भारतीय और ओमान की फौजों के बीच दूसरा ‘अल-निगाह’ संयुक्त सैन्य अभ्यास 6 से 19 मार्च, 2017 तक हिमाचल प्रदेश के बकलोह में हुआ।
वरुण-17
पश्चिमी जहाजी बेड़े ने अप्रैल-2017 में फ्रांस की नौसेना के साथ तौलोन, फ्रांस के निकट वरुण-17 द्विपक्षीय अभ्यास में भाग लिया। आईएनएस त्रिशूल, मुम्बई तथा आदित्य ने एकीकृत हेलिकॉप्टरों के साथ इस अभ्यास में भाग लिया।
कोंकण -17
आईएनएस तरकश मई 2017 के दौरान इंगलैण्ड में रॉयल नेवी के साथ द्विपक्षीय अभ्यास कोंकण-17 में भागीदारी की। अभ्यास के दौरान जहाज प्लाइमाउथ लंदन गया और एचएवएस त्रिकोमाली द्विशताब्दी वर्ष समारोहों तथा लंदन में ‘भारत-इंगलैण्ड संस्कृति वर्ष’ समारोह में भाग लिया।
भारत-श्रीलंका संयुक्त सैन्य अभ्यास मित्र शक्ति - 2017
5वां भारत-श्रीलंका संयुक्त सैन्य अभ्यास मित्र शक्ति 2017 का आयोजन 13 से 26 अक्टूबर तक पुणे की औंध छावनी में हुआ। इसके तहत अर्द्धशहरी क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान का अभ्यास किया गया।
भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य अभ्यास सूर्य किरण - XI
सूर्य किरण - XI 7 से 20 मार्च, 2017 तक पिथौरागढ़ में आयोजित हुआ। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास भारतीय सेना की इन्फेंट्री बटालियन और नेपाल की दुर्ग बक्श बटालियन शामिल हुई। अभ्यास के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत का अभ्यास भी किया गया।
भारत-बांग्लादेश संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सम्प्रति’
6 से 18 नवम्बर, 2017 तक
सीआईजेडब्ल्यू स्कूल, वायरगते में
उद्देश्य - जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर की परिस्थितियों के अनुरूप उग्रवादियों और आतंकवादियों के खिलाफ अभियान का प्रशिक्षण देना था।
भारत-इंगलैण्ड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘अजेय वॉरियर’
भारत-इंगलैण्ड के बीच ‘अजेय वॉरियर’ का आयोजन 1 से 14 दिसम्बर 2017 तक महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, बीकानेर (राजस्थान) में किया गया। अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सम्बन्धों को बढ़ाना तथा उग्रवाद विरोधी अभियानों में एक-दूसरे के अनुभवों से लाभ उठाना था।
अभ्यास ‘प्रलय सहायम’
यह अभ्यास हैदराबाद और सिकंदराबाद में शहरी बाढ़ की परिकल्पना के तहत किया गया।
भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट’
12वां भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट’ 5 से 18 अप्रैल तक वायरंगते में आयोजित हुआ।
इसमें मंगोलिया की तरफ से स्पेशल फोर्स टास्क बटालियन ने और भारत की तरफ से जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने हिस्सा लिया।
इस अभ्यास के अंतर्गत उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ सेना को प्रशिक्षित किया गया।
मालाबार - 2017 अभ्यास
एक्स मालाबार के 21वें संस्करण का आयोजन 9 से 17 जुलाई, 2017 तक
भारत के पूर्वी तट के बंदरगाह के पास किया गया। भारतीय नौसेना, अमरीकी नौसेना तथा जापानी समुद्री स्व-सुरक्षा बल ने इस अभ्यास में भाग लिया। इस अभ्यास का मुख्य प्रयोजन भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग एवं आपसी सहयोग बढ़ाना था। कुल मिलाकर 16 जहाजों, दो पनडुब्बियों, 95 विमानों, समुद्री कमांडो (मारकोस) तथा विशेष दस्तों ने इस अभ्यास में भागीदारी की।
भारत-कजाकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘प्रबल दोस्तिक’
भारत-कजाकिस्तान की सेनाओं में बीच 2 से 15 नवम्बर, 2017 तक हिमाचल प्रदेश के बकलोह में किया गया।
ऑपरेशन सहायम
ओखी चक्रवात के दौरान वायुसेना ने विमानों की मदद से 17 मछुआरों को बचाया। एक सी-130 जे विमान को एनडीआरएफ की टीम के साथ हिंडन एयरबेस में तैयार रखा गया जो जरूरत पड़ने पर लक्ष्यद्वीप तक सीधी उड़ान के माध्यम से पहुंच सकता था।
ब्लू फ्लैग-17
2-16 नवंबर को
मध्य इजराइल के उवडा एयरफोर्स बेस पर संयुक्त युद्धाभ्यास।
वर्ष 2013 में प्रारम्भ ‘ब्लू फ्लैग’ इजराइल का द्वि-वार्षिक वायुसेना युद्धाभ्यास है। इस वर्ष युद्धाभ्यास में इजराइल सहित सात देश फ्रांस, जर्मनी, इटली, ग्रीस, पॉलैण्ड, अमरीका और भारत ने हिस्सा लिया।
कहानी के मूलतः छः तत्व हैं। ये हैं- विषयवस्तु अथवा कथानक, चरित्र, संवाद, भाषा शैली, वातावरण और उद्देश्य। कथानक (विषयवस्तु)- प्रत्येक कहानी में कोई न कोई घटनाक्रम अवश्य होता है। कहानी में वर्णित घटनाओं के समूह को कथानक कहते हैं। कथानक किसी भी कहानी की आत्मा है। इसलिए कथानक की योजना इस प्रकार होनी चाहिए कि सभी घटनाएं और प्रसंग परस्पर सम्बद्ध हों। उनमें बिखराव या परस्पर विरोध नहीं हो। मौलिकता, रोचकता, सुसंगठन, जिज्ञासा, कुतूहल की सृष्टि अच्छे कथानक के गुण हैं। साधारण से साधारण कथानक को भी कहानीकार कल्पना एवं मर्मस्पर्शी अनुभूतियों से सजाकर एक वैचित्र्य और आकर्षण प्रदान कर सकता है। चरित्र (पात्र)- प्रत्येक कहानी में कुछ पात्र होते हैं जो कथानक के सजीव संचालक होते हैं। इनमें एक ओर कथानक का आरम्भ, विकास और अन्त होता है तो दूसरी ओर हम कहानी में इनसे आत्मीयता प्राप्त करते हैं। कहानी में मुख्य रूप से दो प्रकार के पात्र होते हैं, पहला वर्गगत अर्थात् जो अपने वर्ग की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, दूसरे व्यक्तिगत वे पात्र जिनकी निजी विशेषताएँ होती हैं। कहानी में पात्रों की संख्य...
निबन्ध 'निबन्ध' शब्द नि+बन्ध से बना है, जिसका अर्थ अच्छी तरह बंधी हुई परिमार्जित प्रौढ़ रचना से है। निबंध अपने आधुनिक रूप में 'ऐसे (ESSAY)' शब्द का पर्याय है। अंग्रेजी में इसका अर्थ है प्रयत्न, प्रयोग अथवा परीक्षण अभिप्राय यह है कि किसी विषय का भली-भाँति प्रतिपादन करना या परीक्षण करना निबंध कहा जाता है। बाबू गुलाबराय के अनुसार — 'निबंध उस गद्य रचना को कहते हैं, जिसमें एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छंदता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।' डॉ. लक्ष्मीनारायण वार्ष्णेय 'निबन्ध से तात्पर्य सच्चे साहित्यिक निबंधों से है, जिनमें लेखक अपने-आपको प्रकट करता है विषय को नहीं। विषय तो केवल बहाना मात्र होता है।' निबन्ध गद्य की सर्वोत्तम विधा है-'गद्यं कवीनां निकषं वदन्ति'- संस्कृत की इस प्रसिद्ध उक्ति का विस्तार कर आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने कहा- "यदि गद्य कवियों की कसौटी है तो निबन्ध गद्य की कसौटी है।" गद्यकार की रचनात्मक क्षमता एवं प्रतिभा की पहचान निबंध रचना से ही संभ...
बलबन दिल्ली सल्तनत का ऐसा पहला शासक था जिसने सुल्तान के पद और अधिकारों के बारे में विस्तृत रूप में विचार प्रकट किए। उसने सुल्तान की प्रतिष्ठा को स्थापित करने के लिए ‘रक्त एवं लौह की नीति’ अपनाई। बलबन के राजत्व सिद्धांत की दो मुख्य विशेषताएं थीं- 1. सुल्तान का पद ईश्वर के द्वारा प्रदान किया हुआ होता है और उसके आदेशों का उल्लंघन ईश्वर के आदेशों का उल्लंघन है। 2. सुल्तान का निरंकुश होना आवश्यक है। बलबन के अनुसार ‘सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि (नियामत-ए-खुदाई) है और उसका स्थान केवल पैगम्बर के पश्चात् है। सुल्तान को कार्य करने की प्रेरणा और शक्ति ईश्वर से प्राप्त होती है। इस कारण जनसाधारण या सरदारों को उसके कार्यों की आलोचना करने का अधिकार नहीं है।’ बलबन अपने को ‘फिरदौसी के शाहनामा’ में वर्णित ‘अफरासियाब वंशज’ तथा शासन को ईरानी आदर्श के रूप में सुव्यवस्थित किया। उसने पुत्र बुगरा खां से कहा था कि, ‘सुल्तान का पद निरंकुशता का सजीव प्रतीक है।’ बलबन अपने अधिकारियों से यह आशा करता था कि वे ईमानदार, न्यायप्रिय और धर्मपरायण हों। इसी कारण बलबन न केवल सुल्तान अपितु सम्प...
Hindi Upanyas ka udbhav evam vikas उपन्यास हिंदी गद्य की एक आधुनिक विधा है। इस विधा का हिंदी में प्रादुर्भाव अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव स्वरूप हुआ । लेकिन इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि इससे पहले भारत में उपन्यास जैसी विधा थी ही नहीं। उपन्यास विधा का उद्भव और विकास पहले यूरोप में हुआ। बाद में बांग्ला साहित्य के माध्यम से यह विधा हिंदी साहित्य में आयी। हिंदी का पहला उपन्यास Hindi ka pahala Upanyas kaunasa hai लाला श्रीनिवास दास का 'परीक्षा गुरु' (1888) इंशा अल्ला खां द्वारा रचित 'रानी केतकी की कहानी' तथा श्रद्धा राम फिल्लौरी कृत 'भाग्यवती' आदि कुछ ऐसी रचनाएं हैं जिन्हें हिंदी का प्रथम उपन्यास माना जाता है। आज अधिकांश विद्वान लाला श्रीनिवास दास कृत 'परीक्षा गुरु' को हिंदी का प्रथम उपन्यास स्वीकार करते हैं। हिंदी उपन्यास के विकास क्रम का अध्ययन करने के लिए इसे तीन भागों में बांटा जा सकता है- प्रेमचंद पूर्व हिंदी उपन्यास प्रेमचंदयुगीन हिुदी उपन्यास और प्रेमचंदोत्तर हिंदी उपन्यास। यह भी पढ़ें आदिकालीन हिन्दी साहित्य की प्रवृत्तियां रीतिकालीन काव्य...
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