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Monday, November 27, 2017

भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में हाकिंग का दावा Stephen Hawking

भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में हाकिंग का दावा


बड़ी न्यूज थी वह क्योंकि उसे विश्व सबसे प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग ने बड़े दावे के साथ कहा कि मानव सभ्यता को 100 सालों में धरती को छोड़ना पड़ेगा। इसे पश्चिमी देशों ने कितना सही अर्थों में लिया ये तो उनके आधुनिक तकनीक से पता चल जाता है। वो आज मंगल ग्रह और चंद्रमा पर बस्तियां काटने की तैयारी में हैं और हमारा देश शांत होकर उनके तमाशा देख रहा है। वैसे यह सत्य भी है क्योंकि भारतीय जनमानस ने मिस्टर हाकिंग की बातों को गंभीरता पूर्ण तरीके से नहीं लिया। इसे भारतीय जनमानस ने पूरी तरह नकार दिया क्योंकि भारतीय शास्त्रों में कहीं पर भी इस प्रकार का लिखा हुआ नहीं है कि मानव को धरती से पलायन करना होगा।
यह दावा किसी भारतीय का नहीं है जिस पर हम यकीन न करें, क्योंकि यह भारतीय मानसिकता बन गई है कि यदि कोई भारतीय ऐसी भविष्यवाणी करता है तो वह रूढ़िवादी मानसिकता से ग्रस्त माना जाता और हम उसे नकार देते यह दावा एक बहुत ही नामी वैज्ञानिक का है, तो अधिक यकीन करने वाला है।
ऐसा दावा करने वाला स्वयं पूर्णतः भौतिकता के सहारे पर जीवित है और वह तो यहीं चाहेगा कि इसी भौतिकता के सहारे और जिया जाये। उनका दावा तर्कपूर्ण है क्योंकि मानव सभ्यता जिस कदर भौतिकता पर आधारित होती जा रही है, उससे तो यही लगने लगा है कि वाकय मानव सौ वर्षों से पहले ही धरती को छोड़ दें।
पर कभी भारतीय संस्कृति को किसी विदेशी ने सच्चे हृदय से स्वीकार नहीं किया, यदि इसे सच्चे मायने में स्वीकार कर वैज्ञानिक भारतीय संस्कृति के तत्वों के समिश्रण से मानव सभ्यता को आगे बढ़ाते तो शायद हाकिंग महोदय को यह कहने की जरुरत महसूस न होती। भारतीय जनमानस सदैव से ही प्रकृति के सानिध्य में रहा है, उसके जन्म से मृत्यु तक प्रकृति से ही वास्ता रहता था।
भारतीय जनमानस विदेशियों की तरह भौतिकता पर प्रारम्भ से ही आश्रित नहीं रहा है। यह तो आजादी और सबसे ज्यादा आर्थिक उदारीकरण के दौर के बाद से ही भारतीय भी भौतिकता के रंग में रंग गया है। जो भारतीय संस्कृति के पतन से अधिक मानव सभ्यता के पतन की ओर जा रहा है। भारतीय जनमानस में युवा ऊर्जा की कोई कमी नहीं है, लेकिन इस युवा पर औद्योगिक जगत को विश्वास नहीं रहा है क्योंकि वे उसे बेकार, कामचोर और तकनीक की तुलना में धीमा काम करने वाला माना जा रहा है। यही तकनीक और भौतिकता युवा पर हावी हो रही है और उनके श्रम को उपेक्षित कर रही है। जिससे भौतिक संसाधनों की आवाजाही बढ़ी है व उच्च वर्ग की उन पर विश्वासनीयता अधिक बन रही है।
इन आधुनिक मशीनीकरण से एक ओर भारत जैसे देश में युवा उपेक्षित हो रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग व पराबैंगनी किरणों से प्रकृति ही नहीं मानव में अनेकों बीमारियों ने तेजी से पैर पसर दिये हैं। इन सब से हाकिंग के दावों को बल मिल रहा है। उन्होंने इस दावे के पीछे निम्न कारणों को जिम्मेदार माना है-
मौसम में बदलाव, धूमकेतु की टक्कर और जनसंख्या विस्फोट है।
हाकिंग के दावों को कुछ पल लोगों ने पढ़ा और गंभीर दुःख प्रकट किया। कुछ ने इसे यह कहकर टाल दिया होगा ऐसे दावे तो पहले भी होते रहे हैं। 
हम हर मुसीबत का कारण और समाधान है, बस संयम की जरुरत है, भारतीय हमेशा से प्रकृतिवादी रहे हैं। पर अब भारतीय भी उसी तेजी के साथ पाश्चात्य भौतिकता का आनन्द के आगोश में खो गया है। इन सबसे भारत में भी मौसम में बदलाव आया है। जिसके दुष्परिणाम हमारे सामने अकाल के रूप देखने को मिल रहा है। हमें अपनी संस्कृति को भूलना नहीं चाहिए। हमें स्मार्ट एवं तकनीक पर आधारित होना है, लेकिन आश्रित नहीं।

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