित पत्र

  • 1858 में सोमप्रकाश का प्रकाशन बंगाली साप्ताहिक के रूप् में ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने किया। बंगाल में जब नील पैदा करने वाले इलाके में अशांति बढ़ी तो सोमप्रकाश ने किसानों के हितों का जोरदार समर्थान किया।
  • हिंदू पैट्रिअट को विद्यासागर ने ले लिया जिसका संपादन क्रिस्टोदास पाल 'भारतीय पत्रिका का राजकुमार' कर रहे थे। उनकी सहायता मदनमोहन घोष तथा द्वारकानाथ टैगोर जैसे नेता कर रहे थे।
  • 1874-75 में इस पत्र के संवाददाता सुरेन्द्रनाथ बनर्जी थे। बाद में ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन ने इसे खरीद लिया था।
  • 1861 में देवेन्द्रनाथ टैगोर तथा मदनमोहन घोष ने इंडियन मिश्र का प्रकाशन शुरू किया।
  • उत्तरी भारत का किसी भी भारतीय द्वारा संपादित दैनिक प्रकाशित होने वाला एकमात्र पत्र इंडियन मिरर था।
  • केशवचंद्र सेन द्वारा प्रकाशित सुलभ समाचार बंगला का महत्वपूर्ण हिन्दी दैनिक पत्र था।
  • 1868 में मोतीलाल घोष ने अमृत बाजार पत्रिका को एक अंग्रेजी-बंगाली साप्ताहिक के रूप में शुरू किया था। इसका दृष्टिकोण राष्ट्रवादी था।
  • 1878 में लिटन के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट से बचाने के लिए रातों-रात यह अंग्रेजी में प्रकाशित होने लगा।
  • 1891 से इसका दैनिक प्रकाशन होने लगा।
  • जोगेंद्र नाथ बोस ने 1881 में बंगवासी संजीवनी शुरू किया था।
  • 1878 में छोटूलाल मिश्र और दुर्गाप्रसाद मिश्र ने भारत मित्र प्रारंभ किया। कलकता
  • 1899-1907 के बीच जाने-माने लेखक बालमुकुंद गुप्त ने इसका संपादन किया। 'हिन्दी बंगवासी' का भी
  • 1907 में रामानंद चटर्जी ने मॉडर्न रिव्यू आरम्भ किया।
  • कालाकांकड से हिंदी में हिंदोस्तान का प्रकाशन स्वामी राजा रामपाल सिंह ने किया। इस पत्र के संपादकीय विभाग से बाालमुकुंद गुप्त, मदन मोहन मालवीय तथा प्रतापनारायण मिश्र जुडे हुए थे।
  • 1861 में आगरा से ‘प्रजा हितैषी‘ तथा इटावा से ‘प्रजाहित‘ पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ।
  • वीर राघवचारी ने 1878 में अंग्रेजी में ‘हिन्दू‘ का प्रकाशन शुरू किया और इसके तीन साल बाद यह दैनिक पत्र में परिवर्तित हो गया। हिन्दू का दृष्टिकोण उदार एवं राष्ट्रवादी था।
  • ‘मराठा‘ बम्बई में अंग्रेजी भाषा में एक साप्ताहिक के रूप में तथा मराठी में ‘केसरी‘ 1881 में शुरू हुआ। शुरू में केसरी के सम्पादक आगरकर तथा मराठा के सम्पादक केलकर थे। बाद में इन दोनों समाचार पत्रों का स्वामित्व एवं सम्पादन बाल गंगाधर तिलक के हाथों में आ गया।
  • 1860 में नवीन चंद्र राय क सम्पादन में ‘ज्ञानप्रदायिनी‘ पत्रिका निकलनी शुरू हुई।
  • सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने 1879 में ‘बंगाली‘ का प्रकाशन शुरू किया। यह उदारवादी विचारों वाला अखबार था लेकिन इसने राजनीतिक विचारधारा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
  • 1862 में रानाडे के सम्पादन में ‘इन्दुप्रकाश‘ का प्रकाशन शुरू हुआ। उसके बाद 1864 में बी.एन. मांडलिक ने ‘नेटिव ओपिनियन‘ का सम्पादन शुरू किया।
  • 1867 में भारतेंदु के संपादन में बनारस से कविवचन सुधा प्रकाशित होने लगी। इसकी संपादकीय टिप्पणियां राजनीतिक तथा सामाजिक विषयों पर होती थी।
  • 1872 में भारतेन्दु की अत्युत्तम मासिक पत्रिका हरिश्चन्द्र मैग्जीन का प्रकाशान षुरू हुआ। इस पत्रिका ने देशप्रेम और समाज सुधार के भाव अभिव्यक्त होते थे।
  • 1877 में इलाहाबाद से बालकृष्ठ भट्ट का ‘हिन्दी प्रदीप‘ प्रकाशित हुआ। यह पत्र राष्ट्रीय विचारों का पोशक, स्वाधीन विचारों का समर्थान तथा अपने समय के श्रेष्ठ पत्रों में से एक था।
  • 1884 में काशी से रामकृश्ण वर्मा ने भारत जीवन का प्रकाशन आरंभ किया।
  • 1899 में सच्चिदानंद सिंहा ने अंग्रेजी मासिक ‘हिन्दुस्तान स्टेण्डर्ड‘ रिव्यू की स्थापना की।
  • नरमदल के विचारों को फैलाने के उद्देश्य से बॉम्बे क्रॉनिकल का प्रकाशन फिरोजाशाह मेहता ने 1913 में आरम्भ किया।
  • बंगाल में उग्र राष्ट्रीयवाद को फैलाने का काम अरविन्द घोष और वारीन्द्र घोष ने युगांतर तथा वंदेमातरम् पत्रों के माध्यम से किया।
  • जी. सुब्रह्मन्य के अधीन तमिल में प्रकाशित स्वदेशमित्रन् था।
  • 1900 में जी.ए. नटेशन ने इंडियन रिव्यू का प्रकाशन आरंभ किया।
  • होमरूल आन्दोलन के प्रचार करने के उद्देश्य से एनी बेसेंट ने मद्रास स्टैण्डर्ड को अपने संचालन में लेकर उसे नया नाम न्यू इंडिया दिया।
  • अंग्रेजी साप्ताहिक सर्वेंट ऑफ इंडिया का प्रकाशन 1918 में शुरू हुआ। इस पत्र का संपादन श्रीनिवास शास्त्री ने किया।
  • गांधीजी ने यंग इंडिया और हरिजन का प्रकाशन
  • मोतीलाल नेहरू ने 1919 में अंग्रेजी दैनिक ‘इण्डिपेन्डेंस‘ का प्रकाशन किया।
  • हिन्दी पत्र ‘आज‘ की स्थापना शिव प्रसाद गुप्त ने की थी। 1922 में अंग्रेजी दैनिक ‘हिन्दुस्तान टाइम्स‘ का प्रकाशन के.एम. पन्निकर के संपादन मे प्रारम्भ किया।
  • अकाली-सिख आंदोलन के परिणामस्वरूप इसकी स्थापना हुई। इसे पं. मदन मोहन मालवीय को बेच दिया। 1927 में इस पत्र को जी.डी. बिडला ने अपने हाथों में ले लिया।
  • मराठी साप्ताहिक क्रांति, वर्कर्स एंड पेंजेंटस पार्टी ऑफ इण्डिया‘ का प्रतिनिधित्व कर रहा था।
  • न्यू स्पार्क- मार्क्सवाद का प्रचार
  • कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना के परिणामस्वरूप कांग्रेस सोशलिस्ट का प्रकाशन शुरू हुआ।
  • एम.एन. राय ने अंग्रेजी साप्ताहिक इंडिपेंडेंट इंडिया।
  • 1930 में एस. सदानंद के संपादन में ‘दी फ्री प्रेस जनरल का प्रकाशन। यह पत्र कांग्रेस तथा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थक था।
  • 1826 में कानपुर से जुगलकिशोर द्वारा हिन्दी में प्रकाशित उदण्ड मार्तण्ड भारत का पहला हिन्दी का समाचार पत्र है।
  • सन् 1920-20 के मध्य उर्दू पत्रकारिता
  • 1912 में ‘अल-हिलाल‘ तथा 1913 में ‘अल-विलाग‘ कलकत्ता से प्रकाशित हुए। इन अखबारों को निकालने में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद का महत्वपूर्ण योगदान था।
  • मोहम्मद अली ने अंग्रेजी में ‘कामरेड‘ तथा उर्दू में ‘हमदर्द‘ का प्रकाशन आरम्भ किया।
  • बिजनौर से हमीद-उल-अन्सारी ने ‘मदीना‘ तथा लखनउ से ‘हमदम‘ अब्दुल बरी ने प्रकाशन किया।
  • 1910 में गणेश शंकर विद्यार्थी ने राष्ट्रीयता का पोशक और देशी रियासतों की जनता तथा किसान मजदूरों का समर्थक पत्र ‘प्रताप‘ का प्रकाशन शुरू किया।
  • 1913 में गदर का प्रकाशन सेनफ्रांसिस्कों से आरंभ हुआ। यह हिन्दुस्तानी गदर पार्टी का मुख्यपत्र था। यह असांप्रदायिक, धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक भावनाओं से ओतप्रोत समाचार-पत्र था। जनवरी 1914 में पंजाबी में इसका प्रकाशन आरम्भ हुआ।

समाचार एजेंसियां

  • 1935 तक चार समाचार एजेंसियों की भी स्थापना हो चुकी थी। ये एजेंसियां थीः
  • रायटर 1860, ए.पी.आई. ‘एसोसिऐट प्रेस ऑफ इण्डिया 1905
  • यू.पी.आई ‘यूनाइटेड प्रेस ऑफ इण्डिया 1934


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