भारतीय संविधान की मूल प्रति को अपनी चित्रकारी से सजीव रूप देने वाले थे नन्दलाल बोस


  • जन्मः 3 दिसम्बर, 1882, तारापुर, मुंगेर ज़िला, बिहार
  • मृत्युः 16 अप्रैल, 1966, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
  • नंदलाल बोस एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे।  
  • इन्हें आधुनिक भारतीय कला के आरंभिक कलाकारों में से एक माना जाता है। 
  • ये अवनीन्द्रनाथ टैगोर के प्रख्यात शिष्य थे और इन्हें चित्रकारी की ‘भारतीय शैली’ के लिए जाना जाता है। जून 1903 में नन्दलाल बोस ने सुधीरादेवी से विवाह कर लिया।
  • उन्होंने 1905 से 1910 के बीच कलकत्ता गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट में अवनीन्द्रनाथ टैगोर से कला की शिक्षा ली, इंडियन स्कूल ऑफ ओरियंटल आर्ट मे अध्यापन किया।
  • सन 1922 में उन्हें शान्तिनिकेतन स्थित ‘कला भवन’ का प्रमुख चुना गया। 
  • उनकी चित्रकला पर टैगोर परिवार और अजंता के भित्ति चित्रों का बहुत प्रभाव था। उनके उत्कृष्ट कला में शामिल हैं ग्रामीण जीवन, महिलाओं और पौराणिक कथाओं से सम्बंधित चित्र। कई कला समीक्षक उनके चित्रों को ‘भारत के सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक चित्र’ मानते हैं। 
  • सन 1976 में भारतीय पुरातत्व संग्रह और भारत सरकार के संस्कृति विभाग ने उनके काम के ‘कलात्मक और सौन्दर्यात्मक महत्व’ को देखते हुए उन्हें ‘बहुमूल्य कला निधि’ घोषित किया।
  • भारतीय संविधान की मूल प्रति का डिजाइन भी नंदलाल बोस ने ही बनाया था। उनके द्वारा बनाये गये प्रसिद्ध चित्र थे- ‘डांडी मार्च’, ‘संथाली कन्या’, ‘सती का देह त्याग’। चित्रकारी और कला अध्यापन के अतिरिक्त इन्होंने तीन पुस्तकें भी लिखी- रूपावली, शिल्पकला और शिल्प चर्चा।
  • एक युवा कलाकार के तौर पर नंदलाल बोस अजंता के भित्ति चित्रों से बहुत प्रभावित हुए थे। वे कलाकारों और लेखकों के उस अंतर्राष्ट्रीय समूह का हिस्सा बन गए जो ‘पारंपरिक भारतीय संस्कृति’ को पुनर्जिवित करना चाहते थे। इस समूह में शामिल थे ओकाकुरा ककुजो, विलियम रोथेन्स्तीं, योकोयामा तैकान, क्रिषतीअना हेर्रिन्ग्हम, लौरेंस बिन्यों, अबनिन्द्रनाथ टैगोर, एरिक गिल और जैकब एपस्टीन।
  • सन 1922 में उन्हें शान्तिनिकेतन स्थित ‘कला भवन’ का प्रधानाध्यापक नियुक्त किया गया। वे इस पद पर सन 1951 तक रहे।
  • उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पं. जवाहरलाल नेहरू के आमंत्रण पर भारतीय संविधान की मूल प्रति को अपनी चित्रकारी से सजाया। बोस ने भारतीय संविधान की मूल प्रति को कुल 22 चित्रों से सजाया। इन सभी चित्रों को बनाने में कुल चार साल का वक़्त लगा।
  • नंदलाल बोस ने राष्टीªय पुरस्कारों जैसे भारत रत्न और पद्म श्री के प्रतीक भी बनाये।
  • नयी दिल्ली स्थित ‘नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट’ में उनकी 7000 कृतियां संग्रहित हैं जिसमें सन 1930 में दांडी यात्रा के दौरान बनाया गया। महात्मा गाँधी का लिनोकट और वे सात पोस्टर भी शामिल हैं जिन्हें उन्होंने महात्मा गाँधी के निवेदन पर कांग्रेस के सन 1938 के हरिपुरा अधिवेशन के लिए बनाया था।
  • नन्दलाल बोस ने अपनी चित्रकारी के माध्यम से तत्कालीन आंदोलनों के विभिन्न स्वरूपों, सीमाओं और शैलियों को उकेरा। उनकी चित्रकारी में एक मनमोहक जादू था जो सभी कला प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता था। उनकी चित्रकारी को एशिया के साथ-साथ पश्चिम में भी काफ़ी तवज्जो मिला है।
  • भारत के स्वाधीनता आंदोलन का भी उनकी कला पर बहुत प्रभाव दिखाई पड़ा। उन्होंने कांग्रेस के कई अधिवेशनों के लिए पोस्टर और चित्र बनाए और गांधीजी का एक लाइफ साइज रेखाचित्र भी बनाया, जो बहुत प्रसिद्ध हुआ। 
  • स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान पारंपारिक और राष्ट्रीय अवधारणाओं के मेल से जो आधुनिक अवधारणाएँ संकल्पित हुई थीं, उनका प्रभाव तत्कालीन कलाकारों की कला में साफ़ दिखाई दिया और नन्दलाल बोस भी इससे अछूते नहीं रहे। कई अवसरों पर गांधीजी के परिकल्पना को उन्होंने अपने चित्रकारी के माध्यम से साकार किया।
पुरस्कार और सम्मान
  • सन 1956 में उन्हें ललित कला अकादमी का फैलो चुना गया। ललित कला अकादमी का फैलो चुने जाने वाले वे दूसरे कलाकार थे।
  • सन 1954 में उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा गया।
  • सन 1957 में कलकत्ता विश्वविद्यालय ने उन्हें ‘डी.लिट.’ की उपाधि से सम्मानित किया।
  • विश्वभारती विश्वविद्यालय ने उन्हें देशीकोट्टम्मा की उपाधि दी।
  • कलकत्ता के ‘अकादमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स’ ने उन्हें ‘सिल्वर जुबली मैडल’ से सम्मानित किया।
  • सन 1965 में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल ने उन्हें ‘टैगोर जन्म सदी पदक’ दिया
  • 1966 ई. में 84 साल की उम्र में उनका निधन हो गया


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