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Sunday, March 18, 2018

अमीर खुसरो ‘तूती-ए-हिन्द’


  • जन्मः 1253 ई. में, पटियाली गांव (एटा, उत्तर प्रदेश) में
  • इन्होंने फारसी की एक नई शैली की शुरुआत की, जिसे सबक-ए-हिन्दी कहा जाता था। ये सल्तनत काल के सर्वश्रेष्ठ संगीतज्ञ थे।
  • इन्होंने ईरानी और भारतीय रागों का मिश्रण करके साजगिरि, तिलकत आदि तथा अरबी रागों- यमन, सनम, गोरा आदि का आविष्कार किया। इन्होंने कव्वाली गायन शैली प्रचलित की।
  • सितार और तबले का आविष्कार खुसरो को माना जाता है, किन्तु कई विद्वान इससे सहमत नहीं है।
  • ये निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे। औलिया ने खुसरो को तुर्कल्लाह की उपाधि प्रदान की थी।
  • खुसरो द्वारा रचित पुस्तकें-
किरान-उस-सादेन
  • खुसरो की पहली रचना है “किरान-उस-सादेन” जो उन्होंने 1289 ई. में लिखी थी। इसमें बुगरा खां और उसके बेटे कैकुबाद के मिलन का वर्णन है।
  • इसमें दिल्ली, उसकी इमारतों, शाही दरबार, अमीरों और अफसरों के सामजिक जीवन के विषय में दिलचस्प विवरण दिए गए हैं। इस रचना द्वारा उन्होंने मंगोलों के प्रति अपनी घृणा भी प्रकट की है।
मिफता-उल-फुतूह
  • मिफता-उल-फुतूह (1291 ई.) में उन्होंने जलालुद्दीन खिलजी के सैन्य अभियानों, मालिक छज्जू का विद्रोह व उसका दमन, रणथम्बौर पर सुलतान की चढ़ाई और अन्य स्थानों की विजय पर विचार किया है।
खजाइन-उल-फुतूह
  • इसे तारीख-ए-अलाई के नाम से भी जाना जाता है, अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल के पहले 15 वर्षों का चाटुकारितापूर्ण विवरण है। यद्यपि यह रचना मूलतः साहित्यिक है परन्तु फिर भी इसका अपना महत्त्व है, क्योंकि अलाउद्दीन खिलजी का समसामयिक विवरण केवल इसी पुस्तक में मिलता है।
  • इसमें उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी द्वारा गुजरात, चित्तौड़, मालवा और वारंगल की विजय के विषय में लिखा है। इसमें हमें मालिक काफूर के दक्कन अभियानों का विवरण मिलता है और भौगोलिक और सैन्य विवरणों की दृष्टि से यह काफी प्रसिद्ध है।
  • इसमें भारत का बड़ा ही अच्छा चित्रण है और साथ ही अलाउद्दीन के भवनों व प्रशासनिक सुधारों का वर्णन किया गया है।
आशिकां
  • इसमें गुजरात के राजा करण की पुत्री देवलरानी और अलाउद्दीन के पुत्र खिज्रखां की प्रेमकथा वर्णन है। इसमें अलाउद्दीन की गुजरात व मालवा विजय के बारे में चर्चा की गई है। इसमें वे मंगोलों द्वारा स्वयं अपने कैद किये जाने की चर्चा भी करते हैं।
नूह सिपिहर
  • इसमें हिन्दुस्तान और उसके लोगों का अच्छा चित्रण हुआ है। वह नूह सिपिहर है। इसमें मुबारक खिलजी का विवरण है। उन्होंने मुबारकशाह के भवनों के विजयों के साथ-साथ जलवायु, सब्जियों, फलों, भाषाओं, मनोरम जीवन जैसे विषयों पर विचार किया है। इसमें तत्कालीन सामजिक स्थिति का बड़ा ही जीवंत चित्रण देखने को मिलता है।
तुगलकनामा
  • खुसरो की अंतिम ऐतिहासिक मसनवी है तुगलकनामा। 
  • इसमें खुसारोशाह के विरुद्ध गयासुद्दीन तुगलक की विजय का चित्रण है। पूरी कहानी को धार्मिक रंग में प्रस्तुत किया गया है। इसमें गयासुद्दीन सत् तत्वों का प्रतीक है और उसे असत् तत्वों के अमीर खुसरोशाह के साथ संघर्ष करते दिखाया गया है।

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