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Saturday, January 20, 2018

राजस्थान में डाक टिकटों का रोमांचक सफर

  • डाक टिकटों में हमारे अतीत को संजोने की अद्भुत क्षमता है। छोटे-छोटे, रंग-बिरंगे कागज के टुकड़ों में सारी दुनिया का ज्ञान समाया है। ये एक नन्हें राजदूत के रूप में सभ्यता और संस्कृति के वाहक बन, पैगाम भी पहुंचाते हैं।
  • 6 मई 1840 को जब संसार का पहला डाक टिकट ‘पेनी ब्लैक’ और 1852 में एशिया का पहला डाक टिकट भारत में जारी हुआ तो किसने सोचा था कि ये सफर मनुष्य जाति के लिए सबसे रोमांचक और रोचक संदेश बनेगा।
  • भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 21 नवम्बर, 1947 को एक विशेष डाक टिकट निकाला गया जिस पर ‘जयहिन्द’ लिखा था।
  • अपनी अद्भुत विरासत, वैभव, रणबांकुरों की शौर्य गाथा और अनुपम चित्रकला के दम पर ‘राजस्थान’ ने डाक टिकटों में अपनी अनूठी श्रृंखला जारी कर उपस्थिति दर्ज करायी है।

डाक टिकटों में राजस्थान -


बामणी डाक व्यवस्था

  • मेवाड़ राज्य में राजा स्वरूप सिंह के शासन से आरंभ हुई ‘बामणी डाक व्यवस्था’ ब्राह्मण व्यक्ति के प्रति आदर-सम्मान को दृष्टिगत रखते हुए प्रचलित हुई।
  • इसके पीछे तर्क यह था कि पत्र और रुपए इनके माध्यम से सुरक्षित पहुंचें। सचमुच ब्राह्मणें ने डाक संबंधी ये उत्तदायित्व बखूबी निभाया, तब अलग से कोई डाक कार्यालय नहीं था।

‘राधा’ किशनगढ़ शैली
  • 5 मई, 1973 को किशनगढ़ शैली में बनी ‘राधा’ जब डाक टिकट पर आई तो इसने सबका ध्यान राजस्थान की अनुपम चित्रशैली की ओर खींचा।
  • राधा के रूप में आयी बणीं-ठणीं कृति को 1778 में चित्रकार निहालचंद ने किशनगढ़ की लघुशैली में रूपायित किया था। 
  • कला आलोचक एरिक डिक्सन ने बणीं-ठणीं को मोनालिसा के समकक्ष ठहराया है।


देवनारायण जी की फड़
  • लोक देवता देवनारायण जी की फड़ राजस्थान की सबसे लम्बी लोकगाथा की फड़ है। गुर्जरों के आराध्य देवनारायाण जी को अविवाहित भोपा-भोपी ‘जन्तर’ नामक वाद्ययंत्र के साथ श्रद्धापूर्वक वाचन करते हैं।
  • इस पर पहली बार डाक टिकट 2 सितम्बर, 1992 को जारी किया, 
  • दूसरी बार 3 सितम्बर, 2011 को।


विजय स्तम्भ पर डाक टिकट 
  • जारी करने की तिथि 15 अगस्त, 1949 (नियत डाक टिकट)
  • चित्तौड़गढ़ स्थित ‘विजयस्तम्भ’ का निर्माण मेवाड़ महाराणा कुंभा ने मालवा और गुजरात की सेनाओं पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष में करवाया था।
  • 9 मंजिला, 122 फीट ऊंचा, 157 सीढ़ियों वाला यह स्तम्भ आज भी पर्यटकों के लिए प्रेरणा और आकर्षण का केन्द्र है। 
  • अपने समय के महान वास्तुशिल्पी मंडन के मार्गदर्शन में बने विजय स्तम्भ के अंदर और बाहर भारतीय देवी-देवताओं, अर्द्धनारीश्वर, उमा महेश्वर, लक्ष्मीनारायण, ब्रह्मा, सावित्री, हरिहर के विभिन्न अवतारों तथा रामायण एवं महाभारत के पात्रों की मूर्तियां उत्कीर्ण हैं। साथ ही उन सवा लाख मूर्तियों के नीचे/ऊपर प्रत्येक का नाम भी अंकित है।

मीराबाई पर जारी डाक टिकट 

  • 1 अक्टूबर 1952 को
  • डाक टिकटों का व्यवस्थित संग्रह ‘फिलेटली’ कहलाता है। फिलेटनी सांस्कृतिक लगाव और विरासत को सहेजने की मानवीय उत्कंठा को दर्शाता है।

ढोला मारू पर डाक टिकट - 5 मई 1973 ई. को

राजस्थानी वधू पर डाक टिकट जारी 
  • 30 दिसम्बर ,1980 को
  • रंग-रंगीली, सजी-धजी राजस्थानी वधू अपने गहनों और कपड़ों के कारण सभी का मनमोह लेती है। 
  • 30 दिसम्बर, 1980 को पारम्परिक परिधानों में वधू श्रेणी में राजस्थानी वधू पर स्मारक डाक टिकट जारी किया गया।
मेयो कॉलेज, अजमेर पर डाक टिकट 
  • 12 अप्रैल, 1986 को भारतीय डाक विभाग द्वारा
  • 1885 में स्थापित विश्व के नामी शिक्षण संस्थाओं में से एक मेयो कॉलेज स्कूली शिक्षा का प्रसिद्ध केन्द्र रहा।
  • भारत की रियासतों के राजकुमार तथा अन्य उच्च पदाधिकारियों के पुत्र ही इस संस्था में अध्ययन कर, राज्य के भावी सफल शासक होते थे।


हवामहल पर जारी डाक टिकट 
  • 14 फरवरी 1986 को जारी
  • वर्ष 1798 में महाराजा प्रताप सिंह ने हवामहल बनवाया था।
  • वास्तुकार लालचंद उस्ता द्वारा डिजाइन

जन्तर-मन्तर पर डाक टिकट 
  • 10 दिसम्बर, 2003 में
  • भारत कोरिया के कूटनीतिक सम्बन्धों पर
  • सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित खगोलीय और ज्योतिषीय यंत्रों द्वारा सटीक विश्लेषण के लिए विश्व प्रसिद्ध वेधशाला जंतर-मंतर जयपुर को यूनेस्को द्वारा वर्ष 2010 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
  • मौसम, समय, ग्रह-नक्षत्रों, ग्रहण आदि खगोनीय घटनाओं की जानकारी रखने वाला जंतर-मंतर आश्चर्य चकित करता है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी, 2009 को विशेष आवरण पर भी जंतर-मंतर था।




देलवाड़ा जैन मंदिर पर डाक टिकट 14 अक्टूबर, 2009 को

  • महीन नक्काशी के लिए विख्यात देलवाड़ा जैन मंदिर समूह मुख्यतः पांच मंदिरों से मिलकर बना है। ये मंदिर है विमल वसही, लूण वसही, पीत लहर, पार्श्वनाथ व महावीर स्वामी मंदिर।
  • डाक टिकट के बांयी तरु जो चित्र है वह रंग मंडप का है जिसमें देवियों और कमल के रूपकों से यह कहने का प्रयास किया गया है कि ज्ञान के प्रकाश में मनुष्य के अंतर्मन का कमल खिलता है।
  • महाराणा प्रताप पर डाक टिकट 11 मई 1998 को जारी
  • भामाशाह पर डाक टिकट 31 दिसम्बर 2000 को

मारवाड़ी घोड़ा पर डाक टिकट 9 नवम्बर 2009 को


  • डाक विभाग द्वारा घोड़ों की 4 लुप्तप्राय नस्लों पर काठियावाड़ी, मारवाड़ी, जंसकारी और मणिपुरी घोड़ों पर स्मारक डाक टिकट जारी किया गया।
  • मारवाड़ी नस्ल के घोड़े राजस्थान की शान है।


  • राज्य पक्षी गोडावण पर डाक टिकट 1 नवंबर, 1980 को जारी
  • शेखावाटी चित्रकला पर डाक टिकट 20 जून, 2012 को

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