- बंगाल के स्वदेशी आंदोलन ने समाज के उस बड़े तबके में राष्ट्रीयता की चेतना का संचार किया, जो उससे पहले राष्ट्रीयता के बारे में अनभिज्ञ था। इस आंदोलन ने जनमत तैयार करने के नये तरीके ईजाद किये।
- अब मांग-पत्रों, प्रस्तावों, सार्वजनिक सभाओं एवं प्रदर्शनों को अपर्याप्त समझा जाने लगा और सामान्य जन की भावनाओं की तीव्रता स्वदेशी और बहिष्कार जैसे सकारात्मक उपायों द्वारा प्रकट होने लगे। ब्रिटिश वस्तुओं की होली जलाना और भारतीय उत्पादों और संस्थाओं के उपयोग अब आम हो गये।
- स्वदेशी आंदोलन में युवकों, स्त्रियों, मुसलमानों और आम जनता की बढ़-चढ़कर भागीदारी रही। इस तरह राष्ट्रीय आंदोलन मुट्ठी भर पढ़े-लिखे लोगों और बुद्धिजीवियों का आंदोलन नहीं रह गया, वरन इसने जन आंदोलन का रूप ले लिया।
- राष्ट्रीय राजनीति में उदारवादी नेतृत्व अब अप्रासंगिक होने लगा और उग्रवादी नेता प्रभावशाली एवं महत्त्वपूर्ण बनकर उभरे। स्वदेशी एवं स्वराज की बंगाल से उठी गूंज अब देश के अधिकांश भागों में सुनायी पड़ने लगी। यही संघर्ष भावी राष्ट्रीय आंदोलन की नींव बना।
बंगाल में स्वदेशी आंदोलन ने किस प्रकार राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया?
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