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Monday, November 19, 2018

राजतरंगिणी


किताब-उल-हिंद - अलबरूनी 

  • इसमें भारत के धार्मिक और सामाजिक जीवन के विस्तृत वर्णन के साथ यहाँ के ज्ञान-विज्ञान की भी विस्तृत व्याख्या की गई है। 

राजतरंगिणी - कल्हण 
इसमें कश्मीर के क्षेत्रीय इतिहास का सजीव वर्णन किया गया है।

गौडवहो - वाक्पति 

  • कन्नौज के शासक यशोवर्मन के बारे में जानकारी मिलती है। 
रामचरित - संध्याकर नंदी 

  • पाल वंश के शासक रामपाल के जीवन के संबंध में चर्चा की गई है। 

तबकात-ए-नासिरी - मिन्हाज-उस-सिराज 

  • इस रचना में इस्लाम के उदय से पूर्व काल के पैगंबरों का वर्णन और मुसलमानों का इतिहास भी वर्णित है। 

तारीख़-ए-फिरोजशाही - जियाउद्दीन बरनी 

  • इसमें बलबन के सत्ता में आने से आरंभ होने वाली घटनाओं का विवरण मिलता है। 

खजायन-उल-फुतूह - अमीर खुसरो 

  • अलाउद्दीन ख़िलजी के विजयों का वर्णन है। 

तुगलकनामा - अमीर खुसरो 

  • तुगलक वंश के सत्तारुढ़ होने की घटनाओं का वर्णन है। 

नूहसिपहर - अमीर खुसरो 

  • भारत की जलवायु, रहन-सहन, कृषि, वेशभूषा आदि का वर्णन है। 

फुतूह-उस-सलातीन - इसामी 

  • गजनी राज्य के उदय से लेकर बहमनी राज्य की संस्थापना तक की घटनाओं का वर्णन है। 
फतवा-ए-जहाँदारी - जियाउद्दीन बरनी 

  • इसमें सल्तनतकालीन राजनैतिक दर्शन और प्रशासन का उल्लेख है। 

किताब-उल-रेहला - इब्न बतूता 

  • मोरक्कन (अफ्रीकी) मुहम्मद बिन तुगलक के व्यक्तिगत जीवन, प्रशासन, सामाजिक जीवन आदि का उल्लेख है। 

तारीख-ए-शेरशाही - अब्बास खाँ शेरवानी 

  • अकबर के आदेश पर उसी के दरबार में लिखी गई। शेरशाह के शासन और प्रशासनिक कार्यों की जानकारी का यह सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत है।


अकबरनामा - अबुल फजल 

  • यह तीन भाग में है। प्रथम भाग में अकबर के पूर्वगामी शासकों का इतिहास एवं दूसरे भाग में अकबर के शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का वर्णन है तथा तीसरा भाग ‘आइन-ए-अकबरी’ कहलाता है, जिसमें अकबर द्वारा प्रतिपादित शासन प्रणाली, कानून, नियम आदि की जानकारी है। 


पादशाहनामा -

  • मुहम्मद अमीन काजविनी, अब्दुल हामीद लाहौरी तथा मुहम्मद वारिस 


  1. शाहजहाँ के काल का इतिहास। 


  • मुहम्मद अमीन काजविनी ने शाहजहाँ के प्रथम 10 वर्षों का इतिहास लिखा, उसके पश्चात् अगले दस वर्षों का विवरण अब्दुल हामिद लाहौरी ने किया तथा मुहम्मद वारिस ने शाहजहाँ के संयुक्त इतिहास का वर्णन किया, परंतु बीस वर्षों के बाद का इतिहास उसने स्वतंत्र होकर लिखा। 


नुस्ख़ा-ए-दिलकुशा - भीमसेन 

  • औरंगजेबकालीन दक्षिण भारत के इतिहास का वर्णन तथा मुगल-मराठा संघर्ष का उल्लेख। 

बल्लालचरित - आनंद भट्ट 

  • इसमें बंगाल के सेन वंश का वर्णन मिलता है। 

पृथ्वीराजरासो - चंदबरदाई 

  • इसमें पृथ्वीराज चौहान के जीवन का वर्णन तथा संयोगिता संग उनके प्रेम का वर्णन एवं मुहम्मद गौरी द्वारा उसे बंदी बनाकर गजनी ले जाने तथा शब्दभेदी बाण द्वारा मुहम्मद गौरी को मारने का वर्णन है।

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