चंदेल मंदिर स्थापत्य कला की विशेषताओं का वर्णन कीजिए?

Chandel Mandir Sthapaty

उत्तर— चन्देल राजाओं का शासन काल मंदिर स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध था। इस काल के मंदिर कला के उदाहरण आज भी खजुराहो (छतरपुर मध्य प्रदेश) में ​विद्यमान है। चंदेल शासकों ने यहां पर 950-1150 ई. के बीच अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया जो वैष्णव, शैव एवं जैन धर्मों से संबंधित है।
खजुराहो में चंदेल शासकों ने कुल 85 मंदिरों का निर्माण करवाया था परंतु इस समय मंदिर किसी प्रांगण में नहीं हैं। यहां के मंदिर किसी प्रांगण में नहीं है। अपितु खुले स्थानों पर निर्मित है। उच्च अधिष्ठानों पर स्थित ये मंदिर 'नागर शैली' की समस्त विशेषताओं से युक्त है। इन मंदिरों को 'सांधार' कहा जाता है। सांधार उन मंदिरों को कहा जाता है, जिनमें प्रदक्षिणापथ अधिष्ठान होते हैं। इन मंदिरों का निर्माण मुख्यत: ग्रेनाइट एवं लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। यहां के अनेक प्रमुख मंदिरों में कंदरिया म​हादेव मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर तथा चतुर्भुज मंदिर उल्लेखनीय है।
खजुराहो मंदिर की अपनी कुछ विशेषताएं है जो निम्नलिखित हैं—
1. इन मंदिरों का निर्माण खुले स्थान पर हुआ है। इनके चारों ओर कोई प्रांगण नहीं मिलता।
2. प्रत्येक मंदिर एक ऊंचे अधिष्ठान पर बनाया गया है।
3. भव्य शिखरों का निर्माण तथा चारों ओर जालीदार गवाक्षों का निर्माण।
4. शिखर के ऊपर गोल आमलक, कलश तथा स्तूपिका का निर्माण किया गया है।
5. मंदिर के भीतरी भाग से प्रवेश द्वार, मंडप, अर्द्ध-मण्डप, अंतराल, गर्भगृह इत्यादि सारे अंगों का निर्माण किया गया है।
6. मंदिरों पर मूर्तिकला के माध्यम से सजावट की गई है।
7. मंदिरों के प्रवेश द्वार को सजाया गया है, जिसे 'मकरतोरण' कहते हैं।
8. कुछ मंदिर पंचायतन शैली में भी बनते हैं।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि चंदेल शासकों का मंदिर कला कके क्षेत्र में प्रशंसनीय योगदान है। इस काल के मंदिर नागर कला की समस्त विशेषताओं से युक्त हैं। देवी-देवताओं के अतिरिक्त अनेक अप्सराओं, नायिकाओं तथा सामान्य नारियों की मूर्तियां भी खजराहो से प्राप्त होती है। कुछ मूर्तियां अत्यन्त अश्लील हो गयी हैं जो धर्म पर तांत्रिक विचारधारा के प्रभाव को व्यक्त करती है। खजुराहो कला चंदेल शासकों की अमर कीर्ति का प्रतीक है।

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