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देशी ब्रांड के रूप में उभर रहा है लवाण का दरी उद्योग



  • राजस्थान के दौसा जिले की लवाण उपखण्ड़ अपने दरी उद्योग के लिए राजस्थान ही नहीं भारत में भी अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। यहां का दरी उद्योग दिनोंदिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।
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  • लवाण में दरी उद्योग काफी समय से यहां के स्थानीय लोगों की आजीविका का स्रोत रहा है जो देश के विभिन्न क्षेत्र से आये कामगार को रोज़गार दे रहा है।
  • अगर इस उद्योग को सरकार का संरक्षण प्राप्त हो जाये तो यह उद्योग अपनी कारीगरी का लोहा देश ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर भी मनवाने का हुनर रखता है। यहां के लोगों कठोर मेहनत और इस उद्योग के प्रति समर्पण ही इसकी उन्नति को दर्शाता है और आज यह उद्योग यहां पर काफी फला-फूला हैं। 
  • यह कस्बा दौसा ज़िले से लगभग 28 किमी दूरी पर हैं यहां का आधारभूत ढांचा पूरी तरह अच्छा नहीं हैं। रोड़ टूटी-फूटी है। कच्चा माल लाने व तैयार माल की सप्लाई में काफी तकलीफ होती है। 
  • दूसरा मार्ग जयपुर से आगरा रोड़ पर बस्सी से तुंगा की ओर जाने पर पड़ता है, लेकिन राजनीति के चलते यह रोड़ भी आधा-अधूरा ही रहता है। 
  • इन सब कमियों के बाद भी यहां के व्यावसायियों ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से इस उद्योग को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिला रहा है। इस दरी उद्योग में ऊन जूट, कॉटन दरी, कॉटन प्रिंट दरी, ऊन स्लिक फ्लॉवर कारपेट आदि कई वरायटियां बनाई जाती है।
  • सरकार से निवेदन है कि बढ़ते शहरीकरण को रोकने के लिए एवं इन बड़े शहरों पर जनसंख्या के बोझ और अपराध एवं बढ़ती यातायात की समस्याओं को रोकने के वास्ते इन छोटे कस्बों में पल रहे रोज़गारों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को रोजगार यही उपलब्ध करवाने के लिए यहां का आधारभूत ढांचा और इन व्यापारियों के समक्ष आने वाली बाधाओं को सुनकर इनके उद्योग को आर्थिक और सरकारी लाभ देने की कृपा करें। ताकि ये लोग भी अपने मजदूरों के जीवनस्तर को ऊंचा उठा सके।

मेरा साक्षात्कार जिनसे हुआ -
नाम - कर्णसिंह चन्देल
गांव - लवाण
जिला - दौसा, राजस्थान


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