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Sunday, May 14, 2017

असहयोग आंदोलन

असहयोग आंदोलन को कांग्रेस की मंजूरीः
सितंबर में कलकत्ता में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के विरोध के बावजूद असहयोग आंदोलन को कांग्रेस ने मंजूरी दे दी, इसे अपना आंदोलन मान लिया।
- विरोधियों में प्रमुख सी आर दास थे, उनका विरोध विधान परिषदों के बहिष्कार को लेकर था।
- दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ। इस समय तक कांग्रेस में अंदरूनी विरोध लगभग समाप्त हो चुका था। विधान परिषदों के चुनाव हो चुके थे, इसलिए इसके बहिष्कार का विवादास्पद मुद्दा भी खत्म हो गया था।
- सी आर दास ने ही इस सम्मेलन में असहयोग आंदोलन से संबद्ध प्रस्ताव रखा। इस अधिवेशन के अध्यक्ष सी विजयराघवाचारी थे।
- असहयोग आंदोलन कार्यक्रम के तहत तमाम चीजें आती थी, जैसेः
1ः उपाधियों और प्रषस्तिपत्रों को लौटाना,
2ः सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, अदालतों, विदेषी कपडो का बहिष्कार,
3ः राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना और स्थानीय विवादों के निबटारे के लिए पंचायतों के गठन का भी प्रस्ताव था।
4ः हाथ से कताई-बुनाई को प्रोत्साहन देने तथा हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देने की बात कही गई।
5ः छुआछूत को मिटाने और हर हाल में अहिंसा का पालन करने का सख्त निर्देश था।
6ः पहले उद्देश्य था संवैधानिक और वैधानिक तरीको से स्वशासन की प्राप्ति, अब उद्देश्य था अहिंसक और उचित तरीकों से स्वराज की प्राप्ति।
- कांग्रेस के रोजमर्रा के काम देखने के लिए 15 सदस्यीय कार्यकारिणी गठित की गई। तिलक ने 1916 में ही इसका प्रस्ताव रखा था। स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस समितियों का गठन किया गया।
- उनका गठन भाषाई आधार पर किया गया।
- गांवों और कस्बों में भी कांग्रेस समितियां गठित की गई। सदस्यता फीस चार आना साल कर दी गई।
- जनवरी 1921 से पूरे देश में आंदोलन की लोकप्रियता बढने लगी। गांधीजी ने खिलाफत नेता अली भाइयों के साथ पूरे देश का दौरा किया।
- हिंदी को ही बतौर संपर्क भाषा इस्तेमाल किया। शीक्षा का बहिष्कार पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक सफल रहा। कलकत्ता के विद्यार्थियों ने राज्यव्यापी हड़ताल की। सीआर दास ने इस आंदोलन को बहुत प्रोत्साहित किया और सुभाष चंद्र बोस 'नेशनल कॉलेज' कलकता के प्रधानाचार्य बन गए।
- पंजाब में भी बड़े पैमाने पर शिक्षा का बहिष्कार किया गया। लाला लाजपतराय ने नेतृत्व किया। मद्रास में इसे सफलता नहीं मिली।
- वकीलों ने बड़े पैमाने पर अदालतों का बहिश्कार तो नही किया, लेकिन जाने माने वकीलों जैसे- सी आर दास, मोतीलाल नेहरू, एम आर जयकर, किचलू, वल्लभ भाई पटेल, राजगोपालाचारी, टी प्रकाषम् और आसफअली के वकालत छोडने से लोग बहुत प्रोत्साहित हुए।
- बहिष्कार आंदोलन में सबसे अधिक सफल था- विदेशी कपडों के बहिष्कार कार्यक्रम।
- प्रभुदास गांधी महात्मा गांधी के साथ देष दौरे पर गए थे।
- इसका नतीजा यह हुआ कि 1920-21 में जहां 1 अरब दो करोड़ रूपए मूल्य के विदेशी कपड़ों का आयात हुआ था, वही 1921-22 में यह घटकर 57 करोड़ हो गया।
- ताड़ी की दुकानों पर धरना मूल कार्यक्रम में नही था।
- मार्च 1921 में विजयवाडा में कांग्रेस सम्मेलन हुआ, जिसमें 'तिलक स्वराज फंड' की स्थापना की।
चरखे और खादी का खूब प्रचार हुआ। खादी तो राष्ट्रीय आंदोलन की प्रतीक बन गई।
- 8 जुलाई 1921 को कराची में खिलाफत सम्मेलन में मुहम्मद अली ने घोषणा की कि किसी भी मुसलमान का सेना में रहना धर्म के खिलाफ हैं। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
- 4 अक्टूबर को गांधी समेत 47 कांग्रेस नेताओं ने मुहम्मद अली के बयान की पुष्टि कर दी।
- प्रिंस ऑफ वेल्स 17 नवंबर 1921 को भारत यात्रा पर आये, जिसके विरोध में पूरे देश में हडताल थी।
- उसी दिन गांधीजी ने बंबई में एलफिंस्टन मिल के अहाते में मजदूरों की सभा में भाषण किया।
- कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस समितियों को यह इजाजत दे दी थी कि जब भी उन्हें लगे कि जनता कानून अवज्ञा आन्दोलन के लिए तैयार है, वे आंदोलन छेड सकती है।
- मिदनापुर 'बंगाल' और गुंटूर जिले 'आंध्र' के चिराला-पिराला और पेड़ानुडीपाडु तालुका में तो कर अदा न करने का आंदोलन छिड गया था।
- केरल में मालाबार में असहयोग आन्दोलन और खिलाफत आंदोलन ने खेतिहर मुसलमानों को उनके भूस्वामियों के खिलाफ संघर्ष छेडने के लिए एकसाया, लेकिन दुर्भाग्य से आंदोलन ने यहां कहीं-कहीं साम्प्रदायिकता का रूख अख्तियार कर लिया।
- असम-बंगाल रेलवे कर्मचारियों ने हडताल की। बंगाल के राष्ट्रवादी नेता जे एम सेनगुप्त ने इस दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मिदनापुर में एक गोरी जमींदारी कंपनी के खिलाफ काश्तकारों की हडताल का नेतृत्व किया, कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के छात्र ने।
- आंध्र में वन-कानून के खिलाफ आंदोलन छिडा।
- राजस्थान में किसानों और आदिवासियों ने आंदोलन किया
- पंजाब में अकालियों ने गुरूद्वारों पर भ्रष्ट महंतो के कब्जे के खिलाफ आंदोलन छेडा।
- मई 1921 में नए वाइसराय लॉर्ड रैडिंग ने गांधीजी से मुलाकात की।
- सबसे पहले सी आर दास को गिरफ्तार किया गया और बाद में उनकी पत्नी बासंती देवी को।
- दिसम्बर के मध्य मालवीयजी के माध्यम से बातचीत करके मामला सुलझाने की कोशिश की गई।

चौरीचौरा कांड

- गांधीजी पर राष्ट्रीय स्तर पर कानून की सविनय अवज्ञा आंदोलन छेडने के लिए लगातार दबाव पड़ रहा था।
- दिसंबर 1921 में अहमदाबाद कांग्रेस सम्मेलन में ही कांग्रेस ने भावी रणनीति तय करने की पूरी जिम्मेदारी गांधीजी पर सौंप दी थी।
- 1921 के कांग्रेस के अहमदाबाद सम्मेलन में अध्यक्ष सी आर दास चुने गये थे लेकिन उनके जेल में रहने के कारण अधिवेशन की अध्यक्षता हकीम अजमल खां ने की थी।
- जनवरी 1922 में सर्वदलीय सम्मेलन की अपील और वाइसराय के नाम गांधीजी के पत्र का सरकार पर कोई असर नही पड़ा।
- गांधीजी ने लिखा कि यदि सरकार नागरिक स्वतंत्रता बहाल नही करेगी, राजनीतिक बंदियों को रिहा नहीं करेगी, तो वह देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलन छेडने को बाध्य हो जाएंगे।
- गांधीजी ने मजबूर होकर सविनय अवज्ञा आंदोलन छेडने की घोषणा की। यह आंदोलन बारदोली तालुका 'सूरत' से शुरू होने वाला था।
- 5 फरवरी 1922 को चौरीचौरा में कांग्रेस और खिलाफत का एक जुलूस निकला था। कुछ पुलिसवालों ने इनके साथ दुर्व्यवहार किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि जुलूस में षामिल एक जत्थे ने पुलिस पर हमला बोल दिया। 22 पुलिसकर्मी मारे गये। इस घटना के बाद गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन समाप्त हो गया।

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