Sunday, February 3, 2019

भूपेन हजारिका


लोक संगीत के जादूगर
  • मशहूर गायक भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितम्बर, 1926 ई. को असम के सादिया में हुआ था।
  • बचपन में ही उन्होंने अपना पहला गीत लिखा और उसे गाया भी। तक उनकी उम्र महज 10 साल थी।
  • हजारिका ने करीब 13 साल की आयु में तेजपुर से मैट्रिक की परीक्षा पास की। आगे की पढ़ाई के लिए वे गुवाहाटी गये।
  • वर्ष 1942 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। वर्ष 1946 में हजारिका ने बीएचयू से राजनीति विज्ञान में बी.ए. और एम.ए. किया।
  • इसके बाद पढ़ाई के लिए वे विदेश गये।
  • न्यूयार्क स्थित कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से उन्होंने पीएचडी (जनसंचार) की डिग्री प्राप्त की। उन्हें सिनेमा के माध्यम से शैक्षणिक प्रोजेक्ट का विकास शिक्षा में प्रयोग करने के लिए शिकागो विश्वविद्यालय से लिस्ले फेलोशिप भी मिली थी।
  • अमेरिका में रहने के दौरान हजारिका जाने-माने अश्वेत गायक पॉल रोबसन के संपर्क में आये, जिनके गाने ‘ओल्ड मैन रिवर’ को हिंदी में ‘ओ गंगा तू बहती हो क्यों’ का रूप दिया गया, जो वामपंथी कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों के लिए एक तरह से राष्ट्रीय गान रहा।
  • उन्होंने अपने गायन का श्रेय आदिवासी संगीत को दिया था। स्वयं उनके अनुसार, ‘‘मुझे गायन कला मेरी मां से मिली है, जो मेरे लिए लोरियां गाती थीं। मैंने अपनी मां की एक लोरी का इस्तेमाल फिल्म रुदाली में भी किया है।’’
  • उन्होंने असमी भाषा में अनेक फिल्में निर्मित एवं निर्देशित करने के साथ-साथ संगीत भी लिखा और संगीतबद्ध भी किया।
  • उनकी ऐसी कुछ फिल्मों में ‘इरा बतार सुर 1956, शकुंतला 1960, प्रतिध्वनि 1964, लोटी घोटी 1967, मोन प्रोजापोती 1978, सिराज 1988 शामिल हैं।
  • उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के लिए पहली रंगीन हिन्दी फिल्म ‘मेरा धरम मेरी मां’ का निर्माण-निर्देशन किया आौर संगीत भी दिया।
  • डॉ. भूपेन हजारिका वर्ष 1981 से 1990 तक लगातार केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्वोत्तर अपीलीय निकाय में चेयरमैन रहे थे। इसी के साथ-साथ फिल्मों से संबंधित अनेक समितियों में उन्होंने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
  • हजारिका को वर्ष 1975 में सर्वोत्कृष्ट क्षेत्रीय फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया।
  • उन्हें वर्ष 2001 में पद्मश्री, 2009 में असोम रत्न और इसी साल संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, 2009 में पद्म भूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 1967 से 1972 के बीच असम विधानसभा के सदस्य रहे।
  • अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने असम के गुवाहाटी में पहला फिल्म स्टूडियो स्थापित किया जो देश में अपने प्रकार का ऐसा पहला स्टूडियों था।
  • हजारिका गायक और संगीतकार होने के साथ ही एक कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे।
  • उन्हें दक्षिण एशिया के सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक संचारकों में से एक माना जाता था। हजारिका के गीतों ने लाखों दिलों को छुआ। हजारिका की असरदार आवाज में जिस किसी ने उनके गीत ‘दिल हूम हूम करे’ और ‘ओ गंगा तू बहती है क्यों’ सुना, वह इससे इंकार नहीं कर सकता कि उसके दिल पर भूपेन दा का जादू नहीं चला।
  • उन्होंने फिल्म ‘गांधी टू हिटलर’ में महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन ‘वैष्णव जन तो तैने कहिए जो पीर पराई जाने रे।’ गाया था।
  • असमिया फिल्मों से उनका नाता बचपन में ही जुड़ गया था। टोकियो से मुम्बई और अलास्का से असम तक जिसने भी हजारिका के मधुर गीत सुने वह उनका कायल हुए बिना नहीं रह सका।
  • हजारिका के संगीत में लोकरंग व संस्कृति खनकती थी।
  • उनके गीत व संगीत मानो नदी, वन, पहाड़ों से उपजे हों।
  • हजारिका ने न केवल असम व बंगाल के लोक संगीत को फिल्मों में इस्तेमाल किया बल्कि राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों की लोकधुनों को भी अपनाया।
  • अपनी फिल्म ‘एक पल, रूदाली और दमन’ के लिए संगीतकार भूपेन हजारिका के साथ काम कर चुकीं फिल्मकार कल्पना लाजमी अंतिम सांस लेते समय अस्पताल में वही उनाके साथ थी।
  • वे भारत के ऐसे विलक्षण कलाकार थे, जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे।
  • उन्हें दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम जीवित सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता है।
  • उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया।
  • हजारिका ने बचपन में ही अपनी प्रथम गीत ‘विश्व निजॉय नोजवान’ लिखा और दस वर्ष की आयु में उसे गाया।
  • साथ ही, उन्होंने  असमिया चलचित्र की दूसरी फिल्म इंद्रमालती के लिए 1939 में बारह वर्ष की आयु में काम भी किया।
  • भूपेन हजारिका का 5 नवंबर 2011 को निधन हो गया था।
  • उन्हें वर्ष 2019 का मरणोपरांत भारत रत्न दिये जाने की घोषणा की। यह पुरस्कार उन्हें दिवंगत नानाजी देशमुख और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ दिया जायेगा।


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