इतिहास के महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी प्रश्न




पुरापाषाण काल

उपकरणों पर आधारित पुरापाषाण कालीन संस्कृति  के अवशेष सोहन नदी घाटी, बेलन नदी घाटी तथा नर्मदा नदी घाटी एवं भोपाल के पास भीमबेटका नामक स्थान से चित्रित शैलाश्रयों तथा अनेक चित्रित गुफाओं से प्राप्त हुआ है।
पुरापाषाण काल में हैण्ड-ऐक्स, क्लीवर और स्क्रैपर आदि विशिष्ट यंत्र प्राप्त हुए हैं।

मध्य पाषाण काल

इस काल में प्रयुक्त होने वाले उपकरण बहुत छोटे होते थे इसलिए इन्हें ‘माइक्रोलिथ’ कहते हैं।
इस काल में मध्य प्रदेश में आदमगढ़ और राजस्थान में बागोर से पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
इस काल में मानव की अस्थियों का पहला प्रारूप् प्रतापगढ़ (उ.प्र.) के सराय नाहर तथा महदहा नामक स्थान से प्राप्त हुआ हैं।


नवपाषाण काल

नवपाषाण काल इस युग की प्राचीनतम बस्ती पाकिस्तान में स्थित बलूचिस्तान प्रान्त में मेहरगढ़ में है।
मेहरगढ़ में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं।
इस काल में बुर्जहोम एवं गुफकराल कश्मीर से अनेक गर्तावास (गड्ढ़ाघर), अनेक प्रकार के मृद्भाण्ड एवं प्रस्तर व हड्डी के अनेक औजार प्राप्त हुए हैं।

बुर्जहोम से प्राप्त कब्रों में पालतू कुत्तों को मालिक के साथ दफनाया जाता था।
चिरांद (बिहार) नामक नवपाषाण कालीन पुरास्थल एकमात्र ऐसा पुरास्थल है, जहां से प्रचुर मात्रा में हड्डी के उपकरण मिले हैं। जो मुख्य रूप से हिरण के सींगों के हैं।
उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के निकट कोल्डिहवा एकमात्र ऐसा नवपाषणिक पुरास्थल है जहां से चावल का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
नवपाषाणिक पुरास्थल मेहरगढ़ से कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य एवं नवपाषाणिक प्राचीनतम बस्ती एवं कच्चे घरों के साक्ष्य मिले हैं।


उपनिषद्

1. इसका शाब्दिक अर्थ है ‘समीप बैठना’ अर्थात् गुरु के समीप बैठना
उपनिषद एक ऐसा रहस्य ज्ञान है जिसे गुरु के सहयोग से ही समझ सकते हैं
2. उपनिषदों में आत्मा-परमात्मा एवं संसार के सन्दर्भ में प्रचलित दार्शनिक विचारों का संग्रह मिलता है।
3. उपनिषदों की कुल संख्या 108 मानी गई है, किन्तु प्रमाणिक उपनिषद 12 हैं जिनमें ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, कौषीतकी, वृहदारण्यक, श्वेताश्वर आदि प्रमुख हैं।
भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ मुण्डकोपनिषद से लिया गया है। इस उपनिषद में यज्ञ की तुलना टूटी नाव से की गई है।
चारों आश्रमों के बारे में सर्वप्रथम जानकारी जाबालोपनिषद् से मिलती है। ये चार आश्रम हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास।
ऋग्वेद में आर्यों के पांच कबीले के होने की वजह से उन्हें पंचजन्य कहा गया है। ये थे- अनु, द्रुह्य, पुरु, तुर्वस तथा यदु।
भरतवंश के राजा सुदास तथा अन्य दस राजा अनु, द्रुह्य, पुरु, तुर्वस तथा यदु, अकिन, पक्थ, भलानस, विषाणी और शिव के मध्य दशराज युद्ध परुष्णी नदी (रावी नदी) के किनारे लड़ा गया, जिसमें सुदास की विजय होती है। इसका उल्लेख ऋग्वेद के 7वें मण्डल में मिलता है।
उत्तर वैदिक काल में मूर्तिपूजा आरम्भ हुई
यम और नचिकेता और उनके बीच तीन वर प्राप्त करने की कहानी कठोपनिषद में मिलती है।
326 ई.पू. में सिकन्दर को झेलम नदी के तट पर पौरव राजा पोरस के साथ ‘वितस्ता का युद्ध’ हुआ। इस युद्ध में पोरस की हार हुई। इस युद्ध को ‘हाइडेस्पीज का युद्ध’ नाम से भी जाना जाता है।
सिकन्दर ने निकैया (विजयनगर) तथा बुकाफेला (घोड़े के नाम पर) नामक दो नगरों की निर्माण किया।


अशोक ने ‘धम्म’ की परिभाषा राहुलोवाद सुत्त से ली गई है।

रुम्मिनदेई अभिलेख से पता चलता है कि लुम्बिनी यात्रा के अवसर पर अशोक ने वहां भूमिकर की दर 1/8 से घटाकर 1/6 कर दिया था।

1178 ई. में गोरी ने गुजरात पर आक्रमण किया परन्तु भीम द्वितीय (मूलराज द्वितीय) ने उसे आबू पर्वत के पास पराजित किया। भारत में यह मुहम्मद गौरी की पहली पराजय थी।

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