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Thursday, November 30, 2017

मानव धर्म के नाम पर लड़ता रहा जाएगा और तकनीक मानव को नष्ट कर देगी

कृत्रिम बुद्धि मानव के लिए चुनौती 

मैनें मानव को लड़ते देखा है, कभी धर्म के लिए, कभी अधिकारों के लिए। पर वह तकनीक के बढ़ते कदमों से अनभिज्ञ है और वह उसके अभिशाप से वाकिफ नहीं है। विश्व के महान वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग ने भी इस पर चिंता जताई है कि कृत्रिम बुद्धि मानव को चुनौती पेश करेगी। यह सच है मानव पैसों के लिए किसी हद तक जा सकता है। जिसे हमारा विकास कह रहे हैं वही हमारा पतन होगा।

अभी तो हमारे जीवन से पशुओं की उपयोगिता कम हुई है एक दिन मानव की उपयोगिता कम हो जायेगी, तकनीक के सहारे जीने वाले हमें चोर, कामचोर समझेंगे।
सोचो पहले किसानों के जीवन व शहरी लोगों के जीवन में पशुओं की उपयोगिता बहुत अधिक थी, पर अब लगभग 0 प्रतिशत है। 

पहले खेती व फसलों को बाजार तक लाने वाले बैल, गधे ऊंट लगभग समाप्त।
पहले रोड़ बनाने में 30-40 मजदूर काम करते थे अब वे बेरोज़गार।
पहले घरों में नौकर हुआ करते थे, अब धीरे-धीरे रोबोट का चलन होने वाला है।
पहले गड्ढे खोदने के लिए 15-20 व्यक्ति लगते थे अब बड़ी मशीनों द्वारा किया जाने लगा है।
जहां बाबू का कार्य कई व्यक्ति मिलकर करते थे अब कम्प्यूटर के माध्यम से कुछ व्यक्तियों को रोजगार बाकी बेकार।
माना तकनीक जरूरी है किन्तु मानव के श्रम की अनदेखी मानव के लिए घातक है। जब युवा को रोज़गार नहीं मिलेगा तो कई अपराध बढ़ते है। जिससे देश को हानि उठानी पड़ती है।

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