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Sunday, April 23, 2017

दिवांशु: सभ्यता निर्माता

दिवांशु: सभ्यता निर्माता

दिवांशु से तात्पर्य हैं कि दिवा यानि सूर्य और (जिसे इंग्लिश में Sun भी कहा जाता है और विभिन्न सभ्यताओं तथा धर्मों में अनेक नाम) अंशु यानि किरणें अर्थात् सूर्य की किरणें। जिस प्रकार सूर्य की किरणें सम्पूर्ण सृष्टि को जीवन दान प्रदान कर मानव विकास के पथ को और बढाती है उसी प्रकार इस ब्लाॅग का उद्देश्य महत्वाकांक्षा हीन होकर सभी धर्मों एवं विचारधाराओं का ध्यान रखते हुए विश्व सृष्टि को सुख समृद्धि का संदेश देना है, क्योंकि कोई भी धर्म, विचारधारा समय और परिस्थितियों के अनुसार जन्म लेती है। वर्तमान विश्व में कई असमानताएं देखने के मिलती हैं। जहां भारत जैसा देश आतंकवाद की मार झेल रहा हैं, सीरिया जैसे देश आईएसआईएस के आतंक से पीड़ित हैं। विश्व के कई बडे मंचों से विभिन्न देशों के द्वारा आतंकवाद पर एक जुट होकर लडनें का आवाहन तो होता है, किंतु मंचों से दूर होते ही वे किये वादों को भूल जाते है। मानव ही क्या प्रकृति का जीव भी एक अच्छे जीवन की चाह लिए जीता है हम तो मानव है।
वर्तमान विश्व में आतंक बडा मुद्दा है। आखिर जिस मानव को हर धर्म ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति मानता हैं वही मानव आज प्रकृति को पतन की ओर ले जा रहा है। यदि हम विश्व सभ्यताओं का अध्ययन निष्पक्ष हृदय से करते हैं तो पायेंगे कि इन सभी सभ्यताओं ने अपने प्रारम्भिक स्वरूप में ईश्वर के रूप में प्रकृति को ही अपना नियंता माना हैं। किसी भी सभ्यता का यदि हम अध्ययन करेंगे तो हम पायेंगे कि धर्म का तात्पर्य मानव द्वारा पशुवत्तियों का त्याग ही धर्म है, क्योंकि मानव समाज भी प्राचीनकाल में उस दौर से गुजर चुका है। उस समय के मानव ने महत्वाकांक्षा का परित्याग कर प्रकृति के सानिध्य में अपना विकास किया। उन्होंने सूर्य देवता को एक पूज्य देवता के रूप में माना है, जिसको विभिन्न सभ्यताओं में विभिन्न नामों से पुकारा गया है।
अब तक का इतिहास उठाकर देखें तो ऐसा प्रतीत होता हैं कि हम मानव ने तकनीक के माध्यम से काफी उन्नति कर ली हों किंतुु आज भी हम मानव के अन्दर जिन्दा पशुवृत्तियों का दमन नही कर सकें। जिस प्रकार पशु लडते हैं उसी प्रकार प्रकृति के सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानव विभिन्न कारणों से अशांत है। कोई धर्म को लेकर लड रहा हैं, तो कोई देश की सीमाओं के लेकर लड रहा है। आखिर हम क्यूं एक मुद्दें को लेकर जीवन गुजर देना चाहते है।
कहते हैं मानव 21वीं सदी में जी रहा हैं जोकि तकनीक के सहयोग  से काफी और बढ रहा हैं और मानव को भौतिक सुखमय जीवन देन के लिए प्रतिबद्ध है। अभी भी वक्त है मानव समाज को बचाने का यदि हम ऐसे ही लड़ते रहे और तकनीक ऐसे हावी होती रही तो हम मानव सभ्यता को नही बचा पायेंगे। इस दिवांशु पोर्टल का उद्देष्य प्रकृति की गोद में मानव विकास के विभिन्न पहलुओं को लोगों के समान लाना है। साथ ही दिवांशु, समाचार एवं सामान्य अध्ययन से संबंधित एक न्यूज पोर्टल हैं जोकि समाचारों के साथ-साथ प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रछात्रों के लिए सामान्य अध्ययन से संबंधित उपयो सामाग्री उपलब्ध करवाने की पूरी  है।




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