राजस्थान में ऊर्जा संसाधन

 

rajasthan me urja sansadhan


  • वर्तमान में ऊर्जा का उपयोग मानव जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है, क्योंकि ऊर्जा की उपलब्धता ही आर्थिक विकास को नियंत्रित एवं निर्धारित करती है। 
  • वर्तमान में उद्योग, परिवहन, कृषि से लेकर घरेलू कार्यों आदि सभी क्रियाओं में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, क्योंकि वर्तमान युग मशीनी युग है और मशीनों को चलाने हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 

ऊर्जा स्रोतों को दो भागों में बांटा जाता है-

  • (1) परम्परागत ऊर्जा स्रोत जैसे कोयला (Thermal Power) खनिज तेल (पेट्रोलियम), जल विद्युत एवं अणु शक्ति।
  • (2) गैर-परम्परागत अथवा ऊर्जा के गैर-परम्परागत अथवा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, बायो गैस आदि।
  • राजस्थान में उपर्युक्त दोनों प्रकार के ऊर्जा स्रोत उपलब्ध है। राज्य ने विगत दशकों में ऊर्जा संसाधनों के विकास में प्रगति की है और वर्तमान सरकार भी ऊर्जा उत्पादन वृद्धि पर अत्यधिक ध्यान दे रही है। 

कोयला

  • ऊर्जा के प्राथमिक और प्रारम्भिक स्रोतों में कोयला प्रमुख है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से किया जाता रहा है। वर्तमान में कोयला का उपयोग तापीय ऊर्जा (Thermal Power) उत्पादित करने में किया जाता है।
  • राजस्थान राज्य कोयला प्राप्ति की दृष्टि से निर्धन है और यहां केवल लिग्नाइट प्रकार का कोयला प्राप्त होता है। इसे भूरा कोयला भी कहा जाता है। इसमें कार्बन की मात्रा 45 से 55 प्रतिशत तक होती है और यह धुआं अधिक देता है, अतः इसका औद्योगिक उपयोग नहीं होता।
  • राजस्थान में लिग्नाइट कोयला बीकानेर जिले के पलाना क्षेत्र में प्राप्त होता है। 


तापीय विद्युत

  • कोयले द्वारा उत्पादित विद्युत तापीय विद्युत (Thermal Power) कहलाती है। इसके लिये उत्तम कोटि के कोयले की आवश्यकता होती है जो राजस्थान में उपलब्ध नहीं है। अतः अन्य राज्यों से मंगाना पड़ता है। राजस्थान राज्य में तापीय विद्युत उत्पादन पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है और वर्तमान में कोटा सुपर थर्मल, सूरतगढ़ ताप परियोजना और छबड़ा थर्मल से तापीय विद्युत का उत्पादन हो रहा है और अन्य कुछ योजनायें निर्माणाधीन है।


कोटा सुपर थर्मल विद्युत परियोजना

  • इसका प्रारम्भ 1978 में प्रारम्भ किया गया। इसके प्रथम चरण में दो इकाइयों में जनवरी, 1983 और द्वितीय चरण की दो इकाइयों ने जुलाई, 1988 में विद्युत उत्पादन प्रारम्भ हुआ। 
  • इसकी उत्पादन क्षमता और इकाइयों की क्षमता में क्रमिक रूप से वृद्धि की जा रही है। अगस्त, 2009 में इसकी सातवीं इकाई ने उत्पादन प्रारम्भ कर दिया। कोटा थर्मल की कुल स्थापित क्षमता 1240 मेगावाट विद्युत है।


सूरतगढ़ सुपर ताप विद्युत परियोजना 

  • यह राजस्थान की प्रमुख विद्युत परियोजना है। इसे गंगानगर जिले के सूरतगढ़ में स्थापित किया गया है। यहां वर्तमान में 6 इकाइयां विद्युत उत्पादन कर रही है, इनमें प्रत्येक की क्षमता 250 मेगावाट है। जिनसे कुल 1500 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है।
  • सूरतगढ़ और छबड़ा ताप विद्युत गृहों को ‘सुपर क्रिटिकल’ बनाना गया है जिससे इनकी विद्युत उत्पादन क्षमता दुगनी हो जायगी।


छबड़ा थर्मल पावर परियोजना- 

  • बारां जिले के छबड़ा कस्बे में तापीय विद्युत परियोजना की प्रथम इकाई से 250 मेगावाट का विद्युत उत्पादन सितम्बर, 2009 में प्रारम्भ हो गया। इसमें तीन चरणों में 6 इकाइयां बनाई गई है जिनसे कुल 2320 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है। 
  • छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर ​प्रोजेक्ट इकाई 5 औ 6 का मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत द्वारा लोकार्पण 30 जून, 2019 को किया गया। यह प्रदेश की पहली सुपर क्रिटिकल इकाईयां है। 


गिरल थर्मल पावर प्रोजेक्ट, बाड़मेर

  • यह राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम और केएलएफ जर्मनी के सहयोग से निर्मित हैं। यह पहला गैसीकरण लिग्नाइट तकनीकी आधारित थर्मल पावर है। यह 2007 में स्थापित किया गया। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 250 मेगावाट है। 


नैवेली लिग्लाइट कार्पोरेशन

बीकानेर 

  • बरसिंगपुर में 125 मेगावाट क्षमता की दो इकाईयों को स्थापित करने का कार्य नेवेली लिग्लाइट द्वारा सम्पन्न किया है। 
  • पलाना क्षेत्र में 125 मेगावाट क्षमता की दो इकाईयों से विद्युत उत्पादन कार्य किया जा रहा है। 
  • बीठनीक में दो इकाईयों से 250 मेगावाट विद्युत उत्पादन कार्य किया जा रहा है।

Post a Comment

Previous Post Next Post