- अलनीनो एक अजीबो-गरीब समुद्री तथा जलवायुविक घटना है जो कुछ अंतराल पर दक्षिण प्रशांत महासागर में पेरू तट पर प्रकट होता है। यह सामान्यतः क्रिसमस के आसपास गर्म समुद्री जलधारा के रूप में प्रकट होता है। खास बात यह है कि यह क्षेत्र अटाकामा के ठण्डी समुद्री जलधारा का क्षेत्र है, जहां यह धारा दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती है, जबकि अलनीनो धारा गर्म होती है और इसकी प्रवाह दिशा उल्टी अर्थात् उत्तर से दक्षिण की ओर होती है। अलनीनो वर्ष में दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी भाग, दक्षिणी प्रशांत महासागर और ऑस्ट्रेलिया में कई असामान्य जलवायविक घटनाएं देखी जाती हैं।
- जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि एलनिनों का प्रभाव भारत के दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पर भी पड़ता है। ऐसा देखा गया है कि अलनीनो वर्ष में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे देश में कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका बढ़ जाती है। पिछले दस वर्षों से वैज्ञानिक अलनीनो के प्रभाव को निश्चित रूप से जानने के लिए लंबी अवधि की परियोजनाएं चला रहे थे, जिसका कार्यकाल दिसम्बर 1995 में समाप्त हुआ। इनके निष्कर्षों के अनुसार अलनीनो वर्ष में मौसम क्रम में अचानक और अजीबो-गरीब परिवर्तन आ सकते हैं। मौसम सामान्य से काफी गरम हो सकता है, पानी की जबरदस्त कमी हो सकती है या फिर जबर्दस्त बारिश व तूफान से तबाही मच सकती है।
कहानी के तत्त्व कौन-कौन से हैं
कहानी के मूलतः छः तत्व हैं। ये हैं- विषयवस्तु अथवा कथानक, चरित्र, संवाद, भाषा शैली, वातावरण और उद्देश्य। कथानक (विषयवस्तु)- प्रत्येक कहानी में कोई न कोई घटनाक्रम अवश्य होता है। कहानी में वर्णित घटनाओं के समूह को कथानक कहते हैं। कथानक किसी भी कहानी की आत्मा है। इसलिए कथानक की योजना इस प्रकार होनी चाहिए कि सभी घटनाएं और प्रसंग परस्पर सम्बद्ध हों। उनमें बिखराव या परस्पर विरोध नहीं हो। मौलिकता, रोचकता, सुसंगठन, जिज्ञासा, कुतूहल की सृष्टि अच्छे कथानक के गुण हैं। साधारण से साधारण कथानक को भी कहानीकार कल्पना एवं मर्मस्पर्शी अनुभूतियों से सजाकर एक वैचित्र्य और आकर्षण प्रदान कर सकता है। चरित्र (पात्र)- प्रत्येक कहानी में कुछ पात्र होते हैं जो कथानक के सजीव संचालक होते हैं। इनमें एक ओर कथानक का आरम्भ, विकास और अन्त होता है तो दूसरी ओर हम कहानी में इनसे आत्मीयता प्राप्त करते हैं। कहानी में मुख्य रूप से दो प्रकार के पात्र होते हैं, पहला वर्गगत अर्थात् जो अपने वर्ग की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, दूसरे व्यक्तिगत वे पात्र जिनकी निजी विशेषताएँ होती हैं। कहानी में पात्रों की संख्य...

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