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शिक्षा का अधिकार कानून-2009

शिक्षा का अधिकार कानून-2009



  • 1 अप्रैल, 2010 को संपूर्ण देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया। इस कानून का उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिकीकरण था। 
  • शिक्षा का अधिकार कानून कक्षा पहली से लेकर 8 तक की प्राथमिक शिक्षा के सभी बालकों के लिए अनिवार्य बनाता है। 
  • शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है एवं अनुच्छेद 21 ए प्राथमिक शिक्षा को मूल अधिकार के रूप में स्थापित करता है। 
  • आरटीई के तहत प्रमुख प्रावधान निम्न है— 
  • निजी विद्यालयों में 25% सीट आरक्षित रखी जाए एवं इन सीटों पर गरीब बच्चों का प्रवेश दिया जाएगा। इन 25% सीटों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क विद्यालय को प्रदान किया जाएगा। 
  • 40 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था की जाएगी। 
  • कोई भी सरकारी शिक्षक निजी शिक्षण कार्य कर नहीं करेगा प्राइवेट ट्यूशन करने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। 
  • बच्चों को शारीरिक अथवा मानसिक प्रताड़ना नहीं दी जाएगी।
  • आठवीं कक्षा उत्तीर्ण का प्रमाण पत्र सभी बालकों को प्रदान किया जाएगा। 
  • 1 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक विद्यालयों की व्यवस्था की जाएगी। 
  • कोई भी विद्यालय सरकारी मान्यता के बिना नहीं चलेगा एवं ऐसा करने पर ₹10000 प्रतिदिन के अनुसार जुर्माना वसूला जाएगा। 
  • किसी भी बालक को उसकी आयु के अनुसार प्रवेश दिया जाएगा, जैसे 10 वर्ष के बालक को कक्षा 4 अथवा 5 में प्रवेश देना, किंतु ऐसे बालकों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। 
  • किसी भी शिक्षक को पोलियो अभियान में नियुक्त नहीं किया जाएगा। 
  • बालकों को जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर प्रवेश से इनकार नहीं किया जाएगा। 
  • शिक्षा का उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। 
  • प्रत्येक बालक का विद्यालय में पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। 
  • प्रत्येक शिक्षक को 1 सप्ताह में न्यूनतम 45 घंटे शिक्षण कार्य कराना होगा। 
  • इस प्रकार शिक्षा का अधिकार कानून प्राथमिक शिक्षा को लेकर अनिवार्य व्यवस्था करता है एवं संपूर्ण देश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार होने का प्रयास करता है।

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