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Tuesday, August 8, 2017

अतिचालकता ( सुपरकंडक्टर)

अतिचालकता क्या है? इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालिए?
  • ऐसे पदार्थ जिनमें विशेष परिस्थिति में विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है तथा वे विद्युत के पूर्ण चालक बन जाते हैं अर्थात् उनमें यदि विद्युत धारा प्रवाहित की जाये तो बिना किसी ऊर्जाक्षय के निरंतर प्रवाहित होती रहेगी, वे अतिचालक या सुपरकंडक्टर कहलाते हैं तथा उनका यह विशेष गुण अतिचालकता कहलाता है। अतिचालकता के प्रयोग से विद्युत धारा के विरुद्ध शून्य प्रतिरोध के द्वारा ऊर्जा की 25-50 प्रतिशत तक होने वाली हानि को रोका जा सकता है। अतिचालकता की खोज नीदरलैंड के कैमरालिंघ ओंस ने की थी।
  • अतिचालकता की उपयोगिता निम्नलिखित प्रकार है-
  • अतिचालक पदार्थो से अतिशक्तिशाली विद्युत चुंबकों का निर्माण किया जाता है, जिनमें बहुत कम ऊर्जा की क्षति होती है, जिनका प्रयोग विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक अनुसंधानों विशेषकर नाभिकीय संलयन के क्षेत्र तथा औद्योगिक परिवेश में भी होता है।
  • अतिचालकीय क्वांटम इंटरफरेंस डिवाइस (स्क्विड) का निर्माण अतिचालक पदार्थों से बने ‘जोसेफासन जंक्सन’ पर आधारित है। स्क्विड का सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान तथा रोगों की पहचान के लिए किया जा रहा है। इसका विशेष महत्त्व मानव मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के अध्ययन में है।
  • खनिज भंडारों का पता चगाने में भी इसका उपयोग किया जाता है।
  • अतिचालक विद्युत चुम्बकीय वलयों का उपयोग कर किसी भी वस्तु को पृथ्वी पर अथवा पृथ्वी से आकाश में प्रेषित किया जा सकता है।
  • मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मशीन में अतिसंचालक इलेक्ट्रोमैग्नेट का उपयोग होता है। इसके सहयोग से शरीर के किसी भी आंतरिक अंग का विस्तृत चित्र प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • इसके उपयोग से सुपर कम्प्यूटरें का आकार छोटा किया जा सकता है तथा उसकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही, उसमें उत्पन्न होने वाले तापीय ऊर्जा की मात्रा बहुत कम की जा सकती है।
  • मैग्नेटिकली लेमिनेटेड ट्रेन्स परिवहन प्रणाली में पहियों का प्रयोग न कर अतिचालकता पर आधारित शक्तिशाली चुम्बकों के सहयोग से किसी वाहन (रेलगाड़ी) को पृथ्वी की सतह से थोड़ा ऊपर (लगभग 4 इंच ऊपर) लटका दिया जाता है, ताकि घर्षण से अप्रभावित गाड़ी की गति में वृद्धि की जा सके। वर्तमान में जापान एवं जर्मनी में इस तकनीक के द्वारा 350 किमी/घंटा की गति से रेलगाडियां चलाई जा रही है।
  • विद्युत शक्ति प्रेषण के लिए अतिचालक पदार्थों से बने तार का उपयोग करके इस प्रक्रिया में होने वाली ऊर्जा क्षति को लगभग समाप्त किया जा सकता है।

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