तुगलक वंश का संस्थापक कौन था


गयासुद्दीन तुगलक (1320-1325 ई.)

  • अलाउद्दीन के सेनापतियों में गयासुद्दीन तुगलक या गाजी मलिक तुगलक वंश का प्रथम शासक था।
  • गयासुद्दीन तुगलक दिल्ली का प्रथम सुल्तान था, जिसने 'गाजी' की उपाधि धारण की।
  • गयासुद्दीन तुगलक ने खूतों और मुकद्दमों के पुराने अधिकारों को बहाल किया था।
  • गयासुद्दीन तुगलक ने दीवान-ए-विजारत को आदेश दिया कि इक्ता की मालगुजारी में एक वर्ष में 1/10 या 1/11 से अधिक वृद्धि न की जाए।
  • सिंचाई हेतु नहर निर्माण कराने वाला गयासुद्दीन पहला शासक था।
  • इसने अमीरों को पद देने में वंशानुगतता के साथ-साथ योग्यता को भी आधार बनाया गया।
  • निजामुद्दीन औलिया ने गयासुद्दीन तुगलक के बारे में कहा था कि 'हनुज दिल्ली दूरस्त' (हुजूर दिल्ली अभी दूर है)। गयासुद्दीन के औलिया से संबंध कटुतापूर्ण थे।

मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351 ई.) 

  • मार्च, 1325 में उलूग खां (जूना खां) मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से सुल्तान बना।
  • मध्य युग के शासकों में चरित्र और कार्यों की दृष्टि से अन्य कोई शासक इतना विवादास्पद नहीं रहा, जितना मुहम्मद बिन तुगलक
  • दिल्ली सल्तनत के सभी सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुगलक सर्वाधिक विद्वान एवं शिक्षित शासक था। वह खगोलशास्त्र, गणित एवं आयुर्विज्ञान सहित अनेक विधाओं का ज्ञाता था।
  • उसका विश्वास था कि सुल्तान बनना ईश्वर की इच्छा है।
  • उसने अपने सिक्कों पर 'अल सुल्तान जिल्ली आलाह' (सुल्तान ईश्वर की छाया) खुदवाया था।
  • मुहम्मद बिन तुगलक का विश्वास संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न सुल्तान में था।
  • अलाउद्दीन की भांति मुहम्मद तुगलक भी शासन में किसी भी व्यक्ति अथवा वर्ग के हस्तक्षेप को पसंद नहीं करता था।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि की उन्नति के लिए एक नए विभाग दीवान-ए-आमीर कोही की स्थापना की।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने चांदी के सिक्के के स्थान पर तांबे (कांसे) का सिक्का सांकेतिक मुद्रा के रूप में प्रचलित किया।
  • मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा जारी स्वर्ण सिक्कों को इब्नबतूता द्वारा 'दीनार' की संज्ञा दी गई थी।
  • मोरक्कन (मोरक्को) यात्री इब्नबतूता सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के काल में सितंबर, 1333 में दिल्ली आया था।
  • सुल्तान ने इसे दिल्ली का प्रमुख काजी नियुक्त किया।
  • इब्नबतूता ने अपना यात्रा वृतांत अरबी भाषा में 'किताब उल रेहला' नामक ग्रंथ में लिखा है।
  • दिल्ली के सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुगलक प्रथम सुल्तान था, जो हिंदुओं के त्योहारों मुख्यतया होली में भाग लेता था।
  • बरनी, मुहम्मद बिन तुगलक की पांच प्रमुख योजनाओं का वर्णन करता है- दोआब में कर वृद्धि, देवगिरि को राजधानी बनाना, सांकेतिक मुद्रा जारी करना, खुरासान पर आक्रमण एवं कराचिल अभियान देवगिरि को 'कुबतुल इस्लाम' भी कहा गया है।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने जैन विद्वान जिनप्रभु सूरि एवं राजशेखर का स्वागत किया।
  • 20 मार्च, 1351 को मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हो गई।
  • बदांयूनी ने उसकी मृत्यु पर लिखा है- 'सुल्तान को उसकी प्रजा से और प्रजा को अपने सुल्तान से मुक्ति मिल गई।'

फिरोजशाह तुगलक (1351-1388 ई.)

  • फिरोज ने अपने को खलीफा का नाइब पुकारा और अपने सिक्कों पर खलीफा का नाम अंकित करवाया।
  • मुहम्मद तुगलक के बाद उसका चचेरा भाई फिरोजशाह तुगलक गद्दी पर बैठा।
  • फिरोज तुगलक ने मजहबी उत्साह में ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया।
  • फिरोज तुगलक ने 'दीवान-ए-खैरात' स्थापित किया था, जो गरीब मुसलमानों, अनाथ स्त्रियों एवं विधवाओं को आर्थिक सहायता देता था।
  • फिरोज तुगलक को दासों का बहुत शौक था। उनकी देखभाल के लिए उसने 'दीवान-ए-बंदगान' नामक पृथक विभाग की स्थापना की।
  • सल्तनत काल में सर्वप्रथम फिरोजशाह तुगलक ने ही 'लोक निर्माण विभाग' की स्थापना की।
  • फिरोज तुगलक ने 300 नवीन नगरों का निर्माण करवाया, जिसमें फतेहाबाद, हिसार, फिरोजपुर, जौनपुर एवं फिरोजाबाद प्रमुख हैं।
  • फिरोज तुगलक का शासनकाल भारत में नहरों के सबसे बड़े जाल का निर्माण करने के कारण प्रसिद्ध है।
  • सिंचाई की सुविधा के लिए उसने पांच बड़ी नहरों का निर्माण कराया।
  • फिरोज तुगलक ने 'हक्क-ए-शर्ब' नामक सिंचाई कर लगाया।
  • सिंचाई कर लगाने वाला वह दिल्ली का प्रथम सुल्तान था।
  • फिरोज तुगलक द्वारा अशोक के दो स्तंभों को 'मेरठ एवं टोपरा' (अब अंबाला जिले में) से दिल्ली लाया गया।
  • राज्य के खर्च पर हज की व्यवस्था करने वाला पहला भारतीय शासक फिरोज तुगलक था।
  • फिरोज तुगलक ने 'शशगनी' (6 जीतल का) नामक सिक्का चलाया।
  • फिरोज ने 'अद्धा एवं बिख' नामक तांबा एवं चांदी निर्मित सिक्का चलाया।
  • 1388 ई. में फिरोज की मृत्यु हो गई।


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