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Sunday, June 11, 2017

Securities and Exchange Board of India- SEBI


भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड 
Securities and Exchange Board of India- SEBI


  • सेबी एक ‘गैर-संवैधानिक संस्था’ थी जिसकी स्थापना केन्द्र सरकार द्वारा संसद में एक कानून पास करके 12 अप्रैल, 1988 को की गई थी। बाद में 30 जनवरी 1992 को एक अध्यादेश द्वारा इस संस्था को वैधानिक दर्जा भी प्रदान कर दिया गया।
  • सेबी का मुख्यालय मुम्बई में है। इसके क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता, दिल्ली तथा चेन्नई में स्थापित किये गये है।
  • सेबी शेयर बाजार में चलने वाले वृहद कारोबार को नियंत्रित और विनियमित करता है।

सेबी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है-

  1. प्रतिभूति बाजार में निवेशकों के हितों का संरक्षण तथा प्रतिभूति बाजार को उचित उपायों के माध्यम से विनियमित एवं विकसित करना।
  2. स्टॉक एक्सचेंजों तथा किसी भी अन्य प्रतिभूति बाजार के व्यवसाय का नियमन करना।
  3. स्टॉक ब्रोकर्स, सब-ब्रोकर्स, शेयर ट्रान्सफर एजेन्ट्स, ट्रस्टीज, मर्चेंट ब्रैंकर्स, अण्डर-राइटर्स, पोर्टफोलियों मैनेजर आदि के कार्यों का नियमन करना एवं उन्हें पंजीकृत करना।
  4. म्यूचुअल फण्ड की सामूहिक निवेश योजनाओं को पंजीकृत करना तथा उनका नियमन करना।
  5. प्रतिभूतियों के बाजारों से सम्बन्धित अनुचित व्यापार व्यवहारों को समाप्त करना।
  6. प्रतिभूति बाजार से जुडे लोगों को प्रशिक्षित करना तथा निवेशकों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
  7. प्रतिभूतियों की इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक लगाना।

  • शेयर बाजार में गडबडियों के दोशियों को अधिक कठोर सजा के लिए सेबी को व्यापक अधिकार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेबी (संशोधन) अधिनियम, 2002 संसद से पास कराकर इसे 29 अक्टूबर, 2002 से लागू भी कर दिया गया है।
  • इस अधिनियम के अन्तर्गत सेबी द्वारा इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए 25 करोड रूपए तक का जुर्माना किया जा सकता है।
  • लघु निवेशकों के साथ धोखाधडी के मामलों में एक लाख रूपए प्रतिदिन की दर से एक करोड रूपए का जुर्माना आरोपित करने का प्रावधान भी इस अधिनियम में किया गया है।
  • संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब किसी भी शीयर बाजार को मान्यता प्रदान करने का अधिकार सेबी को हस्तान्तरित कर दिया गया है।
  • सेबी की नियामक शक्तियों में वृद्धि के लिए एक अध्यादेश  राष्ट्रपति ने 18 जुलाई, 2013 को जारी किया है। अध्यादेश के मसौदे को केन्द्रीय मन्त्रिमंडल की 17 जुलाई, 2013 की बैठक में मंजूरी दी गई थी।


भारत में वायदा कारोबारः


  • कमोडिटीज का तात्पर्य कच्चा तेल, खाद्य पदार्थो (गेहूं, चावल, दलहन, तिलहन) और धातुओं से है।
  • भारत में कुल चार कमोडिटी एक्सचेंज हैं। यथा-


  1. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स)- मुम्बई
  2. नेशनल कमोडिटी एण्ड डेराइवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स)- मुम्बई, 2003
  3. नेशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एनएमसीई)- अहमदाबाद, 2002
  4. इण्डियन कमोडिटी एक्सचेंज - गुडगांव, 2009


  • किसी वस्तु की आगामी भविश्य की कीमतों का अनुमान लगाकर उनकी खरीद-फरोक्त करना (फ्यूचर ट्रेडिंग) की ‘कीमत का व्यापार’ कहलाता है। भविष्य का भाव निर्धारित कर किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सकता है।

इनसाइड ट्रेकडंग का क्या आशय है?

  • उत्तर - शेयर बाजार से सम्बन्धित वह अवैध कार्य हैं जिसमें किसी कम्पनी के कर्मचारी या कोई सम्बन्धित व्यक्ति द्वारा आन्तरिक सूचनाओं का उपयोग करके षेयर ट्रेडिंग किया जाता है।
  • क्रिसिल, केयर तथा इक्रा तीनों भारत की क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां है।


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