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Wednesday, November 28, 2018

वाणिज्यवाद



  • इतिहासकार हेज के अनुसार ‘ वाणिज्यवाद, सरकार की आर्थिक नीति विशेष रूप से व्यापार एवं वाणिज्यवाद को नियमित करने की नीति को प्रदश्रित करता है।’
  • इस प्रकार राज्य द्वारा प्रवर्धित एवं निर्देशित व्यापार-वाणिज्य की विचारधारा को ‘वाणिज्यवाद’ कहा गया है।
  • वाणिज्यवाद के अन्तर्गत देश के राजकोष में अधिक से अधिक धन (स्वर्ण, चांदी) लाने की विचारधारा होती है, राष्ट्र की जनता के स्वस्थ एवं सम्पन्न होने की भी भावना इसमें निहित होती है ताकि युद्ध के अवसर पर राष्ट्र को योग्य व्यक्तियों की सेवायें प्राप्त हो सकें।
  • वाणिज्यवाद को फ्रांस में ‘कोलबर्टवाद’, जर्मनी में ‘केमरालिनवाद’ एवं इंग्लैण्ड में ‘व्यापारवाद’ के नाम से जाना जाता था।
  • वाणिज्यवाद के प्रमुख उद्देश्य थे -
  1. राष्ट्रीय समृद्धि
  2. राज्य की प्रतिष्ठा
  3. राज्य को स्वावलम्बी बनाना
  4. अन्य देशों की तुलना में अपने देश का व्यापार बढ़ाना
  5. देश को सैनिक रूप से शक्तिशाली बनाना
  • वाणिज्यवाद के लिए अभूतपूर्व सांस्कृतिक जागरण, जिसे पुनर्जारण के नाम से जाना जाता है, उत्तरदायी था।
  • धर्म सुधार आंदोलन ने वाणिज्यवाद का पथ प्रशस्त किया था।
  • मुद्रा के प्रचलन से व्यापार एवं वाणिज्य के क्षेत्र में व्यापकता आ गई।
  • नवीन देशों की खोज ने व्यापार को महत्व प्रदान किया।
  • नयी खानों व बैंकों क विकास ने विदेशी व्यापार को प्रोत्साहित किया था।
  • 16वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी के अन्त तक का 300 वर्षों का समय ‘वाणिज्यवाद का युग’ कहा गया हैं
  • प्रमुख वाणिज्यवादी विचारक थे -
  • सर टामस मन (इंग्लैण्ड) अंग्रेज - पुस्तक ‘England Treasure By Foreign Trade’ वाणिज्यवाद की गीता कहलाती है।
  • एण्टेनिओ सैरा (इटालियन) 
  • जीन बैपटिस्ट कोलबर्ट (फ्रांस) फ्रेंच

  • वाणिज्यवादियों ने राजनीतिक एकता एवं राष्ट्रीयता के विचार प्रस्तुत किये थे।
  • वाणिज्यवादियों का नारा था - अधिक स्वर्ण, अधिक धन एवं अधिक शक्ति।
  • विलियम पैटी के अनुसार - व्यापार का अन्तिम लक्ष्य सोना व चांदी प्राप्त करना है। यह न तो नाशवान है और न ही परिवर्तनशील। ये प्रत्येक स्थान व समय पर उपयोगी हैं और प्रत्येक स्थिति में सम्पत्ति है।’
  • वाणिज्यवादियों ने अनुकूल व्यापाराधिक्य पर बहुत बल दिया; उनके अनुसार इसक लिये विदेशों में निर्मित वस्तुओं के आयात पर अधिक शुल्क होना चाहिए। आयात की गई वस्तुओं के बदले में वस्तुओं को ही निर्यात करना चाहिए न कि सोने व चांदी का इस प्रकार निर्यात को बढ़ाकर व्यापार को अपने पक्ष में करना चाहिए।
  • वाणिज्यवादियों ने उद्योगों एवं यातायात के साधनों के विस्तार पर बल दिया।
  • वाणिज्यवादियों ने कृषि उत्पादन को कच्चे माल का प्रमुख स्रोत स्वीकार किया था अतः कृषि के विस्तार पर बल दिया।
  • इंग्लैण्ड में वाणिज्यवाद का विकास करने का श्रेय महारानी एलिजाबेथ को है। स्टुअर्ट वंश के राजाओं तथा ओलिवर क्रामवेल ने भी वाणिज्यवाद के विकास में योगदान किया। 
  • नेवीगेशन अधिनियमों ने वाणिज्यवाद को आगे बढ़ाया था।
  • वाणिज्यवाद के पतन में एडम स्मिथ का महत्त्वपूर्ण योगदान था।
  • वाणिज्यवादियों ने व्यापार को प्रथम, उद्योग को द्वितीय एवं कृषि को तृतीय स्थान दिया था।

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