समायोजन



  • समायोजन से तात्पर्य व्यक्ति विशेष की उस मनोदशा स्थिति अथवा किये जाने वाले उस व्यवहार प्रक्रिया से है जिसमें आवश्यकताओं की संतुष्टि हो रही है और उसका व्यवहार समाज और संस्कृति की अपेक्षाओं के अनुकूल चल रहा है।
  • गेट्स, जर्सिल्ड व अन्य - ‘समायोजन एक ऐसी सतत् प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने व्यवहार में इस प्रकार से परिवर्तन कर सकता है कि उसे स्वयं तथा अपने वातावरण के बीच और अधिक मधुर सम्बन्ध स्थापित करने में मदद मिल सके।’
  • एल.एस. शेफर - ‘समायोजन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई जीवधारी अपनी आवश्यकताओं तथा इन आवश्यकताओं की संतुष्टि से सम्बन्धित परिस्थितियों में सन्तुलन बनाये रखता है।’
  • वोन हेलर - ‘हम समायोजन शब्द को अपने आपको मनोवैज्ञानिक रूप से जीवित रखने के लिए वैसे ही प्रयोग में ला सकते हैं जैसे कि जीवशास्त्री अनुकूलन शब्द का प्रयोग किसी जीव को शारीरिक या भौतिक दृष्टि से जीवित रखने के लिए करते हैं।’
  • आईजेंक -‘ समायोजन वह अवस्था है जिसमें एक ओर व्यक्ति की आवश्यकताएं तथा दूसरी ओर वातावरण के अधिकारों में पूर्ण संतुष्टि होती है अथवा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा इन दो अवस्थाओं में सामंजस्य प्राप्त होता है।’
  • बोरिंग, लैंगफील्ड एवं वैल्ड - ‘ समायोजन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा प्राणी अपनी आवश्यकताओं और इन आवश्यकताओं की पूर्ति को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों में संतुलन स्थापित करता है।’

विशेषताएं -

  1. सुखी व सन्तोषप्रद जीवनयापन किया जा सकता है।
  2. मनोवैज्ञानिक रूप से अनुकूलन सिखाता है।
  3. इच्छाओं और आवश्यकताओं में संतुलन स्थापित होता है।
  4. समायोजन परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तित करता है।
  5. समायोजन द्वारा व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है।
  6. समायोजन के प्रकार -
  7. व्यक्तिगत समायोजन
  8. समाजिक
  9. व्यावसायिक समायोजन
  10. रचनात्मक 
  11. स्थानापन्न
समायोजन की प्रविधियां -
प्रत्यक्ष विधियां -

  • जब व्यक्ति चेतनावस्था में रहकर समायोजन को स्थापित करने के लिये प्रयत्न करता है तो प्रत्यक्ष विधियों के अन्तर्गत आती है।
  1. बाधाओं का समाधान
  2. अन्य मार्ग खोजना (अन्वेषण)
  3. उद्देश्यों में परिवर्तन (लक्ष्यों का प्रतिस्थापन) 
  4. विश्लेषण व निर्णय

अप्रत्यक्ष विधियां -
  • मानसिक सामान्यता को बनाये रखने के लिये व्यक्ति को अचेतन क्रियाओं की भी सहायता लेनी पड़ती है अतः अप्रत्यक्ष उपाय वे है, जिन्हें वह अचेतन रूप से अपनाता है। इन्हें ‘सुरक्षा प्रक्रियाएं’ कहा जाता है।

शोधन -
  • शोधन अचेतन मन की वह मानसिक प्रक्रिया है जिसके अंदर व्यक्ति की मूल प्रवृत्यात्मक शक्ति या संवेगात्मक शक्ति, पाशविक इच्छाएं या आवश्यकताएं आदि को ऐसे कृत्रिम पक्ष की तरफ मोड़ दिया जाता है, जिसे समाज की स्वीकृति प्राप्त है।
  • जैसे - कवि कालिदास की प्रेम की भावना (प्रेमिका) में शोधन करके साहित्य प्रेम की भावना के रूप में शोधन किया गया।

पृथक्करण -
  • दुःख या कष्ट आने पर व्यक्ति स्वयं को उससे अलग कर लेता है। ऐसे व्यवहार को पलायनवादी समाज विरोधी या कानून विरोधी होते है और ऐसे लोग समायोजन स्थापित करने में सफल नहीं होते।
प्रतिगमन - 
  • प्रतिगमन से तात्पर्य होता है - वापिस जाना या भूतकाल में लौटना।
  • मनोरचना के रूप में जब व्यक्ति इसका प्रयोग करता है तो वह अपने जीवन के भूतकाल में जाकर शैशवकालीन अपरिपक्व व्यवहार करने लगता है। जैसे - बोतल या चम्मच से दूध पीना।
  • एक विवाहित लड़के का अपनी मां के सामने फूट-फूट कर रोना।
दमन -
  • दुःखद अनुभव कटु स्मृत्तियां, मानसिक संघर्ष और अतृप्त आकांक्षाओं को अचेतन मन के किसी कोने में दबाकर समायोजन स्थापित करना।
शमन - 
  • कष्टदायक आवेगों और स्मृत्तियों को जानबूझ कर चेतन अस्वीकृति या निष्कासन शमन। 
  • जैसे - जो हुआ सो हुआ, अब विचार करना व्यर्थ है।

तादात्म्य -
  • तादात्म्य से तात्पर्य बाह्य विषय के गुणों को अपना लेने से या दूसरे के गुणों का अपने व्यक्तित्व में ग्रहण कर लेने से है।
  • जैसे - कॉलेज के लड़के-लड़कियां फिल्म के हीरो या हीरोइनों के साथ तादात्म्य स्थापित कर लेते हैं।

युक्तिकरण/ तर्क संगतिकरण/ औचित्य स्थापन -

  • यह आत्मदोषारोपण के विरूद्ध एक मनो-अभियांत्रिकी है, जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी कमियों या असफलताओं को स्वीकार न करके उसका दोष दूसरों पर थोप देता है।
  • जैसे - अंगूर खट्टे है और नींबू मीठे है।
  • चुनाव हारने के बाद कहना राजनीति गंदी चीज है।

क्षतिपूर्ति -
  • एक क्षेत्र में सफलता नहीं मिलने पर अन्य क्षेत्र में प्रयास करके सफलता प्राप्त करना।
  • लम्बाई के कम होने पर ऊंची हिल के जूते पहनकर संतुष्ट होना।
  • पढ़ाई में सफल न होने पर खेल में नाम कमाना।

मार्गान्तीकरण -
  • जन्मजात, प्राकृतिक तथा असामाजिक प्रवृत्तियों एवं इच्छाओं के मूलरूप को बदलकर उन्हें सामाजिक रूप प्रदान करना मार्गान्तीकरण कहलाता है।
  • घर/परिवार में क्रोध करने के स्थान पर हम खेल के मैदान में फुटबाल पर क्रोध करके उसे जोर से मारते है।

अन्तः क्षेपण -
  • वातावरण के गुणों को स्वयं के व्यक्तित्व में सम्मिलित करना ही अन्तःक्षेपण कहलाता है।
  • जैसे - किसी के दुःख में दुःखी होकर वैसा ही व्यवहार करना।
क्षतिपूरक विधियां -
  • एक क्षेत्र में प्राप्त होने वाली असफलता को व्यक्ति अन्य क्षेत्र या साधन के माध्यम से कर समायोजन स्थापित करता है। 
आक्रामक विधियां 
  • आक्रामक विधि से तात्पर्य व्यक्ति द्वारा उत्पन्न विरोधात्मक व्यवहार से है, जिसमें उसके द्वारा बाधा या रूकावट का आक्रामक व्यवहार के द्वारा विरोध या सामना किया जाता है।
  • प्रत्यक्ष आक्रामकता - परीक्षा में नकल करना।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

एक व्यक्ति जो कर्ज अदायगी को लेकर तनावग्रस्त है वह अपने आपको दिवालिया घोषित करके अपनी तनाव मुक्ति का रास्ता खोजता है, यह व्यवहार है?
अ. आक्रामक
ब. विस्थापन
स. पलायनवादी
द. उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर- स

यदि किसी व्यक्ति को साक्षात्कार की बात परेशान कर रही है तो साक्षात्कार से मुंह मोड़ लेना है?
अ. औचित्यस्थापना
ब. पलायनवादी
स. मार्गान्तीकरण
द. उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर- ब

पढ़ाई में कमजोर छात्र खेलकूद में परिश्रम कर अपनी कमी को पूरा कर लेता है यह समायोजन का उपाय है?
अ. तादात्मीकरण
ब. पलायन
स. क्षतिपूर्ति
द. आक्रामक
उत्तर- स


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