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Wednesday, December 19, 2018

राष्ट्रपति के क्षमादान का अधिकार


  • विश्व के अन्य संविधानों की भांति भारत के संविधान ने भी कार्यपालिका के प्रमुख को ऐसे व्यक्तियों को क्षमादान करने का अधिकार दिया है -
  1. जिनके किसी अपराध के लिये न्यायालय ने विधिवत दण्ड दिया हो,
  2. उन सभी मामलों में, जिनमें कोर्ट मार्शल द्वारा दण्ड दिया गया हो, तथा
  3. उन सभी मामलों में जहां मृत्य दण्ड दिया गया हो।
राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति में निम्नलिखित हैं:
क्षमा -
  • किसी व्यक्ति को अपराध के लिए दिया गया दण्ड पूरी तरह समाप्त हो जाता है तथा वह व्यक्ति सभी दण्ड आरोपों तथा निरर्हताओं से मुक्त हो जाता है।

लघुकरण - 
  • इसमें व्यक्ति को दिये गये दंड को हल्के दंड में परिवर्तित कर दिया जाता है।
  • उदाहरण के लिए मृत्युदण्ड को निर्वासन, निर्वासन को कठोर कारावास, कठोर कारावास को सादा कारावास तथा सादा कारावास को जुर्माना में परिवर्तित कर दिया जाता है।

परिहार -
  • इसके अंतर्गत दंडादेश की प्रकृति को बदले बिना उसे कम किया जा सकता है जैसे कारावास के समय को ही कम कर दिया जाये।
  • डदाहरण के लिए 6 वर्ष के कारावास को एक वर्ष के कारावास में बदल दिया जाये।

विराम -
  • इसके अंतर्गत किसी परिस्थिति को देखते हुये दंड की किसी कार्यवाही को समाप्त कर देना अथवा कम कड़े दंड का आदेश देना।
  • उदाहरण के लिए अपराधी गर्भवती स्त्री का दंड कम करना।

प्रविलम्बन -
  • इसका अर्थ है किसी परिस्थिति के कारण अपराधी को दिये दंड का पालन करने से रोकना। 
  • यह केवल दंड का पालन करने में विलंब करने के लिए किया जाता है।

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