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Friday, September 15, 2017

REPO_रेपो और रेपो दर से क्या अभिप्राय है?


  • रेपो (REPO: Repurchase Options) अर्थात् पुनर्क्रय विकल्प खुले बाजार की एक ऐसी क्रिया है, जिसके अंतर्गत प्रतिभूतियों को इस शर्त के साथ बेचा जाता है कि एक निश्चित तिथि पर एक निश्चित मूल्य पर उन्हें खरीद लिया जाये। रिर्जव बैंक जब प्रतिभूतियों को बेचता है तो उसे सामान्य रेपो कहते है और  जब वह प्रतिभूतियों को खरीदता है तो उसे रिवर्स या उल्टा रेपो कहते है। जबकि रेपो दर रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को बेचे जाने वाले सरकारी बाण्डो व प्रतिभूतियों (पुनर्खरीद समझौते के तहत) पर अदा की जाने वाली ब्याज दर को कहा जाता है।

संरचनात्मक बेरोजगारी किसे कहते हैं?

  • सामाजिक, आर्थिक एवं तकनीकी विकास के फलस्वरूप कुछ अन्य उद्योग का विस्तार होता है, जबकि कुछ अन्य उद्योग धीरे-धीरे संकुचित होते जाते हैं। यदि भागोलिक एवं तकनीकी दृष्टि से श्रम पूर्णतः गतिशील हो तो संकुचित होने वाले उद्योगों के श्रमिक नये उद्योगों में खपाए जा सकते हैं, परंतु वास्तव में श्रम इन दृष्टियों से पूर्णतः गतिशील नहीं होते, जिसके कारण कुछ बेरोजगारी उत्पन्न होती है। औद्योगिक जगत में इस प्रकार के संरचनात्मक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी को संरचनात्मक बेरोजगारी कहते हैं। संरचनात्मक बेरोजगारी दीर्घकालीन होती है। भारत में बेरोजगारी का स्वरूप  मूलतः संरचनात्मक ही है।

रोलिंग प्लान से क्या तात्पर्य है? इसकी शुरुआत किसने की तथा भारत में इसे कब लागू किया गया?

  • रोलिंग प्लान से तात्पर्य अनवरत योजना से होता है। इस धारणा का जन्मदाता ‘गुन्नार मिर्डल’ को माना जाता है। इस योजना की शुरुआत तो वार्षिक योजनाओं के माध्यम से होती है, परन्तु आगे चलकर वार्षिक योजनाओं को दीर्घावधि योजनाओं का भाग बना दिया जाता है। इस प्रकार योजना अनवरत रूप से चलती रहती है। योजनाओं का मूल्यांकन वार्षिक आधार पर किया जाता है और इसी आधार पर आगे की योजनाओं के नये उद्देश्य निर्धारित किये जाते हैं। भारत के योजना निर्माण में इसे सर्वप्रथम जनता सरकार द्वारा अप्रैल 1978 में लागू किया गया। परन्तु इन्दिरा सरकार ने 1 अप्रैल, 1980 को इसका त्याग कर दिया।

निम्नलिखित के बारे में आप क्या जानते हैं-
1. प्रशासित मूल्य
2. ब्ल्यू चिप
3. बुल एंड बीयर
4. विमुद्रीकरण
5. गिफिन वस्तुएं


  • प्रशासित मूल्यः- जब किसी वस्तु का मूल्य बाजार की स्वतंत्र शक्तियों द्वारा निर्धारित न होकर केन्द्रीय सत्ता द्वारा निर्धारित होता है, तो वह ‘प्रशासित मूल्य’ (Administered Price) कहलाता है।
  • ब्ल्यू चिप (Blue Chip) शब्द का प्रयोग उन कम्पनियों के लिए किया जाता है जिनकी वित्तीय स्थिति काफी सुदृढ़ होती है तथा जिनका प्रबंध अति कुशल होता है। ब्ल्यू चिप शेयरों को क्रय करने पर हानि की संभावना काफी कम होती है। इन्हें इच्छित समय पर उचित मूल्य पर बेचा जा सकता है। 
  • शेयर बाजार में शेयरों की कीमतों के ऊंचा चढ़ने का विश्वास करने वाला सट्टेबाज ‘बुल’ (Bull) एवं कीमतों में गिरावट का विश्वास करने वाला सट्टेबाज ‘बीयर’ (Bear) कहलाता है।
  • विमुद्रीकरण (Demonetization) में सरकार पुरानी मुद्रा को समाप्त करके नई मुद्रा प्रचलन में लाती है। जिसके पास काला धन होता है वह कर चोरी के आरोप के भय से ़उसके बदले में नई मुद्रा लेने का साहस नहीं कर पाता है। इस प्रकार देखा जाये तो देश में काला धन बढ़ने पर (जब वह अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन जाये) विमुद्रीकरण की विधि प्रचलन में लायी जाती है।
  • गिफिन वस्तुएं निम्न कोटि की वस्तुएं होती हैं। गिफिन वस्तुओं पर मांग का नियम नहीं लागू होता है। मूल्य में वृद्धि होने पर गिफिन वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है तथा मूल्य में कमी होने पर इसकी मांग कम हो जाती है। इस विरोधाभास को ‘गिफिन विरोधाभास’ (Giffin Paradox) की संज्ञा प्रदान की गई है।


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