Sunday, November 5, 2017

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रमुख व्यक्ति Bharatiy

निम्न पर टिप्पणी लिखिए-


भाई परमानंदः-

भाई परमानंद पंजाब के प्रमुख आर्यसमाजी नेता तथा अमेरिका की गदर पार्टी के प्रमुख कर्त्ताधर्त्ताओं में से थे। उन्हें लाहौर षड्यंत्र केस में आजीवन कारावास की सजा हुई। 1933 में वे हिन्दू महासभा अजमेर अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गए।


डॉ. सत्यपालः-

डॉ. सत्यपाल पंजाब के राष्ट्रवाद नेता थे। माइकल ओ. डायर ने इन्हें 9 अप्रैल, 1919 को सैफुद्दीन किचलू के साथ गिरफ्तार किया। जिसके परिणामस्वरूप इनकी गिरफ्तारी के विरोध में जलियावाला बाग में सभा हो रही थी, जिस पर डायर ने गोलियां बरसाई एवं नरसंहार को अंजाम दिया।


वासुदेव बलवंत फडकेः-

वासुदेव फडके का जन्म 1825 में महाराष्ट्र के कुलावा जिले में हुआ। उन्होंने 1879 में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र आंदोलन आरंभ किया। वस्तुतः उन्हें भारतीय इतिहास में सशस्त्र राष्ट्रवाद का जनक कहा जा सकता है।


जॉर्ज यूलः-

जॉर्ज यूल पहला अंग्रेज था, जिसने 1888 में इलाहाबाद के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चतुर्थ अधिवेशन की अध्यक्षता की। वे गैर सरकारी अंग्रेज व्यापारी थे जो भारत की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं से सहानुभूति रखते थे।


एन.सी. केलकरः-

न्रसिंह चिंतामणि केलकर तिलक के निकट सहयोगी थे। इन्होंने मराठा तथा केसरी नामक समाचार पत्रों का संपादन भी किया। केलकरजी मुंबई प्रांतीय सभा के अध्यक्ष तथा केन्द्रीय विधानसभा के सदस्य एवं कांग्रेस कार्यकारिणी समिति के सदस्य भी रहे।


सी.एफ. एंड्रयूजः- 

चार्ल्स फ्रीयर एंड्रयूज ईसाई धर्म प्रचारक तथा सेंट स्टीफेंस कॉलेज दिल्ली के प्राध्यापक थे। मजदूरों से गहरा लगाव था। 1925 तथा 1927 में ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। महात्मा गांधी ने इन्हें ‘दीनबंधु’ की उपाधि से सम्मानित किया।


भारतेन्दु हरिश्चन्द्रः-

आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रवर्तक भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने न केवल उत्कृष्ट साहित्य की रचना की, बल्कि अपने साहित्य के द्वारा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी। भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, स्कंदगुप्त तथा चन्द्रगुप्त उनके प्रमुख नाटक है।


राजगोपालाचारीः-

ये भारतीय राजनीतिज्ञ थे इनका जन्म दक्षिण भारत में 1879 में हुआ। स्वतंत्रता पूर्व तथा स्वतंत्रोपरांत दो बार मद्रास प्रांत के मुख्यमंत्री रहे। 1944 मे प्रस्तुत भारत विभाजन के लिए अपने फार्मूले के लिए प्रसिद्ध हुए।


श्यामजी कृष्ण वर्मा:-

श्यामजी पहले क्रांतिकारी थे, जिन्होंने विदेशों में क्रांतिकारी क्रियाकलाप आरंभ किये। इनका जन्म गुजरात में कठियावाड़ में हुआ था। लंदन से वैरिस्टरी पास की। 1905 में लंदन में इण्डिया होमरूल सोयायटी की स्थापना की तथा इण्डियन सोशियोलाजिस्ट नमाक पत्र निकाला।


रानी गैडिनल्यूः-

रानी गैडिनल्यू नागाओं की रानी थी। उसने यदुनाग के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया। 17 अक्टूबर, 1932 को गिरफ्तारी के बाद स्वतंत्रता प्राप्ति तक इन्हें जेल में रखा।


खान अब्दुल गफ्फार खांः- 

इनका जन्म उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत के पेशावर जिले में हुआ था। ये राष्ट्रवादी मुसलमान थे। इन्होंने खिलाफत , असहयोग तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया। इन्हें ‘सीमांत गांधी’ और ‘बादशाह खां’ आदि नामों से भी जाना जाता है।


सेठ जमनालाल बजाजः-

ये मानवतावादी विचारक थे। भारत के प्रति ब्रिटिश सरकार की नीति के विरोध में इन्होंने ‘रायबहादुर’ की उपाधि त्याग दी। ये लम्बे समय तक कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे तथा गांधी सेवा संघ के संस्थापक सदस्य भी थे।


एस. सत्यमूर्तिः-

सुप्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता जिन्हें ‘दक्षिण भारत की मशाल’ के नाम से जाना जाता है। इन्होंने सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। 1943 में नजरबंदी के दौरान जेल में ही इनकी मृत्यु हो गई।


उधम सिंहः-

उधम सिंह पंजाब के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे। इन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए मार्च 1940 में लंदन में जनरल डायर की हत्या कर दी। फलस्वरूप इन्हें गिरफ्तार कर मृत्युदंड दे दिया गया।


सरोजिनी नायडूः-

सरोजिनी नायडू प्रख्यात कवयित्री तथा राष्ट्रवादी नेता थी। 1925 में कानपुर में कांग्रेस की प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष बनीं। उन्होंने कई बार जेल की यात्रा की। 1947-48 में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल भी रहीं।

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