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वैज्ञानिक प्रबन्ध विचारधारा

 

वैज्ञानिक प्रबन्ध


Scientific Management Approach 

वैज्ञानिक प्रबन्ध का अर्थ :

  • वैज्ञानिक प्रबन्ध के जन्मदाता एवं प्रवर्तक फ्रेडरिेक विंसलो टेलर थे। टेलर की प्रसिद्ध पुस्तक वैज्ञानिक प्रबन्ध के सिद्धान्त (The Principle of the Scientific Management), 1911 में प्रकाशित हुई।
  • वैज्ञानिक प्रबन्ध शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- वैज्ञानिक एवं प्रबन्ध। 
  • वैज्ञानिक से तात्पर्य है- विज्ञान संबन्धी और विज्ञान का अर्थ है-विशिष्ट जानकारी अथवा ज्ञान की अभिवृद्धि। 
  • अर्थात् विज्ञान ज्ञान की वह शाखा है जो तथ्यों का व्यवस्थित रूप से संजोती है, और सामान्य नियमों को खोज निकालने का प्रयत्न करती है। 
  • सर्वप्रथम, यह तथ्यों को एकत्रित करती है और उनके पारस्परिक कार्य-कारण सम्बन्ध प्रदर्शित करते हुए, कुछ मान्य निष्कर्षों तक पहुंचने का प्रयत्न करती है।
  • 'प्रबन्ध' से आशय किसी कार्य को सुव्यवस्थित ढंग स चलाने से है अर्थात् प्रबन्ध एक ऐसा नेतृत्व कार्य है जिसमें सामान्य लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मानवीय प्रयासों का नियोजन, संगठन, निर्देशन एवं नियंत्रण किया जाता है। यह भौतिक एवं मानवीय संसाधनों के कुशलतम उपयोग एवं निर्देशन के माध्यम से दूसरों से कार्य लेने की कला है। 
  • इस प्रकार अनुभव द्वारा सुधार व विकास करने का परम्परागत सिद्धांत, 'गलती करो और सुधार करो' के स्थान पर निश्चित सिद्धांतों एवं नियमों के आधार पर प्रबंध का संचालन करना वैज्ञानिक प्रबंध है।
  • वैज्ञानिक प्रबंध एक विचारधारा एवं दर्शन है, जोकि परम्परागत कार्य कराने व करने के 'अंगूठा के नियम' (Rule of thumb) का विरोधी है। 
  • किसी भी औद्योगिक संस्थान में कार्य करने तथा श्रमिकों से कार्य लेने के वैज्ञानिक ढंग को शामिल किया जाता है। जिससे सम्बंधित संस्थान में प्रबंध की समस्त समस्याएं दूर हो जाए। साथ ही उनका उपयोग करके संस्थान की कार्यकुशलता एवं उत्पादन को अधिकतम किया जाता है। 

परिभाषाएं

  • फ्रेडरिक विन्सलो टेलर - ''यह जानने की कला कि तुम व्यक्तियों से संगठन में क्या कराना चाहते हो तथा यह देखना कि वे सबसे उचित व सस्ते ढंग से कार्य कैसे करते हैं, वैज्ञानिक प्रबंध कहलाता है।''
  • पीटर ड्रकर- ''वैज्ञानिक प्रबंध का कर्म कार्य का संगठित अ​ध्ययन, कार्य का सरलतम भागों में विश्लेषण और प्रत्येक भाग का श्रमिक द्वारा निष्पादन करने हेतु व्यवस्थित सुधार करना है।''
  • वैज्ञानिक प्रबंध, प्रबंध समस्याओं के हल का वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो कि वैज्ञानिक अनुसंधान, विश्लेषण, नियम, सिद्धांतों एवं परिणामों पर आधारित है। 
  • वैज्ञानिक प्रबंध का उद्देश्य न्यूनतम व्यय पर अधिकतम लाभों को प्राप्त करना होता है। 


वैज्ञानिक प्रबंध की विशेषताएं

(Characteristics of Scientific Management)

  •  वैज्ञानिक प्रबंध में नियोजित एवं निश्चित योजना पायी जाती है। इस निश्चित योजना के द्वारा विभिन्न कार्यों को निश्चित तरीकों द्वारा सम्पादित किया जाता है। 
  •  इसके अंतर्गत घटनाओं, परिस्थितियों आदि के विषय में तथ्य एकत्रित किये जाते हैं। इन तथ्यों का अवलोकन, विश्लेषण एवं प्रयोग करके सिद्धांत बनाकर, उनको व्यवहार रूप में परिणत किये जाते हैं। 
  • संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया जाता है। वैज्ञानिक प्रबंध के अंतर्गत कच्चे माल, मानवीय व भौतिक साधनों का योजनाबद्ध तरीके से कार्य का आवंटन करके उनकी विभिन्न क्रियाओं का समन्वय, नियमन व नियंत्रण इस ढंग से किया जाता है कि कार्यकुशलता में वृद्धि हो सके।
  • वैज्ञानिक प्रबंध में किसी भी संस्थान के दिए हुए अथवा पूर्व में निर्धारित उद्देश्य की प्राप्ति हेतु समस्त शक्ति को जुटाया जाता है। 
  • श्रमिकों को उनकी योग्यतानुसार कार्य दिया जाता है तथा जो श्रमिक कुशलता से कार्य करता है उसे प्रोत्साहन देने हेतु प्रेरणात्मक मजदूरी दी जाती है। इससे कार्यकुशल श्रमिकों को और अधिक कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। 
  • श्रम विभाजन और विशिष्टिकरण सिद्धांत की पालना की जाती है। एक ही कार्य को विभिन्न भागों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक भाग को विभिन्न श्रमिक समूहों द्वारा पूरा करवाया जाता है तथा प्रत्येक भाग हेतु विशेषज्ञ नियुक्त करके उत्पादन करवाया जाता है। इससे उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। जिसमें बड़े पैमाने की मितव्ययताएं प्राप्त होती है। 
  • वैज्ञानिक प्रबंध में प्रत्येक कार्य का प्रमाप  Standards निश्चित कर दिया जाता है। 
  • वैज्ञानिक प्रबंध के अंतर्गत प्रबंध में सफलता लाने हेतु पूंजी व श्र​म में संघर्ष के स्थान पर उनमें सहयोग और पारस्परिक स्नेह की भावना उत्पन्न करना है। 
  • संस्थान में कार्य करने वाले कर्मचारियों के अधिकार तथा उत्तरदायित्व की सीमा भी निर्धारित की जाती है। 

वैज्ञानिक प्रबंध के उद्देश्य

प्रबंध की विभिन्न समस्याओं के निवारण हेतु वैज्ञानिक प्रबंध अपनाया गया है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्न है: 

  • वैज्ञानिक प्रबंध भौतिक एवं मानवीय संसाधनों के बीच समन्वय एवं सहयोग उत्पन्न करके उत्पादन में वृद्धि करता है। इससे विभिन्न संसाधनों का अधिकतम पारिश्रमिक प्राप्त होता है। यह श्रम और पूंजी के बीच पारस्परिक विश्वास व सहयोग उत्पन्न करके उनकी समृद्धि में सहायक होता है। 
  • वैज्ञानिक प्रबंध के द्वारा कर्मचारियों के कामों की दशाओं में सुधार किया जाता है। उनकी शिक्षा व प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था की जाती है तथा कर्मचारियों की भर्ती व चयन वैज्ञानिक आधार पर किया जाता है। इससे सभी कर्मचारियों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। 
  • टेलर के अनुसार वैज्ञानिक प्रबंध का उद्देश्य मानसिक क्रांति को उत्पन्न करना है। जिससे श्रमिकों एवं मालिकों का ध्यान उत्पादन के बंटवारे से हटकर उससे अधिकतम करने पर लगता है। 
  • इसका उद्देश्य क्षेत्र में परम्परागत प्रबन्धकीय दृष्टिकोण को त्यागकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना है। अंगूठा नियम के स्थान पर वैज्ञानिक रीतियों एवं सिद्धांतों को लागू किया जाता है। जिससे अधिकतम उत्पादन के लक्ष्य को पूरा किया जा सके। उत्पादन, वित्त, कार्मिक, बिक्री आदि विभागों में वैज्ञानिक रीतियों व सिद्धांतों को लागू करना है। 
  • जब वैज्ञानिक प्रबंध के अंतर्गत विभिन्न सिद्धांतों, विधियों एवं नियमों का उपयोग किया जायेगा तो इससे समय, श्रम तथा अन्य उत्पादन के साधनों के अपव्यय पर प्रभावपूर्ण ढंग से रोक लग सकेगी और इससे न्यूनतम लागत पर अधिकतक उत्पादन प्राप्त किया जा सकेगा।
  • वैज्ञानिक प्रबंध के अपनाने से अन्य उद्देश्यों की पूर्ति की संभावना होती है। 
  • उदाहरणा​र्थ: निश्चित योजना को लागू करना, प्रमाणित वस्तुओं का उत्पादन करना, प्रेरणात्मक मजदूरी पद्धतियों के अनुसार श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान करना, श्रमिकों की कार्यकुशलता, रूचि, थकान, गति, समय आदि का समय-समय पर अध्ययन करना।

फ्रेडरिक विन्सलो टेलर का योगदान
पुस्तकें
1. Shop Management, 1910
2. Principles of Scientific Management, 1911

निबंध Papers
1. A Piece Rate System,1895
2. The Art of Cutting Metals, 1906

  • टेलर के अनुसार प्रबंधन सच्चा विज्ञान है क्योंकि यह स्पष्ट रूप से निर्धारित कानूनों, नियमों और सिद्धांतों पर आधारित है और सभी प्रकार के संगठन में सार्वभौमिक रूप से लागू होता है। 
  • एक ही सिद्धांत का प्रयोग सभी सामाजिक गतिविधियों में समान रूप से लागू किया जा सकता है। अर्थात् घर, कृषि फार्म, छोटे और बड़े व्यापार, धार्मिक संस्थान और अन्य परोपकारी संस्थाओं, विश्वविद्यालयों तथा शासकीय विभागों पर प्रबंध के एक से नियम लागू होते हैं।
  • इसने संगठन के निम्नतम स्तर पर ध्यान केन्द्रित किया।
  • इसका लक्ष्य काम की भौतिक प्रकृति और कर्मचारियों की शारीरिक प्रकृति के बीच सम्बन्ध का अध्ययन करना था।
  • इसने सांगठिक कुशलता और वित्त में सुधार के लिए विशिष्टीकरण, पूर्वसूचनीयता, तकनीकी क्षमता और तर्कसंगत होने पर बल दिया।
  • औद्योगिक संगठनों में अपने प्रयोगों के दौरान टेलर का सामना सोल्डरिंग/कामचोरी Soldering संकल्पना से हुआ।
  • सोल्डरिंग श्रमिकों के उत्पादन को सीमित रखने की प्रवृति का नाम है। 
  • उन्होंने इस संकल्पना को दो भागों में विभाजित किया — पहली प्राकृतिक सोल्डरिंग और दूसरी व्यवस्थित सोल्डरिंग।
  • प्राकृतिक सोल्डरिंग व्यक्तिगत कारकों जैसे— आराम से काम करने, आलसीपन, ज्यादा परिश्रम न करने आदि आदतों का परिणाम है जबकि व्यवस्थित सोल्डरिंग संगठनिक और सामाजिक कारकों का परिणाम है। जैसे श्रमिकों का हमेशा यह प्रयास होता है कि कार्य निरिक्षक की उत्पादन की आशा हमेशा ही कम ही बनी रहे ताकि वे जान न पाए कि श्रमिक अधिक उत्पादन करने में सक्षम है। उन्हें लगा कि संगठन की कुशलता बढ़ाने का बुनियादी तरीका वैज्ञानिक तकनीकी से सोल्डरिंग कम करने में है।

टेलर के वैज्ञानिक प्रबंध की मान्यताएं

टेलर ने वैज्ञानिक प्रबंध की तीन प्रमुख मान्यताएं बताई जो निम्न प्रकार हैं-
  1. संगठनात्मक समस्याओं के विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रणाली के उपयोग से उन्नत व्यवहारों का प्रयोग होगा।
  2. कार्य मजदूरों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक उत्तम मजदूर वहीं है जो आदेशों को स्वीकार कर मानक तथा प्रणालियों के अनुसार कार्य करता है। 
  3. प्रत्येक मजदूर एक विवेकशील प्राणी है। वह एक आर्थिक व्यक्ति भी है, जो हमेशा अपनी आय को बढ़ाने में रूचि लेता है। संगठन उत्पादन का ​एक विवेकशील उपकरण है। 



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