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Wednesday, December 19, 2018

नालन्दा विश्वविद्यालय किसलिए विश्व प्रसिद्ध था?


ह्वेनसांग की भारत में यात्रा के समय सूती कपड़ों के उत्पादन के लिए सबसे प्रसिद्ध नगर था?
अ. वाराणसी              ब. मथुरा   
स. पाटलिपुत्र             द. कांची

उत्तर - अ
  • चीनी यात्री ह्वेनसांग ने हर्ष के शासनकाल में भारत की यात्रा की। इसने अपनी यात्रा 29 वर्ष की अवस्था में प्रारम्भ की। यात्रा के दौरान ताशकन्द, समरकन्द होता हुआ यह चन्द्र की भूमि (भारत) के गांधार प्रदेश पहुंचा। 
  • कन्नौज के राजा हर्ष के निमंत्रण पर वह करीब 8 वर्ष वहां रहने के बाद करीब 643 ई. में स्वदेश वापस लौट गया।
  • उसने उस समय रेशम एवं सूत से निर्मित ‘कौशेय’ नामक वस्त्र का जिक्र किया है, जिसका केन्द्र वाराणसी था। इसके अतिरिक्त क्षौम, लिनन, कम्बल जैसे वस्त्रों का भी उल्लेख किया।
जैनधर्म के प्रवर्तक महावीर स्वामी का जन्म स्थान कहां था?
- कुण्डलग्राम
जन्म: 540 ई.पू.
निर्वाण: 468 ई.पू. स्थान: पावापुरी में

नालन्दा विश्वविद्यालय किसलिए विश्व प्रसिद्ध था?
- बौद्ध धर्म दर्शन
  • प्राचीन भारतीय शिक्षा को केन्द्र
  • दक्षिणी बिहार में राजगीर के पास
  • सर्वप्रथम एक बौद्ध विहार की स्थापना गुप्त काल में करवायी गयी।
  • चीनी यात्री ह्वेनसांग लिखता है कि इसका संस्थापक शक्रादित्य था, जिसने बौद्ध धर्म के त्रिरत्नों के प्रति महती श्रद्धा के कारण इसकी स्थापना करवायी थी।
  • शक्रादित्य की पहचान कुमार गुप्त प्रथम से की जाती है जिसकी सुप्रसिद्ध उपाधि महेन्द्रादित्य थी।
  • पांचवीं सदी से छठी सदी आते-आते यह विश्वविद्यालय ने केवल भारत अपितु विश्व में भी प्रतिष्ठित हो गया।
  • गुप्त शासक कुमार गुप्त ने इस बौद्ध संघ को पहला दान दिया था।
  • विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावासों की व्यवस्था थी।
  • शैलेन्द्र शासक बालपुत्र देव ने मगध नरेश देवपाल की अनुमति से नालन्दा में जावा के भिक्षुओं के निवास के लिए एक विहार का निर्माण करवाया था।
  • यहां पर हर विषय की शिक्षा दी जाती थी पर बौद्ध धर्म की महायान शाखा का अध्ययन-अध्यापन विशेष रूप से होता था।
  • हर्ष के बाद 12वीं सदी तक इसकी ख्याति बनी रही। 11वीं शताब्दी में पाल शासकों ने नालन्दा के स्थान पर विक्रमशिला को राजकीय संरक्षण देना प्रारम्भ कर दिया, जिससे नालन्दा का महत्त्व घटने लगा।
  • इस समय तक नालन्दा पर तंत्रायन का प्रभाव बढ़ने लगा।
  • 12वीं शताब्दी में मुस्लिम आक्रांता बख्तियार खिलीज ने इस विश्वविद्यालय को ध्वस्त कर दिया। यहां के भिक्षुओं की हत्या कर दी गयी और पुस्तकालय जला दिये गये इस प्रकार इस ख्याति प्राप्त शिक्षा केन्द्र का दुखद अन्त हुआ।

‘स्वप्नवासवदत्ता’ के लेखक हैं?

अ. कालिदास                ब. भास
स. भवभूति                   द. राजशेखर

उत्तर - ब
  • सबसे पहले सम्पूर्ण नाटक रचने का श्रेय भास को है।
  • स्वप्नवासवदत्ता भास की प्रमुख रचनाओं में से एक है।
  • यह रचना राजा उदयन एवं वासवदत्ता की कथा पर आधरित है।
  • भास कालिदास के पूर्ववर्ती थे। गणपति शास्त्री ने भास के 13 नाटकों को खोज निकाला है।
  • अभिषेक, प्रतिज्ञायौगन्धरायण तथा उरुभंग भी इनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं।
  • कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मेघदूत, कुमार संभव तथा रघुवंश की रचना की जबकि भवभूति ने मालती माधव, उत्तर रामचरित की रचना की।
  • राजशेखर के प्रमुख ग्रन्थों में बाल रामायण, कर्पूरमंजरी, काव्य मीमांसा आदि है।

किस काल में अछूत की अवधारणा स्पष्ट रूप से उद्धृत हुईं?

- उत्तर वैदिक काल में
  • उत्तर वैदिक काल तक समाज स्पष्ट रूप से चार वर्णों में विभाजित हो चुका था।
  • इस काल में वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित न रहकर जाति पर आधारित हो गयी।
  • उत्तर वैदिक काल में यज्ञोपवीत संस्कार का अधिकार शूद्रों को नहीं था।
  • तैत्तिरीय ब्राह्मण के उल्लेख के आधार पर ब्राह्मण सूत का, क्षत्रिय सन का और वैश्य ऊन का यज्ञोपवीत धारण करता था।
  • ब्राह्मणें का उपनयन संस्कार बसन्त ऋतु, क्षत्रियों का ग्रीष्म ऋतु, वैश्यों का शीत ऋतु में होने का विवरण मिलता है।
  • ऐतरेय ब्राह्मण में सर्वप्रथम चारों वर्णें के कर्मों के विषय में विवरण मिलता है।
  • संगम काल में उरैयूर सूती वस्त्र एवं कपास के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। उरैयूर नामक स्थान की चर्चा ‘पेरिप्लस ऑफ द इरीथियन सी’ में भी हुई है।
  • इल्तुतमिश पहला तुर्क सुल्तान था जिसने शुद्ध अरबी सिक्के चलवाये। इसने सल्तनकालीन दो महत्त्वपूर्ण सिक्के चांदी का टंका (लगभग 175 ग्रेन) तथा तांबे का जीतल चलवाय।
  • 1229 ई. में बगदाद के खलीफा से इल्तुतमिश को सम्मान में खिलअत का प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद इल्तुतमिश वैध सुल्तान एवं दिल्ली सल्तनत एक वैध स्वतंत्र राज्य बन गया।
  • इल्तुतमिश ने इक्ता व्यवस्था का प्रचलन किया।
  • राजधानी को लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित किया।
  • स्थापत्य कला के अंतर्गत इल्तुतमिश ने कुतुबमीनार के निर्माण कार्य को पूरा करवाया।
  • भारत में पहला मकबरा निर्मित करवाने का श्रेय भी इल्तुतमिश को दिया जाता है।

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