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Monday, August 13, 2018

आरएएस मुख्य परीक्षा में इतिहास विषय से पूछे जाने वाले प्रश्न - शब्द सीमा: 20


हड़प्पा -

  • वर्तमान पाकिस्तान के माण्टगोमरी ज़िले में स्थित यह स्थल सिन्धु सभ्यता का प्रमुख स्थल है, जो रावी नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है। इस स्थल की खुदाई दयाराम साहनी के नेतृत्व में की गई थी। सिन्धु सभ्यता कालीन इस महानगर से व्यवस्थित नगर नियोजन, दुर्ग, रक्षा प्राचीर, विशाल अन्नागार, कब्रिस्तान, लिंग-योनि तथा मृण्मूर्ति आदि के साक्ष्य मिले हैं।

मोहनजोदड़ो -

  • वर्तमान पाकिस्तान में सिंधु नदी के किनारे स्थित इस स्थल की खुदाई राखलदास बनर्जी ने करवाई थी। मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ ‘मुर्दों का टीला’ होता है। यहां से प्राप्त पुरातात्विक सामग्रियां हैं - नियोजित नगर, वृहत स्नानागार, अन्नागार, नृत्यरत कांस्य नारी मूर्ति, सेलखड़ी से बना पुजारी का सिर, सूती वस्त्र का टुकड़ा और मातृदेवी की मूर्ति आदि।

कालीबंगा -

  • कालीबंगा अर्थात् ‘काले रंग की चूड़ियां’। सिन्धु सभ्यता संबंधी यह स्थल घग्घर नदी के किनारे राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले में स्थित है। इसका उत्खनन कार्य बी.के. थापर, बी.बी. लाल के नेतृत्व में हुआ। यहां से सिन्धु पूर्व व सिन्धु सभ्यता कालीन संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां से काले रंग की चूड़ियां, जुते हुए खेत, अग्निकुण्ड, पत्थर व तांबे के उपकरणों के साथ-साथ मेसोपोटामिया की बेलनाकार मुहरें भी प्राप्त हुई हैं।

रोपड़ - 

  • पंजाब प्रान्त के सतलज नदी के बाएं तट पर स्थित इस स्थल की खोज बी.बी. लाल ने की थी, किन्तु इसका उत्खनन यज्ञदत्त शर्मा ने करवाया था। यहां से नवपाषाण काल, ताम्रपाषाण काल, हड़प्पा काल के साथ-साथ प्रारम्भिक ऐतिहासिक काल आदि के भी साक्ष्य मिले हैं।
  • यहां से मनुष्य के साथ कुत्ते के दफनाने के साक्ष्य के साथ-साथ सेलखड़ी की मुहर, वाणाग्र, कुल्हाड़ी व बटखरे आदि भी प्राप्त हुए हैं।

बणावली -

  • हरियाणा राज्य के हिसार ज़िले में स्थित इस स्थल की खोज आर.एस. बिष्ट ने करवाई थी। यहां से हड़प्पा पूर्व, हड़प्पा कालीन तथा उत्तर हड़प्पा संस्कृति के साक्ष्य मिले हैं। यहां से मृण्मूर्तियां, मनके, मुहरें, चूड़ियां बटखरे, नियोजित भवन, मिट्टी के खिलौने, हल के साथ-साथ अग्निकुंड के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं। अपवादस्वरूप यहां पर सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर न काटकर इधर-उधर काटती है।

लोथल -

  • गुजरात प्रान्त की भोगवा नदी पर स्थित लोथल एक हड़प्पा कालीन नगर है, जिसका उत्खनन एस.आर. राव के निर्देशन में हुआ था। यहां से मेसोपोटामियाई मुहर व गोदीबाड़े के साथ-साथ युग्मित शवाधान, तांबे की मानवाकृति, मृद्भांड पर पंचतंत्र कथा संबंधी चित्र, कांसे की सुईं, ममी, हाथी दांत का पैमाना, मनके बनाने का कारखाना, रंगाई के कुण्ड, अग्नि पूजा के साक्ष्य आदि मिले हैं।
  • लोथल हड़प्पा सभ्यता के पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों का प्रमुख स्थल था।

धौलावीरा -

  • गुजरात के कच्छ के रन में स्थित इस स्थल का उत्खनन आर.एस. बिष्ट ने करवाया था। हड़प्पा सभ्यता संबंधी स्थलों में से अपवाद स्वरूप यह स्थल तीन खण्ड़ों में विभाजित था। यहां जल संग्रहण प्रणाली के साथ-साथ स्टेडियम जैसे स्थल भी प्राप्त हुए हैं। यहां से सबसे बड़े आकार के दस वर्ण युक्त लिपि के साक्ष्य मिले हैं।

बुर्जहोम -

  • श्रीनगर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित इस स्थल से प्रागैतिहासिक कालीन नवपाषाणिक संस्कृति के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। यहां से गर्तावास गृह, पाषाण व अस्थि निर्मित उपकरण, आंशिक कृषि व शिकार जीवी जीवन शैली के साथ-साथ पालतू कुत्तों को अपने मालिक के साथ दफनाने के साक्ष्य भी मिले हैं।

सुरकोटड़ा -

  • गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित इस स्थल का उत्खनन जगपति जोशी ने करवाया था। यहां से शवाधान की ‘कलश परम्परा’ के साथ-साथ घोड़े की हड्डियों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। अपवादस्वरूप यहां सं एक ऐसी कब्र मिली है, जो पत्थर से ढकी है। यहां से एन्टीमनी की एक छड़ भी प्राप्त हुई है।

आलमगीरपुर -

  • उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में हिण्डन नदी के किनारे स्थित यह स्थल हड़प्पा सभ्यता का पूर्वी विस्तार माना जाता है। यहां से हड़प्पा सभ्यता के हवासोन्मुख अवस्था के साक्ष्य मिले हैं। यहां से सांप तथा रीछ की मृण्मूर्ति के साथ-साथ मृद्भाण्ड, मनके, रोटी बेलने की चौकी तथा चित्रित मिट्टी का कटोरा भी प्राप्त हुआ है।

कोटदीजी -

  • पाकिस्तान के सिन्ध प्रांत में स्थित यह प्राक् हड़प्पा व हड़प्पा कालीन स्थल है। अन्य हड़प्पा स्थलों के विपरीत यहां से प्रस्तर वाणाग्र प्राप्त हुए हैं। अन्य प्राप्त वस्तुओं में भवन, सेलखड़ी की खंडित मुहर, गोमेद के बने मनके, ताम्र व कांस्य के आभूषण व उपकरण, मातृ देवी की मृण्मूर्ति तथा चित्रित मृद्भाण्ड हैं।

कुशीनगर -

  • उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले में स्थित महाजनपद कालीन यह स्थल महात्मा बुद्ध के निर्वाण स्थल तथा मल्ल महाजनपद की राजधानी के कारण विख्यात है।


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