इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना कब शुरू हुई, जानें पूरी जानकारी

  

इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना
इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना

‘इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण’ योजना की शुरूआत महिला सशक्तीकरण की दिशा में राजस्थान सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वस्थ एवं पोषित बच्चे देश का भविष्य हैं। गर्भवती महिला को उचित पोषण मिलेगा तो बच्चा भी स्वस्थ पैदा होगा। राज्य सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना माताओं एवं बच्चों में कुपोषण कम करने के साथ-साथ बच्चे के समुचित विकास में मां के पोषण के महत्व के संबंध में जागरूकता भी बढ़ाएगी।  


मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के नाम पर उनके जन्म दिन 19 नवम्बर को इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना की  शुरूआत की। इसके लिए उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रावधानों की अनुपालना में जिस भावना के साथ राज्य सरकार ने द्वितीय प्रसव के समय महिलाओं के लिए यह योजना शुरू की है उसे ध्यान में रखते हुए परिवार के लोग गर्भवती एवं धात्री महिला तथा बच्चे के पोषण का पूरा ख्याल रखें।


पूरे प्रदेश में चरणबद्ध रूप से लागू होगी योजना


 महिला एवं बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण को प्राथमिकता देते हुए इस योजना की घोषणा इस वर्ष के राज्य बजट में 13 मार्च को की गई थी। फिलहाल यह योजना मातृ एवं शिशु पोषण संकेतकों पर बनी रैंकिंग के आधार पर प्रदेश के चार अत्यधिक पिछड़े टीएसपी जिलों उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ़ में शुरू की गई है। राज्य सरकार इसे चरणबद्ध रूप से पूरे प्रदेश में लागू करेगी।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए योजना बनाने का प्रावधान भी था। 


प्रतिवर्ष 77 हजार से अधिक महिलाएं होंगी लाभान्वित


योजना में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा खान एवं भूविज्ञान विभाग मिलकर कार्य करेंगे। प्रतिवर्ष करीब 77 हजार से अधिक महिलाएं लाभान्वित होंगी। इसके तहत पर 43 करोड़ रुपए वार्षिक खर्च होंगे, इसमें वित्त पोषण खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधीन स्टेट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा। श्री गहलोत ने योजना के लोगो, पोस्टर एवं ब्रोशर का भी विमोचन किया। योजना के शुभारम्भ के अवसर पर चारों जिलों की दो-दो लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में एक-एक हजार रुपये के चेक दिए गए।

लाभार्थी महिलाओं को पांच चरणों में छह हजार रुपये मिलेंगे


"इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना" का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं तथा तीन वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ एवं पोषण की स्थिति में सुधार लाना है।

इस योजना में दूसरी संतान के जन्म पर लाभार्थी महिलाओं को पांच चरणों में 6 हजार रुपये की राशि सीधे लाभार्थी के खाते  में  भेजी जाएगी। 

पहली किश्त 1000 रुपए गर्भावस्था जांच व पंजीकरण होने पर, दूसरी किश्त 1000 रुपए कम से कम दो प्रसव पूर्व जांचें पूरी होने पर, तीसरी किश्त 1000 रुपए संस्थागत प्रसव होने पर, चौथी किश्त 2000 रुपए बच्चे के जन्म के 105वें दिन तक सभी नियमित टीके लगने तथा बच्चे का जन्म पंजीकरण होने पर तथा पांचवी एवं आखिरी किश्त 1000 रुपए दंपती की दूसरी संतान पैदा होने के तीन माह के भीतर परिवार नियोजन के साधन अपनाने पर दी जाएगी। इससे परिवार नियोजन को भी बढ़ावा मिलेगा। 

इस योजना के तहत 1 नवम्बर, 2020 एवं इसके बाद जन्मे दूसरे बच्चे के समय गर्भवती महिलाओं को लाभ मिलेगा।

 इस योजना में केन्द्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई राशि नहीं दी जा रही है। योजना पर राशि पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा खर्च की जा रही है। 

आंगनबाडी केन्द्रों द्वारा योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। 

एएनएम एवं आशा सहयोगिनी लाभार्थी महिलाओं को उचित पोषण एवं शिशु की देखभाल के संबंध में परामर्श देंगी।

 चिल्ड्रन्स इन्वेस्टमेंट फण्ड फाउण्डेशन तथा आईपीई ग्लोबल योजना के क्रियान्वयन में राज्य सरकार का सहयोग करेंगे। 

Post a Comment

0 Comments