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Tuesday, November 20, 2018

बिस्मार्क

  • जन्म 1 अप्रेल, 1815 ई.
  • ब्रेडानबर्ग के एक कुलीन परिवार में हुआ।
  • शिक्षा गोर्तिजान एवं बर्लिन विश्वविद्यालय में पूर्ण हुई।
  • प्रशा की सिविल सेवा में नौकरी की, कुछ वर्ष बाद नौकरी छोडकर पौमेरेनिया में अपनी जागीर की देखभाल करने लगा।
  • उसका संबंध बर्लिन की अनुदारवादी विचारधारा की संस्था ट्रीगलाफ (Trieglaff) से हुआ।
  • 1847 ई. में वह प्रशा के सम्राट द्वारा बुलाई गई संयुक्त प्रशियन डायट ‘संसद’ का सदस्य निर्वाचित हुआ। 1851 ई. में वह फ्रैंकफर्ट की संसद में प्रशा का सदस्य बनाकर भेजा गया। इस संसद में उसने कई वर्षों तक प्रशा का प्रतिनिधित्व किया।
  • सम्राट विलियम आस्ट्रिया को रूष्ट नही करना चाहता था अतः उसने बिस्मार्क को फ्रैंकफर्ट संसद में वापस बुला लिया तथा उसकी नियुक्ति रूस में राजदूत के रूप में की। बिस्मार्क ने रूस के जार अलेक्जैण्डर द्वितीय से मित्रता की।
  • क्रीमिया के युद्ध के समय प्रशा में रूस के विरूद्ध युद्ध घोषित करने की मांग की गई लेकिन प्रशा इस मामले में तटस्थ रहा और प्रशा के इस कदम से रूस के जार अलेक्जैण्डर द्वितीय और बिस्मार्क की मित्रता में ओर प्रगाढता आई।
  • 1859-62 ई. तक बिस्मार्क रूस में राजदूत रहा।
  • मार्च 1862 ई. में बिस्मार्क को फ्रांस का राजदूत बनाकर भेजा गया। फ्रांस में बिस्मार्क को नेपोलियन तृतीय एवं उसके मंत्रियों से मिलने एवं उनकी नीतियों को समझने का अवसर मिला।
  • प्रशा में संकट के चलते सम्राट ने बिस्मार्क को प्रशा बुला लिया तथा सितंबर 1862 ई. में अपना चांसलर नियुक्त किया।

बिस्मार्क की रक्त और लोहे की नीतिः


  • बिस्मार्क प्रशा के नेतृत्व में सैन्य शक्ति के आधार पर जर्मनी का एकीकरण करना चाहता था। पूर्व में बजट सम्बन्धी विषय को लेकर सम्राट विलियम और संसद के बीच तनाव उत्पन्न हुआ था।
  • बिस्मार्क ने राष्ट्रहित में निम्न सदन की अवहेलना कर उच्च सदन से बजट पास करवाने का असंवैधानिक निर्णय लिया।
  • 1862- 66 ई. तक वह उच्च सदन से बजट पास करवाता रहा।
  • बिस्मार्क ने दृढ निश्चय के बल पर प्रशा की सेना का पुनर्गठन कर इस यूरोप की सर्वश्रेष्ठ सेना बना दिया।

बिस्मार्क की विदेश नीतिः


  • सैन्य संगठन के पश्चात् बिस्मार्क ने यूरोप में आस्टिृया को मित्रविहीन करने तथा प्रशा के लिए शक्तिशाली मित्रों की तलाश प्रारम्भ की। इस हेतु निम्न प्रयास किएः

बिस्मार्क ने जर्मनी का एकीकरण निम्न चरणों में पूर्ण कियाः

  • डेनमार्क से युद्ध- 1864 ई.
  • आस्ट्रिया से युद्ध- 1866 ई.
  • फ्रांस से युद्ध- 1870 ई.

डेनमार्क से युद्धः

  • जर्मनी और डेनमार्क के बीच स्थित श्लेसविग और होलेस्टाइन डचियां दोनों के बीच युद्ध का कारण बनी।
  • होलेस्टाइन में जर्मन रहते थे तथा वह जर्मन संघ का सदस्य था, लेकिन श्लेसविग में जर्मन तथा डेन दोनों साथ रहते थे।

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