राजस्थान की जलवायु Rajasthan Ki Jalvayu

किसी बड़े क्षेत्र में दीर्घावधि की औसत मौसमी दशाओं को जलवायु कहते हैं। भारत में इसका निर्माण 35-50 वर्ष क आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।

राजस्थान का सर्वाधिक उष्ण व सर्वाधिक शीत जिला चूरू है।
राजस्थान का सर्वाधिक उष्ण स्थान फलौदी (जोधपुर) है।
राजस्थान का सर्वाधिक शीत स्थान माउण्ट आबू , सिरोही में है।
राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा (आर्द्रता) वाला स्थान माउण्ट आबू है।
राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ है।
राजस्थान का सबसे कम वर्षा वाला जिला जैसलमेर है।
राजस्थान में सर्वाधिक विषमता (वर्षा की) बाड़मेर व न्यूनतम डूंगरपुर है।
राजस्थान में सर्वाधिक वार्षिक तापान्तर चूरू में पाया जाता है।
राजस्थान में न्यूनतम वार्षिक तापान्तर डूंगरपुर में जबकि सर्वाधिक दैनिक तापान्तर जैसलमेर का व न्यूनतम दैनिक तापान्तर बांसवाड़ा का है।
वार्षिक मौसमी दशाओं के आधार पर राजस्थान की जलवायु को तीन ऋतुओं के अंतर्गत पर राजस्थान की जलवायु को तीन ऋतुओं के अंतर्गत रखा जा सकता है।
ग्रीष्म ऋतु - मार्च से जून तक रहती है तथा सामान्य रूप से तापमान जून माह में 40-50 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।
वर्षा ऋतु - राजस्थान में जून से सितम्बर तक का समय वर्षा ऋतु का होता है। इसे दक्षिण-पश्चिमी मानसून का काल भी कहते है।

जलवायु की प्रमुख विशेषताएं -

राज्य में अधिकांश आंधियां गंगानगर में आती है।
अरब सागरीय मानसूनी हवाओं से राज्य के दक्षिण जिलों में पर्याप्त वर्षा होती है।
भूमध्यसागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभों के द्वारा राज्य में कहीं-कहीं वर्षा हो जाती है। शीत ऋतु में होने वाली इस वर्षा को मावट कहते हैं।
राजस्थान में सर्दियों की वर्षा को ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ कहते हैं। 

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