पुस्तकालय के नित कार्यों में कम्प्यूटर का अनुप्रयोग

  


मुख्य बिन्दु

पुस्तकालयों में कम्प्यूटर के प्रयोग का प्रारम्भ वर्ष 1950 के दशक से माना जा सकता है।

आईबीएम के डॉ. एच पी लुहान ने सबसे पहले कम्प्यूटरीकृत अनुक्रमणिका क्विक (WIC) की संरचना की।

पहले पुस्तकालयों (Library) में यांत्रिक विधियों का प्रयोग किया जाता था, लेकिन कम्प्यूटर का प्रयोग डॉ. लुहान के द्वारा ही प्रारंभ हुआ।

लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस, अमेरिका द्वारा वर्ष 1966 में प्रारम्भ की गई मार्क (MARC- Machine Readable Catalogue) प्रोजेक्ट पुस्तकालय स्वचालन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

इसका उद्देश्य लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस की पुस्तक सूची को मशीन पठनीय रूप में टेपों पर तैयार करना था।

मार्क - यंत्र पठनीय प्रसूची, ग्रंथपरक विवरण-विनिमय हेतु, यंत्र पठनीय संरूप (फॉर्मेट) में एक अन्तर्राष्ट्रीय मानक। इसका आरंभ वर्ष 1966 में लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस ने किया। वर्ष 1967 से मार्क-II का उपयोग किया जाने लगा। अमुद्रित सामग्री और अधि-आंकड़ा (मेटाडाटा) को सम्मिलित कर, आज इसका परिवर्धित संस्करण मार्क-21 प्रयुक्त हो रहा है।

 

डेलनेट (DELNET)

डेवेलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क (Developing Library Network)

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) और राष्ट्रीय विज्ञान सूचना प्रौद्योगिकी (NISSAT) की सहायता से पुस्तकालयों के मध्य सूचना-स्रोतों की सहभागिता और परस्परिक संयोजन विकसित करने हेतु वर्ष 1988 में दिल्ली में स्थापित सूचना-प्रणाली पहले इसे दिल्ली लाइब्रेरी नेटवर्कके नाम से जाना जाता था।

 

आर एफ आई डी

रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन (Radio Frequency Identification)

यह एक अत्याधुनिक तकनीक है जो पुस्तकालयों में चोरी पकड़ने के उपकरण के रूप में उपयोग की जाती है।

इसका उपयोग पुस्तकालय में वस्तु सूची पर नजर रखने और पुस्तकालय प्रबंधन में कार्य कुशलता लाने के उद्देश्य से किया जाता है। इस तकनीकी में पुस्तकों एवं अन्य पाठ्य सामग्री में आर एफ आई डी टैग लगाया जाता है जोकि रेडियो तरंगों के जरिये उनकी पहचान या ट्रेकिंग करने में सक्षम होता है।

अधिग्रहण

पुस्तकालय में ग्रन्थों का क्रय करना और इसके लिए क्रयादेश तैयार करना, उनकी प्राप्ति सुनिश्चित करना, बिल तैयार करना आदि कार्य अधिग्रहण के अंतर्गत आते हैं।

प्रसूचीकरण Cataloguing 

पुस्तकालय में उपलब्ध प्रलेखों की सूची को प्रसूची कहते हैं और प्रसूची तैयार करने की विधि को प्रसूचीकरण कहते हैं।

परिसंचालन Circulation

पुस्तकालय में सदस्यों का पंजीकरण, प्रलेखों का निर्गम एवं आगम, स्मरण पत्र जारी करना, दैनिक निर्गमित/आंकड़े तैयार करना परिसंचालन संबंधी कार्य कहे जाते हैं।

धारावाहिक Serial

क्रमिक प्रकाशन (आवधिक प्रकाशन) जो सूचना के प्राथमिक स्रोत है और एक निश्चित अंतराल के पश्चात प्रकाशित होते हैं, धारावाहिक कहलाते हैं।

आई. एस. एस. एन.

यह इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड सीरियल नंबर का संक्षिप्त रूप है जो 8 अंकों का बना होता है। प्रत्येक धारावाहिक को एक विशिष्ट आई एस एस एन नम्बर दिया जाता है। भारत में इसका राष्ट्रीय केन्द्र निस्केयर, नई दिल्ली में है।

 

क्वाक

प्रसंग से पृथक संकेत शब्द (Keyword out of Context- KWOC)

यह एक अनुक्रमणीकरण पद्धति है। इसमें एक आधार शब्द आख्या से पृथक निकाल दिया जाता है तथा उसे प्रविष्टि के शीर्षक की भांति प्रयुक्त किया जाता है।

क्विक

प्रसंगयुक्त संकेत शब्द (Keyword in Context- KWIC)

यह एक अनुक्रमनीकरण विधि है, जिसमें आख्या या आख्याओं के समूह में पुनरावृत शब्दों को स्वतः क्रम परिवर्तन हेतु कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है। जब अनुक्रमणिका में संकेत शब्द स्तम्भ में टंकित अंतराल पंक्ति के मध्य आनुवर्णिक क्रमानुसार एक दूसरे के नीचे मुद्रित होता है।

इंटरनेट

विश्व के कम्प्यूटर एवं संचार नेटवर्क जो आरपानेट का विकसित रूप में है। यह विश्व में सूचना आदान-प्रदान करने का माध्यम है।

 

लोकप्रिय मुक्त स्रोत (ओपन सोर्स) एकीकृत पुस्तकालय प्रबंधन सॉफ्टवेयर

 

कोहा KOHA

यह सॉफ्टवेयर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक लोकप्रिय पुस्तकालय प्रबंधन सॉफ्टवेयर है।

इसको वैकाटो विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड ने बनाया।

यह मुक्त स्रोत है। वर्तमान में इसका कोहा-16 संस्करण संचालन में है।

प्रमुख विशेषता -

यह सॉफ्टवेयर किसी भी प्लेटफार्म (विंडोज, यूनिक्स, लिनक्स) पर रचित डेटा को अपने परिप्रणाली में आयात कर लेता है तथा डेटा का पूरी तरह से संरक्षण भी करता है।

यह सभी प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय डेटा मानकों जैसे मार्क-21, Z 39.50 आदि को स्वीकृत करता है।

इसका प्रचलन भारत में बढ़ रहा है।

इसके बहिर्पृष्ठ एवं अंतरापृष्ठ को भारतीय भाषाओं में भी स्थापित कर सकते हैं।

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