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Thursday, November 9, 2017

राजस्थान के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी एवं साहित्यकार

जयनारायण व्यासः-

जयनारायण व्यास का जन्म जोधपुर में 18 फरवरी, 1899 ई. को हुआ था। इन्होंने राजस्थान में राजतंत्र व सामंती प्रथा के विरूद्ध पहली बार आवाज उठायी तथा रियासतों के शासन में जनता की भागीदारी की वकालत कीं
1927 में ‘तरुण राजस्थान’ के प्रधान संपादक बनकर व 1936 में बंबई से ‘अखंड भारत’ पत्र निकालकर अपने क्रांतिकारी विचारों का प्रचार करते रहे।

बाल मुकुंद बिरसाः-

इनका जन्म डीडवाना तहसील के पीलवा ग्राम में 1908 ई. में हुआ था। जोधपुर आंदोलन (1934-40)  में इन्होंने महती भूमिका निभाई थी।

सेठ दामोदर राठीः-

इनका जन्म पोखरण में 8 फरवरी, 1884 को हुआ था। इनके पिता का नाम खींवराज राठी था। इनका सम्बन्ध राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानियों से था। ये क्रांतिकारियों का तन-मन से विशेष रूप से आर्थिक सहायता करते थे।

जमनालाल बजाजः-

जमनालाल बजाज जी का जन्म सीकर ज़िले क एक गांव मे 4 नवंबर, 1889 को हुआ था। ये राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। ये गांधीजी के पांचवें पुत्र के रूप में विख्यात थे। इन्होंने समाचार-पत्रों व राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं को तन-मन-धन से सहयोग दिया।
इन्होंने ‘राजस्थान केसरी’, ‘कर्मवीर’, ‘प्रताप’ तथा गांधीजी द्वारा स्थापित प्त्र ‘नवजीवन’ को भी आर्थिक सहायता दी।
1927 में इन्होंने एक ‘चरखा संघ’ की स्थापना की, जिसमें थोड़े समय में ही खादी का उत्पादन काफी बढ़ गया। अंग्रेजों से प्राप्त ‘राय बहादुर’ की उपाधि को लौटाकर अपने देशभक्ति का परिचय दिया। फरवरी 1942 मे इनका देहांत हो गया।

भोगीलाल पण्ड्याः-

इनका जन्म 15 मार्च, 1904 को हुआ था। इन्होंने ‘बागड़ सेवा मंदिर’ नामक संस्था की स्थापना की। इनका सम्बन्ध शैक्षिक कार्यों से था। इनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण रियासती सरकार ने इस संस्था को बंद करवा दिया, तो पण्ड्या ने इसके स्थान पर ‘सेवा संघ संस्था’ का गठन किया। 1944 में इन्होंने डूंगरपुर प्रजामंडल की स्थापना कीं

केसरीसिंह बारहठः-

इनका जन्म मेवाड़ के कोल्यारी गांव में हुआ था। इन्होंने रूठी राणी, राजसिंह चरित्र, प्रताप चरित्र, दुर्गादास आदि पुस्तकों की रचना की।

विजयदान देथा:-

देथा ने राजस्थानी मे अनेक पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें आठ राजकंवर, मां रो बदलो, तोडोराव व बातां री फुलवारी प्रख्यात हैं। बाता री फुलवारी पर तो इन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है।

कन्हैया लाल सेठियाः-

ये आधुनिक काल के हिन्दी व राजस्थानी भाषा के लेखक हैं। पाथल और पीथल इनकी प्रसिद्ध काव्य रचना है।

कोमल कोठारी:-

1975 में नेहरू फेलोशिप से सम्मानित श्री कोठारी वर्तमान में ‘रूपायन’ के संचालक है। ये राजस्थानी लोकगीत, लोककथाओं आदि का संकलन व शोध कर रहे है।

सूर्यमल्ल मिश्रण:-

सूर्यमल्ल मिश्रण बूंदी राज्य के चारण कवि थे। ये संस्कृत, डिंगल और ब्रजभाषा के ज्ञाता थे। इन्होंने वंश भास्कर, वीर सतसई छंद मयूख व बलवंत विलास आदि पुस्तकें लिखी। ये वीर रस के महान कवि थे।

मुहणौत नैंणसीः-

इनका जन्म औसवाल जाति के मुहणौत वंश में हुआ था। ये मारवाड़ नरेश जसवंत सिंह के दीवान थे। इन्होंने ‘मुहणौत नैंणसी री ख्यात व मारवाड़ के परगणा री बिगत’ नामक पुस्तकें लिखीं। इन्हें राजपूताने का ‘अबुल फजल’ भी कहते हैं।

बिठू सूजो नागर जोत:-

ये बीकानेर दरबार में रहते थे। सूजोजी डिंगल भाषा के कवि थे। इन्होंने ‘राव जैतसी रो छंद’ में बीकानेर के राजा जैतसी की शौर्यता तथा राव चूडा व लूणकरण के पराक्रमों का वर्णन किया है।

ईसरदास:-

इनका जन्म संवत् 1595 में गांव भाद्रेस (जोधपुर) में हुआ था। इन्होंने 10-12 ग्रंथों की रचना की, जिसमें हरि रस और हाला झाला री कुंडलियां प्रसिद्ध हैं। हाला झाला री कुंडलियां वीर रस का ग्रंथ है, जिसमें 42 कुंडलियां है।

पंडित रामकरण आसोपाः-

इनका जन्म बडनू (जोधपुर) में हुआ था। ये हिन्दी, डिंगल व संस्कृत भाषाओं केे विख्यात कवि होने के साथ-साथ सुप्रसिद्ध इतिहासकार भी थे। इन्होंने ‘नैणसी की ख्यात, सूरज प्रकाश, राजरूपक व मारवाड़ का इतिहास नामक पुस्तकें लिखी।

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