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Thursday, January 3, 2019

भारतीय संस्कृति और उसकी विशेषताएं


  • संस्कृति मनुष्य द्वारा सीखे हुए व्यवहारों, आचारों-विचारों की वह समग्रता है, जिसमें किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व पुष्पित होकर मानवेत्तर श्रेणी से उच्च बनता है। वह बौद्धिक तथा भौतिक साधनों का संपूर्ण योग है, जिसके द्वारा मुनष्य अपनी भौतिक एवं सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। जवाहरलाल नेहरू संस्कृति के विषय में लिखते हैं कि ‘ संस्कृति का अर्थ मनुष्य का आन्तरिक विकास और उसकी नैतिक उन्नति है, पारस्परिक सद्व्यवहार और एक-दूसरे को समझने की शक्ति है।
  • संस्कृति से आशय मनुष्य की मानसिक, नैतिक, भौतिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं कलात्मक जीवन की समस्त उपलब्धियों की समग्रता से है। 

भारतीय संस्कृति की निम्नलिखित विशेषताएं हैं:-

  1. भारतीय संस्कृति विश्व की समस्त संस्कृतियों में पुरानी संस्कृति है।
  2. भारतीय संस्कृति में निरंतरता के तत्त्व मौजूद हैं।
  3. भारतीय संस्कृति में धर्म और दर्शन की प्रधानता है। आत्मा और परमात्मा के विषय में भारतीय  विचारकों ने जितना चिन्तन किया है, संभवतः उतना अन्य कहीं नहीं हुआ है। यहां ऐसा विश्वास किया जाता है कि जब-जब धर्म की हानि हुई है तब-तब अधर्म के विनाश के लिए ईश्वर ने अवतार लिया है। भारतीय संस्कृति में देवताओं को भी महत्त्व दिया जाता रहा है। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश को क्रमशः सृष्टि, पालक एवं संहारक के रूप में महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है।
  4. भारतीय संस्कृति में समन्वयवादिता का गुण पाया जाता है। इसमें आध्यात्मिकता एवं भौतिकता का सुन्दर सम्मिश्रण मौजूद है।
  5. भारतीय संस्कृति में नैतिकता एवं सदाचार का महत्त्व विशिष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
  6. भारतीय संस्कृति में स्त्रियों को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। यहां प्राचीन काल से ही नारी के जीवन की सार्थकता को स्वीकार किया गया है।
  7. भारतीय संस्कृति में विविधता दिखाने वाले काफी तत्त्व विद्यमान हैं, जैसे - भौगोलिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा भाषायी एवं धार्मिक विविधता।


  • उपर्युक्त विशेषतओं के बावजूद कतिपय ऐसी विशिष्टताएं विद्यमान हैं, जिनसे भारतीय अनेकता में एकता का भाव प्रसारित कर भारतीयता को जीवित रखे हुए हैं। इसलिए अनेक विद्वानों ने स्वीकार किया है कि भारत में विविधता में एकता निहित है। 
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इस संबंध में ठीक ही कहा है कि ‘यदि कोई विदेशी इसे एक देश नहीं वरन् छोटे-छोटे देशों का समूह समझे तो इसमें आश्चर्य ही क्या है?’ 
  • कोई भी व्यक्ति जो इन वक्तव्यों की गहराई में नहीं जाता, उसे ऊपर से ये विविधताएं ही दृष्टिगोचर होंगी, पर अगर बारीकी से देखा जाये तो सहज ही ज्ञात होगा कि इन सभ्सी अनेक तथ्यों में एकता है। एक ऐसी एकता, जो इन्हें एक सूत्र में बांधती है। 
  • ठीक उसी प्रकार जैसे एक रेशम के धागे में पिरोये गये अलग-अलग प्रकार के जवाहरातों से मिलकर एक हार बनता है, उसमें हम किसी नगीने को हटा नहीं सकते। इन सभी नगों का अपना अलग-अलग सौन्दर्य एवं महत्त्व होता है, पर साथ ही एक-दूसरे की सुंदरता बढ़ाते हैं। यह कोई काव्य कल्पना नहीं, बल्कि माना हुआ सत्य है। अनेक धाराएं हैं, जो हजारों वर्षों से अपना स्वतंत्र अस्तित्व रखती आयी हैं। 
  • उन सबके मिलन से भारतीय सभ्यता रूपी नदी की उत्पत्ति हुई है, जो इस महाद्वीप के एक छोर से दूसरे छोर तक बहती है। वस्तुतः कहा जा सकता है कि भारत की विविधता में एकता निहित है।



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