Thursday, January 4, 2018

मल्लीनाथ जी MalliNath ji

मल्लीनाथ जी

मारवाड़ के राठौड़ रावल सलखा के यहां मल्लीनाथ जी का जन्म सन् 1358 ई. (वि.स. 1415) में हुआ था। माता का नाम जाणीदे था। परोपकारी एवं करुणाशील सिद्ध पुरुष होने के कारण उनके प्रति लोगों के मन में अटूट प्रेम और श्रद्धार थी। मालानी क्षेत्र के सिद्ध पुरुष मल्लीनाथ बचपन से ही वीर, कुशाग्रबुद्धि और अजेय योद्धा थे। इनकी रानी का नाम रूपादे था। इनके बाद मल्लीनाथ जी यहां के शासक बने। 

उन्होंने खिराज नहीं दिया जिसके कारण सन् 1378 ई. में मालवा के सूबेदार निजामुद्दीन फिरोजशाह तुगलक की सेना की तेरह टुकड़ियों ने मल्लीनाथ जी पर हमला कर दिया। परन्तु मल्लीनाथ जी ने इनको पराजित कर अपनी प्रतिष्ठा को बढ़ाया।

राव मल्लीनाथ जी शाक्तमत के कूंडापंथ शाखा के उपासक थे।
मल्लीनाथ जी ने संत उगमसी भाटी को अपना गुरु स्वीकार किया और उनसे दीक्षा प्राप्त कर लिया।

मल्लीनाथ जी निर्गुण निराकार ईश्वर में विश्वास करते थे तथा उन्होंने नाम स्मरण का पुरजोर समर्थन किया।

इनके नाम पर ही जोधपुर के पश्चिम के भाग का नाम मालानी पड़ा जिसे आजकल बाड़मेर कहा जाता है। सन् 1399 ई. (वि.सं. 1456) में चैत्र शुक्ला द्वितीया को 68 वर्ष की आयु में उनका स्वर्गवास हो गया।


बाड़मेर के तिलवाड़ा गांव में प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी (मार्च-अप्रैल) तक विशाल पशु मेले का आयोजन किया जाता है, जहां पर उनका प्रमुख मंदिर है। 

इस मेले में गाय, ऊंट, बकरी और घोड़ों की बिक्री के लिए लाया जाता है। इस मेले में राजस्थान मूल के अलावा गुजरात और मध्यप्रदेश से भी लोग मेले में बड़े उत्साह के साथ भाग लेते हैं। इनकी रानी रुपादे का मंदिर भी तिलवाड़ा से कुछ दूरी पर मालाजाल गांव में स्थित है।


सर्वाधिक राज्य स्तरीय पशु मेले किस ज़िले में आयोजित किये जाते हैं - नागौर में

पुष्कर पशु मेला नवंबर माह में कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
तेजाजी पशु मेला कब भरता है- श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक

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