राजस्थान में 1857 का विद्रोह


1857 के विद्रोह के समय राजस्थान में 6 ब्रिटिश छावनियां थी, जो इस निम्न प्रकार थी-

  1. नसीराबाद, ब्यावर, देवली, खैरवाड़ा, एरिनपुरा, नीमच
  2. राजस्थान का एजेण्ट गवर्नर जनरल पेट्रिक लारेन्स था। इसके अधीन 4 पोलिटिकल एजेण्ट थे- मारवाड़ का मैक मोसन
  3. मेवाड़ का मेजर शावर्स
  4. जयपुर का कर्नल ईडन
  5. कोटा का मेजर बर्टन
  6. नसीराबाद से विद्रोह-


  • राजस्थान में ब्रिटिश सत्ता का प्रमुख केन्द्र अजमेर था, नसीराबाद स्थित छावनी में भारी मात्रा में गोला-बारूद एवं सरकारी खजाना रखा हुआ था। इसकी रक्षा का दायित्व एजीजी लारेन्स ने 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेन्ट्री को दिया। लेकिन इसकी सहायता के लिए ब्यावर से दो और इनफेन्ट्री बुलाये जाने पर 15वीं इनफेन्ट्री में असंतोष बढ़ने लगा। इस इनफेन्ट्री ने ही 28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी में विद्रोह कर दिया।

नीमच छावनी में विद्रोह-


  • 3 जून 1857 को
  • आउवा का विद्रोह- 23 अगस्त को जोधपुर लीजन ने दफेदार मोती खां और सूबेदार शीतल प्रसाद एवं तिलकराम के नेतृत्व में विद्रोह का बिगुल बजा दिया।
  • वे क्रांति के नेताओं के आदेशानुसार ‘चलो दिल्ली मारो फिरंगी’ के नारे लगाते हुए दिल्ली की ओर चल पड़े। जब क्रांतिकारी आउवा पहुंचे तो उनका नेतृत्व ठाकुर कुशालसिंह चम्पावत ने किया। आसोप, आलनियावास, गूलर, लाम्बिया, बन्तावास और रूदावास के जागीरदार भी सेनाओं के साथ क्रांतिकारियों से आ मिलें।
  • 8 सितम्बर 1857 को क्रांतिकारियों नं कुशाल सिंह के नेतृत्व में केप्टन हीथकोट व जोधपुर के महाराजा तख्त सिंह की संयुक्त सेना को बिथोड़ा (पाली) नामक स्थान पर क्रांतिकारियों ने हराया।
  • पराजय के समाचार लॉरेंस को मिले तो वह अजमेर से सेना लेकर आउवा के लिए रवाना हुआ। वहीं जोधपुर के पोलिटिकल एजेंट मैसन भी सेना के साथ था।
  • 18 सितम्बर को चेलावास नामक स्थान पर दोनों पक्षों में युद्ध हुआ। क्रांतिकारी विजयी हुए। युद्ध के दौरान मैसन मारा गया।
  • क्रांतिकारियों ने उसका सिर धड़ से अलग कर आउवा में घुमाया और बाद में उसे किले के दरवाजे पर टांग दिया।
  • क्रांतिकारी आसोप ठाकुर शिवनाथ सिंह के नेतृत्व में दिल्ली रवाना हुए।


Post a Comment

0 Comments