शिक्षण प्रतिमान



आगमन चिंतन प्रतिमा - हिल्दी ताबा
पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान - सचमैन
वैज्ञानिक पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान - सकवाब
अग्रिम संगठन प्रतिमान - आशु बेल
विकासात्मक प्रतिमान - जीन पियाजे
प्रत्यय निष्पत्ति प्रतिमान - ब्रूनर
दिशा विहीन प्रतिमान - कार्ल-रोजर्स
अंतः क्रिया प्रतिमान - फ़्लैण्डर
सामाजिक अंतः क्रिया प्रतिमान - जॉन डीवी व हरबर्ट
प्रयोगशाला विधि प्रतिमान - बेदल व मेने


प्रशिक्षण प्रतिमान का अर्थ

जिस प्रकार से किसी भी मकान को बनाने के लिए एक नक्शे की आवश्यकता होती है एवं किसी भी प्रश्न पत्र को बनाने के लिए एक मानचित्र की अथवा ब्लूप्रिंट की आवश्यकता होती है उसी प्रकार से कक्षा-कक्ष में सफल शिक्षण कार्य कराने के लिए शिक्षण प्रतिमानों की आवश्यकता होती है।

एक प्रशिक्षण प्रतिमान का पालन करते हुए बालक सफलतापूर्वक अधिगम करता है एवं शिक्षक सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य को संपन्न करता है।

आगमन चिंतन प्रतिमा - हिल्दी ताबा

कक्षा-कक्ष में शिक्षक बालकों के सामने अनेक उदाहरण प्रस्तुत करता है एवं बालक उन उदाहरणों की सहायता से सफलतापूर्वक अधिगम करता है।

पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान - सचमैन

बालको से कक्षा-कक्ष में अनेक प्रश्न पूछे जाते हैं एवं उन प्रश्नों की सहायता से बालकों को विषय वस्तु का अधिगम करवाया जाता है। प्रश्नों के द्वारा बालक मानसिक एवं शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हुए अधिगम करते हैं।

वैज्ञानिक पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान - सकवाब

जीव विज्ञान विषय को पढ़ाते समय बालकों से कक्षा-कक्ष में अनेक प्रश्न पूछे जाते हैं तो इसे वैज्ञानिक पृच्छा कहते हैं।

अग्रिम संगठन प्रतिमान - आशु बेल

कक्षा-कक्ष में कोई भी शिक्षक बालकों को अधिगम करवाने के लिए विषय वस्तु से संबंधित सहायक सामग्री तैयार करता है एवं उस सामग्री की सहायता से अधिगम करवाता है। इस प्रतिमान में मूर्त से अमूर्त की ओर शिक्षण सूत्र का पालन किया जाता है।

विकासात्मक प्रतिमान - जीन पियाजे

कक्षा-कक्ष में शिक्षण कार्य करवाने के लिए बालक को मानसिक तर्क-वितर्क के अवसर प्रदान किए जाए एवं बालक मानसिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए विषय वस्तु का अधिगम करें।

प्रत्यय निष्पत्ति प्रतिमान - ब्रूनर

उच्च कक्षाओं में बालकों को विषय-वस्तु से संबंधित पूर्व ज्ञान नहीं देना चाहिए क्योंकि बालक विषय-वस्तु के प्रत्यक्ष विचार को समझने की योग्य होता है।

दिशा विहीन प्रतिमान - कार्ल-रोजर्स

इस प्रतिमान के अनुसार बालक में मानसिक शक्तियां विद्यमान होती है, अतः बालक को शिक्षक के मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती है, बालक अपनी इच्छा अनुसार स्वतः अधिगम करता है।

अंतः क्रिया प्रतिमान - फ़्लैण्डर

दस शाब्दिक एवं दस अशाब्दिक व्यवहारों का प्रयोग करते हुए शिक्षक कक्षा-कक्ष में बालकों को अधिगम करवाए।

सामाजिक अंतः क्रिया प्रतिमान - जॉन डीवी व हरबर्ट

इसका प्रयोग सामाजिक विज्ञान विषय में किया जाता है एवं बालक समाज से अन्तः क्रिया करते हुए विषय वस्तु का अधिगम करता है।

प्रयोगशाला विधि प्रतिमान - बेदल व मेने

बालकों को प्रयोगशाला के माध्यम से किसी भी विषय का अधिगम करवाया जाए।

Post a Comment

0 Comments