Sunday, November 12, 2017

बुद्धि

बुद्धि की परिभाषाएं -

  • वुडवर्थ- बुद्धि, कार्य करने की एक विधि है।
  • टरमन - बुद्धि, अमूर्त विचारों के बारे में सोचने की योग्यता है।
  • वुडरो- बुद्धि, ज्ञान का अर्जन करने की क्षमताएं हैं।
  • डीयरबार्न - बुद्धि, सीखने या अनुभव से लाभ उठाने की क्षमता है।
  • गॉल्टन - बुद्धि, पहचानने तथा सीखने की शक्ति है।
  • बिने - बुद्धि, इन चार शब्दों में निहित हैं -ज्ञान, आविष्कार, निर्देश और आलोचना।
  • बुद्धि एक निश्चित दिशा की ओर ले जाने वाली प्रवृत्ति हैं। यह सुव्यवस्थित होकर निर्दिष्ट स्थान पर पहुंचने की योग्यता है। यह आलोचना करने की प्रवृत्ति है।
  • थॉर्नडाइक - सत्य या तथ्य के दृष्टिकोण से उत्तम प्रतिक्रियाओं की शक्ति ही बुद्धि है।
  • कॉलविन - यदि व्यक्ति अपने वातावरण से सामंजस्य करना सीख लेता हैं या सीख सकता हैं, तो उसमें बुद्धि है।
  • रायबर्न - बुद्धि वह शक्ति है जो हमकों समस्याओं का समाधान करने और उद्देश्यों को प्राप्त करने की क्षमता देती है।
  • स्टर्न - बुद्धि एक सामान्य योग्यता है जिसके द्वारा व्यक्ति नई परिस्थितियों में अपने विचारों को जानबूझ कर समायोजित करता है।
  • वैशलर - बुद्धि व्यक्ति की सम्पूर्ण शक्तियों का वह योग है अथवा सार्वभौमिक क्षमता है। जिसके द्वारा वह सोद्देश्य कार्य करता है, तर्कपूर्ण ढंग से चिन्तन करता है तथा प्रभावी ढंग से वातावरण के साथ समायोजन स्थापित करता है।
  • मैक्डूगल - बुद्धि वह शक्ति है जिसके द्वारा अतीत के अनुभव के आधार पर जन्मजात प्रवृत्ति में सुधार किया जा सकता है।
  • थाम्पसन - वंश-परम्परा से प्राप्त विभिन्न गुनों के सार को बुद्धि, कहते है।
  • बुद्धि के विषय में निम्न ततव स्पष्ट है-

  • सीखने की योग्यता
  • अमूर्त चिंतन की योग्यता
  • समस्या का समाधान करने की योग्यता
  • अनुभव से लाभ उठाने की योग्यता
  • सम्बन्धों को समझने की योग्यता
  • अपने वातावरण से सामंजस्य करने की योग्यता
  • बुद्धि की विशेषताएं -

  • 1. बुद्धि, व्यक्ति की जन्मजात शक्ति हैं।
  • 2. बुद्धि, व्यक्ति को अमूर्त चिन्तन की योग्यता प्रदान करती है।
  • 3. बुद्धि, व्यक्ति को विभिन्न बातों को सीखने में सहायता करती है।
  • 4. बुद्धि, व्यक्ति को अपने गत अनुभवों से लाभ उठाने की क्षमता देती है।
  • 5. बुद्धि, व्यक्ति की कठिन परिस्थितियों और जटिल समस्याओं को सरल बनाती है।
  • 6. बुद्धि, व्यक्ति को नवीन परिस्थितियों से सामंजस्य करने का गुण प्रदान करती है।
  • 7. बुद्धि पर वंशानुक्रम और वातावरण का प्रभाव पड़ता है।
  • 8. पिन्टर के अनुसार बुद्धि का विकास जन्म से लेकर किशोरावस्था के मध्यकाल तक होता हैं।
  • 9. कोल एवं ब्रूस - लिंग-भेद के कारण बालकों और बालिकाओं की बुद्धि में बहुत ही कम अन्तर होता है।
  • बुद्धि के प्रकार

  • गैरिट के अनुसार तीन प्रकार - मूर्त बुद्धि, अमूर्त बुद्धि और सामाजिक बुद्धि।
  • थॉर्नडाइक के अनुसार तीन - गामक (यांत्रिक),  अमूर्त बुद्धि और सामाजिक बुद्धि।
  • मूर्त बुद्धि -

  • इसका सम्बन्ध यंत्रों और मशीनों से होता है।
  • अच्छे कारीगर, मैकेनिक, इंजीनियर, औद्योगिक कार्यकर्ता आदि
  • अमूर्त बुद्धि -

  • सम्बन्ध पुस्तकीय ज्ञानोपार्जन से
  • शब्दों, प्रतीकों, समस्या समाधान आदि रूप में
  • अच्छे वकील, डॉक्टर, दार्शनिक, साहित्यकार, चित्रकार आदि।
  • सामाजिक बुद्धि -

  • इस बुद्धि का सम्बन्ध व्यक्तिगत और सामाजिक कार्यों से होता है।
  • व्यक्ति मिलनसार, सामाजिक कार्यों में रूचि लेने वाला और मानव-सम्बन्ध के ज्ञान से परिपूर्ण होता है।
  • अच्छे मंत्री, व्यवसायी, कूटनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता आदि।
  • बुद्धि के सिद्धांत 

  • एक खण्ड/एकतत्व का सिद्धांत-
  • प्रतिपादक  - अल्फ्रेड बिने (फ्रांस) 1911 ई. में
  • समर्थक - जॉनसन, स्टर्न, टरमन, साइमन
  • जॉनसन ने इस सिद्धांत को निरंकुशवादी सिद्धांत कहा है।
  • बुद्धि को एक अखण्ड और अविभाज्य इकाई माना है।
  • व्यक्ति की विभिन्न मानसिक योग्यताएं एक इकाई के रूप मे कार्य करती है।
  • यह सिद्धांत बुद्धि मे अनेक कारकों के होने की बात नहीं मानता बल्कि बुद्धि को एक योग्यता मानता है। बिने ने इसे सामान्य बुद्धि कहा है।
  • आलोचना - एक तरह की योग्यता के आधार पर हर प्रकार का कार्य नहीं किया जा सकता है।

द्विकारक/ दो खण्ड का सिद्धांत-

  • प्रतिपादक - स्पीयरमैन
  • प्रत्येक व्यक्ति में दो प्रकार की बुद्धि होती है- सामान्य और विशिष्ट
  • दूसरे शब्दों मे बुद्धि के दो खण्ड या तत्व होते हैं- सामान्य योग्यता या सामान्य तत्व और विशिष्ट योग्यता या विशिष्ट तत्व।
  • जी कारक तथा एस कारक दोनों मिलकर ही किसी मानसिक कार्य को सम्पन्न करने की क्षमता प्रदान करते हैं।
  • स्पीयरमैन जी कारक को वास्तविक मानसिक शक्ति मानता है क्योंकि यह सभी मानसिक क्रियाओं के लिए आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है।
  • मनोवैज्ञानिकों का कहता हैं कि स्पीयरमैन जिसे सामान्य योग्यता कहता हैं उसे अनेक योग्यताओं में विभाजित किया जा सकता है।

तीन खण्ड का सिद्धांत -

  • प्रतिपादक - स्पीयरमैन
  • दोखण्ड का सिद्धांत प्रतिपादित करने के बाद उसने बुद्धि का एक खण्ड ओ बताया।
  • उसेन उसका नाम सामूहिक खण्ड या तत्व रखा।
  • उसने इस खण्ड में ऐसी योग्यताओं को स्थान दिया, जो सामान्य योग्यता से श्रेष्ठ और विशिष्ट योग्यताओं से निम्न होने के कारण उनके मध्य का स्थान ग्रहण करती है।

बहुखण्ड का सिद्धांत/बहुकारक

  • प्रतिपादन - थॉर्नडाइक
  • बुद्धि अनेक प्रकार की शक्तियों का एक समूह होती है और इन विभिन्न प्रकार की शक्तियो में किसी तरह की समानता का होना आवश्यक नहीं है।
  • थॉर्नडाइक ने स्पीयर मैन के ‘एस’ कारक का समर्थन किया और जी कारक की आलोचना की।
  • थॉर्नडाइक ने बुद्धि में 6 विशिष्ट योग्यताएं मानी है-

  • 1. शब्द योग्यता
  • 2. अंक योग्यता
  • 3. दिशा
  • 4. तर्क
  • 5. स्मरण
  • 6. भाषण
  • थॉर्नडाइक ने अपने सिद्धांत की तुलना बालू के ढेर से करते हुए लम्बाई, चौडाई, क्षेत्रफल और गति की चर्चा की है।
  • इस आधार पर उनका यह सिद्धांत बालू का सिद्धांत/परमाणुवादी सिद्धांत /मात्रा का सिद्धांत/ विशिष्ट योग्यतावादी सिद्धांत आदि नामों से जाना जाता है।
  • थॉर्नडाइक का मानना है कि कठिनाई का स्तर बढ़ने से बुद्धि का स्तर बढ़ता है।
  • अधिक पढ़े - बुद्धि का मापन और बुद्धि लब्धि Intelligence Quotinet आई. क्यू.

समूह कारक/समूह तत्व

  • प्रतिपादन - थर्स्टन, अमेरिका
  • थर्स्टन ने स्पीयरमैन के एस कारक की आलोचना की है एवं जी कारक का समर्थन किया है।
  • थर्स्टन ने स्पीयरमैन के जी कारक को प्राथमिक योग्यताओं का समूह माना है।
  • कैली ने अपनी पुस्तक Crossroads in the mind of man में बुद्धि को अग्रलिखित 9 खण्ड़ों या योग्यताओं का समूह बताया है।
  • थर्स्टन ने अपनी पुस्तक Primary Mental Abilities में बुद्धि के 13 खण्डत्र या तत्व बताये हैं।
  • उसने बुद्धि को 13 मानसिक योग्यताओं का समूह बताया है।
  • थर्स्टन ने बुद्धि के निम्नलिखित 7 प्राथमिक मानसिक योग्यताओं का समूह है-

  • 1. संख्यात्मक योग्यता
  • 2. शाब्दिक योग्यता
  • 3. स्थान सम्बन्धी
  • 4. शब्द प्रवाह
  • 5. तार्किक
  • 6. स्मृति सम्बन्धी
  • 7. प्रत्यक्ष सम्बन्धी

प्रतिदर्श का सिद्धांत/प्रतिमान 

  • प्रतिपादक- थॉमसन
  • थॉमसन का मानना है कि बहुत सारी योग्यताओं से लिये गये नमूने का एकीकृत रूप ही बुद्धि है।

बुद्धि का पदानुक्रमिक सिद्धांत -

  • सिरिल बर्ट तथा वर्नन ने मानसिक योग्यताओं को क्रमानुसार महत्व दिया है।

त्रिअंशीय/ त्रि-आयाम Three dimension Theory/ प्रज्ञा संरचना सिद्धांत -

  • प्रतिपादक - प्रो. गिलफोर्ड, अमेरिका
  • 1967 में गिलफोर्ड ने बुद्धि का संरचना मॉडल बनाया। इस संरचना मॉडल में गिलफोर्ड ने 3 आयाम बताये।
  • 1. विषयवस्तु 2. संक्रिया 3. उत्पाद

1967 का संरचना मॉडल

  • विषयवस्तु Content- इसमें आकृत्यात्मक, प्रतीकात्मक, शाब्दिक और व्यावहारिक
  • संक्रिया Operation- संज्ञान, स्मृति, अपसारी चिंतन, अभिसारी चिंतन, मूल्यांकन
  • उत्पाद Product - इकाई, वर्ग, पद्धति, सम्बन्ध, स्थानान्तरण, अनुप्रयोेग
  • 1967 में बुद्धि:-
  • CxOxP  = I
  • 4x5x6   = 120
  • नोट- 1977 में गिलफोर्ड ने अपने मॉडल में संशोधन किया और विषय-वस्तु आयाम को बदलकर इसमें भागों की संख्या 5 कर दी।
  • आकृत्यात्मक के स्थान पर दृश्य-अव्य को शामिल किया गया।
  • 1977 में बुद्धि:- 
  • CxOxP  = I
  • 5x5x6   = 150
  • 1980 में गिलफेार्ड ने विषय-वस्तु आयाम मे पुनः संशोधन किया और हटाये गये आकृत्यात्मक की भी पुनः बुद्धि परीक्षण में शामिल किया।
  • इस प्रकार विषय-वस्तु में पदों की संख्या 6 हो गई।
  • CxOxP  = I
  • 6x5x6   = 180
  • वर्तमान में मनोवैज्ञानिक गिलफोर्ड  के 1980 के सिद्धांत की अपेक्षा 1977 के सिद्धांत को अधिक महत्व देते हैं।
  • उपनामः 

  • बुद्धि का संरचनावादी सिद्धांत
  • मॉडल सिद्धांत 
  • प्रतिरूप /प्रतिमान सिद्धांत

द्विआयामी सिद्धांत - गटमैन ने दिया।

बुद्धि का बहुल सिद्धांत -

  • गार्डनर बुद्धि में कारकों की अपेक्षा बुद्धि के प्रकार बताये।

गार्डनर ने बुद्धि के कुल 7 प्रकार बताये हैं-

  • भाषायी बुद्धि
  • तार्किक/गणितीय बुद्धि
  • आकाशीय बुद्धि
  • शारीरिक प्रदर्शन की योग्यता
  • संगीतज्ञ बुद्धि
  • व्यक्तिगत आत्मन/अन्तः वैयक्तिक बुद्धि
  • अन्तर वैयक्तिक बुद्धि

बुद्धि का ‘क’ एवं ‘ख’ सिद्धांत - हेव

बुद्धि का आश्चर्यजनक सिद्धांत - बी.एस. ब्लूम 

  • ब्लूम का मानना है कि बुद्धि जैसी कोई चीज होती ही नहीं हैं। 
तत्वविहीन सिद्धांत - प्रो. ई.एल. थॉर्नडाइक

धारा प्रवाह तथा स्पष्ट सिद्धांत - कैटल

  • बुद्धि की गत्यात्मक और स्पष्ट व्याख्या करने का श्रेय कैटल को जाता है।

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