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Monday, August 21, 2017

रणथम्भौर दुर्ग



राजस्थान के सवाई माधेपुर जिले के निकट स्थित यह दुर्ग अरावली पर्वत की दुर्गम आकृति वाली सात पहाडि़यों से घिरा हुआ है। यह दुर्ग चारों और से घने जंगलों (रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान) से घिरा हुआ है तथा इसकी किलेबन्दी काफी सुदृढ़ है। इसलिए अबुल फ़ज़़ल ने इसे बख्तरबंद किला कहा है। 

हम्मीर देव चौहान की आन-बान का प्रतीक रणथम्भौर दुर्ग पर अलाउद्दीन खिलजी ने 1301 में आक्रमण किया था। हम्मीर विश्वासघात के परिणामस्वरूप लड़ता हुआ वीरगति से प्राप्त हुआ तथा उसकी पत्नी रंगादेवी ने जौहर कर लिया। यह जौहर राजस्थान के इतिहास का प्रथम जौहर माना जाता है।


रणथम्भौर किले में बने हम्मीर महल, हम्मीर की कचहरी, सुंपारी महल, बादल महल, बत्तीस खंभों की छतरी, जैन मंदिर तथा त्रिनेत्रा गणेश मंदिर उल्लेखनीय है। गणेश मंदिर की विशेष मान्यता है।

महत्त्वपूर्ण बिन्दुः


. निर्माण - इस दुर्ग का निर्माण 8वीं शताब्दी के लगभग, अजमेर के चौहान शासकों ने करवाया।
. हम्मीर की आन, बान व शान का प्रतीक।
. एरण दुर्ग, गिरि दुर्ग
. अबुल फजल-‘‘बाकी सब दुर्ग नगें केवल यही दुर्ग है जो बख्तर बन्द है।’’

. दर्शनीय स्थल-त्रिनेत्र गणेश मन्दिर, रणतभंवर के लाडला,

त्रिपोलिया दरवाजा (अंधेरी दरवाजा)
हम्मीर महल, रानी महल, हम्मीर की कचहरी, सुपारी महल (इसमें मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर बने है),
बादल महल, जौरा-भौरा (अनाज के गोदाम), पीर सदरूद्दीन की दरगाह, लक्ष्मीनारायण मंदिर, पदमला तालाब, नौलखा दरवाजा, रनिहाड तालाब।
32 खंभों की छतरी हम्मीर ने अपने पिता जयसिंह ;जैत्रासिंहद्ध के 32 वर्षों के शासन काल की याद मे बनवाई।
. अकबर ने जगन्नाथ कच्छवाह को जागीर में दे दिया। मुगल काल में शाही कारागर के रूप में उपयोग।
. जयपुर के सवाई माधोसिंह प्रथम ने सामंत अनूपसिंह खंगारोत के प्रयासों से दुर्ग को जयपुर में मिला दिया जो एकीकरण तक रहा।
. अकबर ने शाही टकसाल स्थापित की।
 राव हम्मीर के सेनापति रणमल एवम् रतिपाल थे। यह किला राजस्थान में रक्षा, सुरक्षा की दृष्टि से
सर्वश्रेष्ठ किला है।
रणथम्भोर के चौहान वंश के संस्थापक गोविंद राज थे।
हम्मीर महाकाव्य-नयनचंद्रसूरि
हम्मीर रासो, हम्मीर हठ- जोधराज
अल्लाउद्दीन ने रणथम्भोर पर आक्रमण अपने मंगोल विद्रोही मोहम्मद शाह को प्राप्त करने के लिए किया था। राजस्थान का राष्ट्रीय उद्यान घोषित होने वाला प्रथम क्षेत्र रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान था।
प्रसिद्ध काला-गौरा भैरव मंदिर भी सवाई माधोपुर में स्थित है।
रणथंभोर दुर्ग को वर्ष 2013 में  यूनेस्कों की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में रणथंभोर में सफारी पार्क को मंजूरी दे दी है।

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