DivanshuGeneralStudyPoint.in
  • Home
  • Hindi
  • RPSC
  • _Economy
  • _Constitution
  • _History
  • __Indian History
  • __Right Sidebar
  • _Geography
  • __Indian Geography
  • __Raj Geo
  • Mega Menu
  • Jobs
  • Youtube
  • TET
Home

राजस्थान में सहकारी समितियों के प्रकार और उनके कार्य

byDivanshuGS -March 17, 2026
0

 

Rajasthan mein Sahkari Samitiyon

राजस्थान में सहकारिता

सहकारिता: दार्शनिक आधार और मूल मंत्र

सहकारिता केवल एक आर्थिक प्रणाली नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में रची-बसी एक जीवन पद्धति है। इसका वैचारिक मूल ऋग्वेद के उस शाश्वत संदेश में निहित है जो सामूहिक चेतना की बात करता है: 'संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्...' अर्थात "हम सभी साथ मिलकर चलें, मिलकर बोलें और सभी के मन एक समान हों।" यह दर्शन व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के हित में संगठित होने की प्रेरणा देता है।

सहकारी आंदोलनों का रणनीतिक महत्व उनके मूल मंत्रों में स्पष्ट है:

  • आदर्श वाक्य: "एक सब के लिए- सब एक के लिए"। यह नारा बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति और आर्थिक शोषण के अंत का मार्ग प्रशस्त करता है, ताकि प्रत्येक सदस्य को उसके श्रम का उचित मूल्य मिले।
  • सहकार से समृद्धि: वर्तमान सरकार द्वारा 'सहकार से समृद्धि' के विजन के तहत पिछले चार वर्षों में 100 से अधिक क्रांतिकारी पहलें की गई हैं। इसमें पैक्स (PACS) का कंप्यूटरीकरण और उन्हें बहुउद्देशीय बनाना प्रमुख है।

संयोजक वाक्य: सहकारिता के इन दार्शनिक आदर्शों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य में 20वीं शताब्दी के प्रारंभ से ही एक सुव्यवस्थित ऐतिहासिक यात्रा का सूत्रपात हुआ।

--------------------------------------------------------------------------------

राजस्थान में सहकारी आंदोलन का उद्भव और ऐतिहासिक विकास 

 pratham sahakari samiti

मरुस्थलीय प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में किसानों और श्रमिकों को साझा शक्ति का बोध कराने के लिए सहकारिता एक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में उभरी।

ऐतिहासिक मील के पत्थर:

  • 1904 (अजमेर): राज्य में ग्रामीण आर्थिक विकास हेतु प्रथम औपचारिक प्रयास।
  • 1904 (डीग, भरतपुर): राज्य के प्रथम सहकारी कृषि बैंक की स्थापना, जिसका उद्देश्य किसानों को साहूकारों के ऋण जाल से बचाना था।
  • भिनाय (अजमेर): लगभग इसी समय (20वीं सदी के प्रारंभ में) राज्य की प्रथम सहकारी समिति की स्थापना भिनाय में हुई।
  • भरतपुर रियासत की अग्रणी भूमिका: रियासती काल में भरतपुर राज्य पहला ऐसा क्षेत्र था जिसने अपना स्वयं का सहकारिता अधिनियम बनाकर संस्थाओं को कानूनी और औपचारिक ढांचा प्रदान किया।

संयोजक वाक्य: इस ऐतिहासिक नींव ने स्वतंत्रता के पश्चात राज्य में एक सुदृढ़ और पारदर्शी कानूनी तंत्र की आवश्यकता को जन्म दिया।

--------------------------------------------------------------------------------

कानूनी ढांचा और अधिनियम (Legal Framework) 

सहकारी संस्थाओं के लोकतांत्रिक संचालन और स्थायित्व के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचे का होना अनिवार्य है।

  • राजस्थान सहकारी समिति विधेयक 1953: स्वतंत्रता के बाद राज्य का पहला औपचारिक सहकारी कानून।
  • वर्तमान अधिनियम: 'राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001', जिसे 10 नवंबर 2002 से संपूर्ण राज्य में प्रभावी किया गया।
  • प्रस्तावित नवीन अधिनियम: मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में वर्तमान सरकार प्रक्रियाओं के सरलीकरण और अनियमितताओं पर नियंत्रण हेतु एक 'नवीन सहकारी अधिनियम' लाने की दिशा में अग्रसर है। इसका उद्देश्य कानून को अधिक प्रासंगिक बनाना और सहकारी तंत्र पर 'आमजन का विश्वास' सुदृढ़ करना है।

संयोजक वाक्य: सुदृढ़ कानूनों के संरक्षण में राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु एक सुव्यवस्थित बैंकिंग संरचना का विकास हुआ।

--------------------------------------------------------------------------------

शीर्ष सहकारी बैंकिंग और ऋण संस्थाएं 

राजस्थान में सहकारी ऋण का ढांचा त्रिस्तरीय (Three-tier) है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह को सुनिश्चित करता है:

  1. शीर्ष स्तर: राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (Apex Bank)
  2. जिला स्तर: केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB)
  3. ग्राम स्तर: प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS)
  • राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (Apex Bank):
    • स्थापना: 14 अक्टूबर 1953।
    • संरचना: इसके कुल 41 सदस्य हैं और यह 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से राज्यभर में सेवाएं देता है।
    • ज्ञान सागर योजना: उच्च शिक्षा हेतु विद्यार्थियों को भारत में ₹25 लाख और विदेश में ₹40 लाख तक का ऋण। यह योजना ट्यूशन फीस, रहने और अन्य खर्चों का 90% तक कवर करती है (ब्याज दर: 8% से 8.75%)।
  • राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक: यह एक संघीय ढांचे के रूप में कार्य करता है, जो किसानों और लघु उद्यमियों को कृषि विकास एवं निवेश हेतु दीर्घकालिक ऋण प्रदान करता है।

संयोजक वाक्य: वित्तीय सहायता के साथ-साथ, किसानों की उपज के विपणन और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विशिष्ट संघों का गठन किया गया।

--------------------------------------------------------------------------------

प्रमुख सहकारी संघ और उनके कार्यक्षेत्र (Marketing & Consumer Sector) 

कृषि और उपभोक्ता क्षेत्रों में सहकारिता ने उत्पादकों और खरीदारों के बीच एक सेतु का कार्य किया है।

  • राजफेड (RAJFED):
    • स्थापना: 26 नवंबर 1957 (राजस्थान सहकारी अधिनियम 1953 की धारा-13 के तहत)।
    • कार्य: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग, मूंगफली, उड़द, सोयाबीन, सरसों, चना और गेहूं की खरीद। साथ ही, गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और पशु आहार की आपूर्ति।
  • कॉनफैड (CONFED):
    • यह संस्था 'उपभोक्ताओं और उत्पादकों' के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करती है। यह महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देती है।
  • तिलम संघ: तिलहन प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से किसानों को संगठित कर ग्रामीण विकास में योगदान।
  • सहकारी मुद्रणालय (जयपुर): स्थापना 1960; यह सहकारी और सरकारी विभागों के दस्तावेजीकरण और प्रचार सामग्री हेतु प्रशासनिक सहयोग प्रदान करता है।

संयोजक वाक्य: विपणन के इन सफल मॉडलों के समानांतर, डेयरी क्षेत्र ने राजस्थान में श्वेत क्रांति का नया अध्याय लिखा।

--------------------------------------------------------------------------------

डेयरी सहकारिता और शैक्षिक संस्थान 

राजस्थान की डेयरी सहकारिता ने 'सरस' ब्रांड के माध्यम से पशुपालकों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है।

  • राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF):
    • विकास यात्रा: 1975 में राजस्थान राज्य डेयरी विकास निगम (RSDDC) के पंजीकरण के बाद, 1977 में RCDF की स्थापना हुई।
    • कानूनी स्थिति: यह राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1965 के तहत संचालित होती है। यह 'ऑपरेशन फ्लड' के क्रियान्वयन के लिए राज्य की केंद्रीय संस्था है।
  • राइसेम (RICEM):
    • यह संस्थान सहकारी क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और आधुनिक प्रबंधकीय तकनीकों के माध्यम से मानव संसाधन का विकास करता है। इसका मुख्य लक्ष्य प्रशिक्षुओं में एक 'व्यावसायिक दृष्टिकोण' (Professional Outlook) विकसित करना है।

संयोजक वाक्य: इन स्थापित प्रणालियों को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए वर्तमान में विकेंद्रीकृत और बहुउद्देशीय मॉडल अपनाए जा रहे हैं।

--------------------------------------------------------------------------------

आधुनिक पहल: एम-पैक्स (M-PACS) और विकेंद्रीकृत भंडारण 

भविष्य की सहकारिता को 'बहुउद्देशीय' बनाने हेतु ग्रामीण स्तर पर बुनियादी ढांचे में निवेश किया जा रहा है।

  • एम-पैक्स (Multipurpose PACS):
    • यह पैक्स का उन्नत स्वरूप है जो ऋण के साथ-साथ खाद-बीज आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाएं प्रदान करता है।
    • सदस्यता: 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी कृषक, पशुपालक या दस्तकार ₹100 का शेयर खरीदकर इसका 'ए' श्रेणी (A-Category) का सदस्य बन सकता है।
  • विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना: पैक्स स्तर पर गोदामों का निर्माण किया जा रहा है ताकि किसानों को अपनी उपज घर के पास भंडारित करने की सुविधा मिले।
  • सहकार सदस्यता अभियान: नवीन अधिनियम के प्रावधानों और सदस्यता वृद्धि हेतु 2 से 22 अक्टूबर तक विशेष अभियान संचालित किया गया।

--------------------------------------------------------------------------------

परीक्षा हेतु त्वरित संदर्भ तालिका (Quick Reference Table)

संस्थान/घटना

तिथि/वर्ष

मुख्यालय/विशेष तथ्य

प्रथम सहकारी कृषि बैंक

1904

डीग (भरतपुर)

प्रथम सहकारी समिति

1904 (लगभग)

भिनाय (अजमेर)

राजस्थान राज्य सहकारी बैंक

14 अक्टूबर 1953

जयपुर (41 सदस्य, 3-स्तरीय ढांचा)

राजफेड (RAJFED)

26 नवंबर 1957

1953 अधिनियम की धारा-13 के तहत स्थापित

सहकारी मुद्रणालय

1960

जयपुर (प्रशासनिक मुद्रण सेवा)

RCDF (Saras)

1977

1965 अधिनियम के तहत पंजीकृत

सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001

10 नवंबर 2002

वर्तमान में प्रभावी कानून

सहकार सदस्यता अभियान

2-22 अक्टूबर

नवीन अधिनियम जागरूकता एवं सदस्य वृद्धि

एम-पैक्स (M-PACS)

-

₹100 शेयर पर 'ए' श्रेणी सदस्यता

ज्ञान सागर योजना

-

90% खर्च कवर (शिक्षा ऋण)

  • Facebook
  • Twitter
You may like these posts
Post a Comment (0)
Previous Post Next Post

Popular Posts

Hindi

हिंदी निबन्ध का उद्भव और विकास

मारवाड़ प्रजामण्डल

राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMDC)

Geography

Comments

Main Tags

  • Aaj Ka Itihas
  • Bal Vikas
  • Computer
  • Earn Money

Categories

  • BSTC (2)
  • Bharat_UNESCO (1)
  • Exam Alert (30)

Tags

  • Biology
  • Haryana SSC
  • RAS Main Exam
  • RSMSSB
  • ras pre

Featured post

राजस्थान में सहकारी समितियों के प्रकार और उनके कार्य

DivanshuGS- March 17, 2026

Categories

  • 1st grade (29)
  • 2nd Grade Hindi (6)
  • 2nd Grade SST (31)
  • Bal Vikas (1)
  • Current Affairs (141)
  • JPSC (5)

आगामी परीक्षाओं का सिलेबस पढ़ें

  • 2nd Grade Teacher S St
  • राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती एवं सिलेबस
  • भूगोल के महत्वपूर्ण टॉपिक
  • RAS 2023 सिलेबस
  • संगणक COMPUTER के पदों पर सीधी भर्ती परीक्षा SYLLABUS
  • REET के महत्वपूर्ण टॉपिक और हल प्रश्नपत्र
  • 2nd Grade हिन्दी साहित्य
  • ग्राम विकास अधिकारी सीधी भर्ती 2021
  • विद्युत विभाग: Technical Helper-III सिलेबस
  • राजस्थान कृषि पर्यवेक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2021 का विस्तृत सिलेबस
  • इतिहास
  • अर्थशास्त्र Economy
  • विज्ञान के महत्वपूर्ण टॉपिक एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्न
  • छत्तीसगढ़ राज्य सेवा प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा सिलेबस
DivanshuGeneralStudyPoint.in

About Us

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत एवं विश्व का सामान्य अध्ययन, विभिन्न राज्यों में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्थानीय इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, करेंट अफेयर्स आदि की उपयोगी विषय वस्तु उपलब्ध करवाना ताकि परीक्षार्थी ias, ras, teacher, ctet, 1st grade अध्यापक, रेलवे, एसएससी आदि के लिए मुफ्त तैयारी कर सके।

Design by - Blogger Templates
  • Home
  • About
  • Contact Us
  • RTL Version

Our website uses cookies to improve your experience. Learn more

Ok

Contact Form