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Tuesday, September 18, 2018

जाति व्यवस्था



  • जाति शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘कास्ट’ का हिन्दी अनुवाद है।
  • ग्रेसिया-डी-ओरेटा ने कास्ट शब्द की व्युत्पत्ति के सम्बन्ध में 1665 ई. में बताया कि यह पुर्तगाली शब्द ‘कास्टा’ से उत्पन्न हुआ है।
  • डॉ. मजूमदार ‘जाति एक बन्द वर्ग (मार्ग) है।’
  • कूले - जब एक वर्ग पूर्ण तथा आनुवंशिक होता है, तो हम उसे ‘जाति’ कहते है।
  • हॉवेल - अन्तर्विवाह तथा वंशानुक्रम द्वारा प्राप्त पद की सहायता से सामाजिक वर्गों को जन्म देना ही जाति है।
  • केलकर - जाति एक ऐसा समूह है जिसकी दो विशेषताएं है:-
  • इसके सदस्य वे होते हैं, जो इसमें जन्म लेते हैं। 
  • इसके सदस्य इनके अपने सामाजिक नियमों के आधार पर अपने समुदाय के बाहर विवाह नहीं कर सकते हैं।
  • इरावती कर्वे - जाति वस्तुतः एक विस्तृत नातेदारी समूह है।
  • रिजले - जाति परिवारों के समूह का एक संकलन है जिसका एक सामान्य लाभ होता है जो एक काल्पनिक पूर्वज, मानव व देवता से सामान्य वंश परम्परा का दावा करते हैं, एक ही परम्परागत व्यवसाय को करने पर जोर देते हैं और सजातीय समुदाय के रूप में उनके द्वारा मान्य होते हैं, अपना ऐसा ही मत व्यक्त करते हैं।
  • ए. एम. होकार्ट - जाति केवल परिवार है जिनको बहुत-सी विधि सम्बन्धी संस्थाओं के साथ वंशानुक्रमण के द्वारा जोड़ दिया गया है।
  • जे. एच. हट्टन - जाति एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत एक समाज कई-कई स्व-केन्द्रित एवं एक-दूसरे से पूर्णतः अलग इकाइयों (जातियों) में बंटा होता है। इन जातियों के मध्य पारस्परिक सम्बन्ध उच्चता एवं निम्नता पर आधारित सांस्कृतिक रूप से निर्धारित होता है।

जाति व्यवस्था के उत्पत्ति के सिद्धांत -
परम्परागत सिद्धांत -

  • उत्पत्ति का स्रोत वेद, शास्त्र, उपनिषद, मनुस्मृति 
  • जातियों की उत्पत्ति के लिए मनु ने प्रतिलोम विवाह और वर्णसंकरता को मानते हैं। 
  • महाभारत और गीता में - वर्णसंकरता को जातियों की उत्पत्ति 

प्रजातीय सिद्धांत -

  • हरबर्ट रिजले, जी.एस. धुरिये तथा डी.एन. मजूमदार ने ।
  • हरबर्ट रिजले: प्रजाति मिश्रण एवं अनुलोम विवाह को।
  • डॉ. धुरिये ने आर्यों एवं अनार्यों के प्रजातीय एवं सांस्कृतिक सम्पर्क को जाति व्यवस्था के लिए उत्तरदायी है।

आदिम संस्कृति या माना का सिद्धांत -

  • प्रतिपादक जे.एच. हट्टन 1861 की जनगणना रिपोर्ट में प्रजातीय सिद्धांत की आलोचना के दौरान किया।
  • आपने ‘माना’ के आधार पर जाति की उत्पत्ति की व्याख्या की है।
  • ‘माना’ एक रहस्यमयी, अलौकिक एवं अवैयक्तिक शक्ति हैं जो प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न-भिन्न मात्रा में पाई जाती है।
  • ‘माना’ को श्यामाचरण दूबे ने बोंगा कहा है।

व्यावसायिक सिद्धांत -

  • जन्मदाता: नेसफील्ड
  • प्रजाति एवं धर्म के स्थान पर व्यवसाय को।
  • ‘व्यवसाय और केवल व्यवसाय ही जाति-प्रथा की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी है।’

धार्मिक सिद्धांत -

  • होकार्ट तथा सेनार्ट: जाति की उत्पत्ति में धर्म को प्रमुख माना।
  • होकार्ट - ‘धार्मिक क्रियाओं (कर्मकाण्ड) के कारण ही जाति प्रथा का उद्गम होता है।’
  • सेनार्ट - पारिवारिक पूजा तथा कुल देवता को चढ़ाए जाने वाले 
  • ब्राह्मणों की चतुर युक्ति का सिद्धांत (राजनीतिक)
  • प्रतिपादन:- डॉ. जी.एस. धुरिये एवं अब्बे डुब्बॉय ने


जाति की विशेषताएं 

  1. सामाजिक संस्तरण 
  2. सामाजिक नियंत्रण में सहायक
  3. समाज का खण्डात्मक विभाजन
  4. विवाह संबंधी प्रतिबंध
  5. संस्कृति की रक्षा
  6. धार्मिक विधियों की रक्षा (रीति-रिवाज)


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