कम्प्यूटर Computer

 

Computer


कम्प्यूटर  परिभाषा (Defination of Computer)


कम्प्यूटर शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के कम्प्यूट (Compute) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है- गणना या गिनती करना। 


वास्तव में कम्प्यूटर के आविष्कार का मूल उद्देश्य शीघ्र गणना करने वाली मशीन का निमार्ण करना ही था। किन्तु आज कम्प्यूटर द्वारा किया जाने वाला 80 प्रतिशत से अधिक कार्य गणितीय या सांख्यकीय प्रकृति का नहीं होता। अतः कम्प्यूटर को मात्र एक गणना करने वाली युक्ति (Device) के रूप में परिभाषित करना इसके 80 प्रतिशत कार्य को उपेक्षित करना है।

कम्प्यूटर में गणना करने की क्षमता के अतिरिक्त तार्किक शक्ति एवं मैमोरी का भण्डार होता है तथा

पलक झपकते ही यह निर्देशों की पालना कर सकता है।


कम्प्यूटर की परिभाषाएं:-


कम्प्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसमें हम अपरिष्कृत आंकड़े देकर प्रोग्रामके नियंत्रण द्वारा उन्हें अर्थपूर्ण सूचनाओं में परिवर्तित कर सकते हैं। 


अपरिष्कृत आँकड़े (Raw Data) सूचनाओं, आँकड़ो आदि के रूप में कम्प्यूटर को दिए जाने वाले आगम  (Inputs) होते हैं। 


उदाहरण के लिए यदि हम किसी कक्षा में विद्यार्थियों की अंक तालिका बनाना चाहते हैं तो इसके लिए उन विद्यार्थियों के रोल नम्बर, नाम, कक्षा, विषय, प्राप्तांक आदि की आवश्यकता होगी। इन्ही जानकारियों को अपरिष्कृत आँकड़े कहा जाता है।


कम्प्यूटर की किसी विशिष्ट भाषा में लिखे गए निर्देशों के समूह को प्रोग्राम (Program) कहते हैं। कम्प्यूटर इन प्रोग्रामों द्वारा नियंत्रित होते हैं। 


अंक-तालिका निकालने के लिए भी एक प्रोग्राम बनाना पड़ता है। मान लीजिए इस प्रोग्राम में पहले निर्देश के अन्तर्गत रोल नम्बर भरना है, फिर नाम, फिर कक्षा और फिर अगले निर्देशों के अन्तर्गत विषय वार प्राप्तांक भरने हैं। उसके बाद वह प्रोग्राम पलक झपकते ही बिना किसी मानवीय श्रम के सभी प्राप्तांको का योग, प्रतिशत, श्रेणी, वरीयता क्रमांक आदि जानकारियां दे देगा।


अर्थपूर्ण सूचनाएं (Meaning ful Information) कम्प्यूटर प्रोग्राम के माध्यम से प्राप्त होने वाले वे परिणाम हैं जिनसे कोई अर्थ निकलता हो तथा वे उपयोगी हो। अर्थपूर्ण सूचनाएँ अव्यवस्थित, एकाकी, मूल आँकड़ों का व्यवस्थित रूप है। 


उदाहरण के लिए अंक-तालिका में जब परिणाम के रूप में प्राप्ताकों का योग, प्रतिशत, श्रेणी, वरीयता क्रमांक आदि निकालते हैं तो इन्हे अर्थपूर्ण सूचनाएं कहा जाता है।


कम्प्यूटर के प्रकार (Types of Computer)


विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटरों का आविष्कार विभिन्न उद्देश्यों से किया गया है। अतः सामान्यतः कम्प्यूटर का वर्गीकरण उनके अनुप्रयोग, आकार तथा उद्देश्य के आधार पर किया जाता है।


अनुप्रयोग के आधार पर वर्गीकरण (Classification Based on Application):-


अनुप्रयोग (Application) के आधार पर कम्प्यूटरों को निम्न तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:-

1. एनालॉग कम्प्यूटर (Analog Computer):- 

ये कम्प्यूटर अंकों पर कार्य न करते हुए, भौतिक रूप से उपलब्ध डाटा पर सीधे कार्य करते हैं। भौतिक डाटा ताप, दाब, लम्बाई, विद्युत अथवा अन्य द्रवों के प्रवाह आदि भौतिक राशियों के रूप में होते हैं। इन कम्प्यूटरों का उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ इन भौतिक राशियों के निरन्तर मापन की आवश्यकता होती है। जैसे इन्जीनियरिंग, इन्डस्ट्रीज एवं विज्ञान के क्षेत्रों में। एनालॉग संकेत सतत (Continuous) होते हैं। एनालॉग कम्प्यूटर एक विशेष उद्देश्य वाली मशीन है।

स्पीडोमीटर, घड़ियां, विद्युत मीटर, थर्मामीटर, वोल्टेज मीटर आदि एनालॉग कम्प्यूटर के कुछ अन्य उदाहरण हैं।

2. डिजीटल कम्प्यूटर (Digital Computer):-

ये कम्प्यूटर अंकों पर कार्य करते हैं। ये उन्हीं डाटा पर कार्य करते हैं जो बाइनरी डिजिट के रूप में होते हैं। डिजीटल कम्प्यूटर में सभी डाटा व निर्देश एक साथ इनपुट किये जाते हैं व कम्प्यूटर निर्देशानुसार गणनाएँ करके परिणाम आउटपुट के रूप में प्रदान करता है। गणना करने के साथ-साथ डिजीटल कम्प्यूटर तार्किक क्रियाएँ भी करता है। ये कम्प्यूटर बहुउद्देशीय होने के कारण विविध कार्यों में प्रयुक्त होते हैं। 

डिजीटल कम्प्यूटर के संकेत (Signal) असतत (Discontinuous) होते हैं।


3 . हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer):- 

इन कम्प्यूटरों में एनालॉग एवं डिजीटल दोनों कम्प्यूटरों के गुणों का समावेश होता है। इसलिए ये कम्प्यूटर ताप, गति, प्रवाह आदि संकेतों पर कार्य करते हुए गणना करने एवं तार्किक क्रियाएँ करने का भी कार्य कर सकते हैं। इनका आउटपुट अंकों अथवा मापने की किसी इकाई के रूप में होता है। हाइब्रिड कम्प्यूटर का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में खूब हो रहा है जहाँ यह रोगी के तापमान, धड़कन, रक्तचाप आदि को एनालॉग सिग्नल के रूप में ग्रहण कर और फिर उन्हें डिजीटल सिग्नल में बदलकर परिणाम को अंकों के रूप में प्रदर्शित करता है।

आकार के आधार पर वर्गीकरण  (Classification Based on Size):-

वर्तमान कम्प्यूटरों को उनके आकार के आधार पर प्रायः चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:-

1 . माइक्रोकम्प्यूटर (Micro-Computer):- 

ये आकार में छोटे एवं कम कीमत के होते हैं। घरों, कार्यालयों, विद्यालयों आदि में लगे कम्प्यूटर प्रायः माइक्रो कम्प्यूटर ही होते हैं। इनमें एक ही सी.पी.यू. होता है। इन कम्प्यूटरों की संग्रहण क्षमता (मैमोरी) तथा कार्य करने की गति अपेक्षाकृत कम होती है। इन पर एक समय में एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता है। अतः इन्हें पर्सनल कम्प्यूटर  (Personal Computer) या P.C. भी कहते हैं। 

पीसी भी कई प्रकार के होते हैं-

अ. डेस्कटॉप कम्प्यूटर (Desktop Computer): 

डेस्क कम्प्यूटर वे होते हैं जिनको टेबिल पर रख कर कार्य किया जाता है ये साईज में थोड़े बड़े होते है। इसमें सीपीयू, मॉनीटर, की-बोर्ड, माउस आदि होते हैं।


ब. लैपटॉप कम्प्यूटर (Laptop Computer): 

ये ब्रीफकेस के समान होते हैं। यह साइज में छोटे होते हैं। इनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जा सकते है। इसे व्यक्ति अपनी गोद में रखकर कार्य कर सकता है। इसमें सीपीयू, मॉनीटर, की-बोर्ड, माउस एक ही में सम्मिलित होते हैं। इसमें पावर के लिए बैटरी का उपयोग होता है।

 

स. पामटॉप कम्प्यूटर (Palmtop Computer): 

यह लैपटॉप कम्प्यूटर से साईज में छोटे होते हैं। जिनको हथेली पर रख कर चलाया जाता है। ये साईज में छोटे और वजन में हल्के होते है। इसमें पॉवर के लिए बैटरी का प्रयोग होता है। इसकी कार्य क्षमता लेपटॉप से थोड़ी कम होती है। 


द. नोटबुक कम्प्यूटर (Note Book Computer): 

नोट बुक कम्प्यूटर लेपटॉप कम्प्यूटर के समान ही होते है। जिसको गोदी में रखकर चलाया जाता है। इन कम्प्यूटर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जा सकते है। इसमें सीपीयू, की-बोर्ड, माउस एकसाथ होते हैं। इनकी कार्य करने की क्षमता लैपटॉप से कम होती है।

य. टेबलेट कम्प्यूटर (Tablet Computer): 

ये मोबाईल से थोड़े बड़े होते है तथा इनको अंगुलियों द्वारा चलाया जाता है।


2. मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer):- 

ये मध्यम आकार के सामान्यः उद्देश्य वाले कम्प्यूटर होते हैं। ये माइक्रोकम्प्यूटर की तुलना में अधिक कार्यशील, शक्तिशाली एवं अधिक कीमत वाले होते हैं। इनकी संग्रहण क्षमता (मैमोरी) एवं कार्य करने की गति अपेक्षाकृत अधिक होती है। इनमें एक से अधिक सी.पी.यू. होते हैं। इन पर एक समय में एक से अधिक व्यक्ति कार्य कर सकते हैं। इनका उपयोग प्रायः बड़े कार्यालयों, बैंक आदि में किया जाता है। 


3 . मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Main Frame Computer):- 

ये आकार में बहुत बड़े होते हैं। इनकी संग्रहण क्षमता (मैमोरी) एवं कार्य करने की गति बहुत अधिक होती है। इन कम्प्यूटरों पर एक समय में कई व्यक्ति कार्य कर सकते हैं। ये अधिक महंगे होते है। इनका उपयोग प्रायः रेलवे आरक्षण, बीमा कम्पनियों, अनुसंधान संस्थाओं व बड़े व्यावसायिक संगठनों में किया जाता है। IBM 4300, IBM 4381, VAX 8842 आदि मेनफ्रेम कम्प्यूटरों के कुछ उदाहरण हैं।


4. सुपर कम्प्यूटर (Super Computer):- 

ये आकार में सबसे बड़े कम्प्यूटर होते हैं। इनकी संग्रहण क्षमता (मैमोरी) एवं कार्य करने की गति सर्वाधिक होती है। अधिक जटिल एवं उच्च कोटि की शुद्धता वाली गणनाएं सुपर कम्प्यूटर से ही सम्भव है। ये कम्प्यूटर सबसे मंहगे हैं।इनकी कीमत अरबों रूपयों में होती है। इन पर भी अनेक व्यक्ति एक साथ कार्य कर सकते हैं। इनका उपयोग मुख्यतः वैज्ञानिक अनुसंधान संगठनों, मौसम की भविष्यवाणी करने, अन्तरिक्ष अनुसंधान प्रयोगशालाओं, रक्षा संगठनों, नाभिकीय संयंत्रों के नियन्त्रण, आनुवांशिकी अभियान्त्रिकी आदि में किया जाता है। परम  (PARAM), CRAY, NEC, CDC आदि सुपर कम्प्यूटरों के उदाहरण है।

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