अरावली ग्रीन वॉल परियोजना देश के किन राज्यों में चलाई जा रहा है?


 

Aravalli Green Wall project


केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, श्री भूपेंद्र यादव ने 25 मार्च, 2023 को हरियाणा के टिकली गांव में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाने के लिए आयोजित एक समारोह में चार राज्यों में अरावली पर्वत श्रृंखला के आसपास के 5 किलोमीटर के बफर क्षेत्र को हरा-भरा करने की एक प्रमुख पहल, अरावली ग्रीन वॉल परियोजना का शुभारंभ किया।


अरावली ग्रीन वॉल परियोजना के तहत गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में 1,400 किमी लम्बाई में और लगभग 64.5 लाख हेक्टेयर भूमि को शामिल करते हुए 5 किलोमीटर चौड़ा 'हरित पट्टी बफर जोन' स्थापित करना है, जिसके भीतर की लगभग 42 फीसदी (27 लाख हेक्टेयर) भूमि बंजर है। 


इस योजना के तहत करोड़ों पेड़ लगाए जाएंगे। जिससे मरुस्थलीकरण की रफ्तार पर रोक लगाई जा सकेगी। मृदा स्वास्थ्य सुधार, भूजल, पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण के साथ यह प्रदूषण को भी कम करने में कारगर साबित होगा। 


अरावली की पहाड़ियां चंबल, साबरमती और लूनी जैसी महत्वपूर्ण नदियों का स्रोत हैं। 

इसके जंगलों, घास के मैदानों और आर्द्रभूमि में लुप्तप्राय पौधों और जानवरों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके कुल अवक्रमित क्षेत्र का 81 प्रतिशत राजस्थान में, 15.8 प्रतिशत गुजरात में, 1.7 प्रतिशत हरियाणा में और 1.6 प्रतिशत दिल्ली में है। 


परियोजना के अंतर्गत होने वाले कार्य

 

इस प्रोजेक्ट से स्थानीय पेड़-पौधे लगाकर अरावली रेंज में जैव विविधता और पारिस्थितिकी को बेहतर किया जाएगा। 

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अनुकूल वातावरण विकसित करने के साथ ही तालाबों, झीलों और झरनों जैसे सतही जल निकायों का पुनरुद्धार और जीर्णोद्धार करना शामिल होगा। 

वनरोपण, कृषि-वानिकी और जल संरक्षण गतिविधियों में स्थानीय समुदायों को शामिल करके सतत विकास और उनकी आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को आय, रोजगार, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक लाभ के नए अवसर उत्पन्न होंगे।


परियोजना में राजस्थान की भूमिका


राजस्थान सरकार ने 2025-26 के बजट में हरित अरावली विकास परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। 

राजस्थान के अलवर, भरतपुर, अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा, जयपुर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं, डूंगरपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, पाली, सिरोही, राजसमंद, करौली और सवाई माधोपुर सहित कुल 19 जिले इस बहुराज्यीय परियोजना में शामिल हैं। 


राजस्थान का 62.06 प्रतिशत हिस्सा मरुस्थलीकरण से गुजर रहा है, हर साल राज्य में थार का विस्तार हरियाणा व दिल्ली की तरफ बढ़ रहा है। इस बढ़ते मरुस्थलीकरण को रोकने में यह परियोजना बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। 

साथ ही भूमि क्षरण को कम करने, मिट्टी के कटाव को रोकने व धूलभरी आंधियों को निष्प्रभावी करने में भी यह लाभकारी रहेगी। 


अफ्रीका की तर्ज पर हो रहा काम


2007 में अफ्रीका में ग्रीन वॉल परियोजना की शुरुआत हुई जिसके तहत लगभग 8,000 किलोमीटर लम्बाई में पूरे अफ्रीका को दो भागों में बांटते हुए एक प्राकृतिक दीवार बनाई जा रही है, जो कि 11 अफ्रीकी देशों से होकर गुजर रही है। भारत का ये प्रोजेक्ट इसी से प्रेरित है। 



उद्देश्य 


मरुस्थलीकरण से निपटने और थार रेगिस्तान के पूर्व की ओर फैलाव को रोकना


जैव विविधता को बहाल करना 

भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना

कार्बन सिंक के रूप में कार्य करना, जो वायु प्रदूषण से निपटने में भी मदद करता है


मुख्य विशेषताएं


क्षरित भूमि पर देशी प्रजातियों का रोपण और जल निकायों का जीर्णोद्धार

अफगानिस्तान और पा​किस्तान से आने वाली शुष्क हवाओं को रोकना व धूल के तूफानों के विरुद्ध प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करना।

क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करना।

शहरीकरण और पत्थर खनन द्वारा अरावली में बनाए गए विशाल अंतराल को भरना।

स्थानीय समुदायों को खेती और कृषि वानिकी के आस-पास आजीविका के अवसर प्रदान करना।


हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली के 29 जिलों को कवर करता है।


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