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Sunday, September 3, 2017

Ramdevji रामदेवजी


रामदेवजी लोक देवताओं मे एक प्रमुख अवतारी पुरूष है। ये मल्लीनाथ के समकालीन थे। इनका जन्म बाड़मेर जिले की षिव तहसील के ऊंडूकासमेर गांव में, तंवर वंश के अजमल जी व मेणा दे के घर हुआ।

गुरू की महत्ता पर जोर देते हुए इन्होने कर्मों की शुद्धता पर बल दिया। उनके अनुसार कर्म से ही, भाग्य का निर्धरण होता है।
श्रामदेव जी ने समाज सुधार के क्षेत्र में छआछूत और मुस्लिम समाज इन्हें ‘राम सा पीर’ के रूप मे मानते है। राम देव जी का प्रमुख स्थान रामदेवरा (रूणीचा) है, जहां भाद्रपद माह मे विशाल मेला भरता है।

रामदेवजी - एकमात्रा लोक देवता जो कवि भी थे।
मुख्य मंदिर - रामदेवरा (रूणीचा) में रामदेव जी के समाधि स्थल पर, यहां भाद्रपद शुक्ला द्वितीया से एकादषी तक विषाल मेला लगता है। इस मेले की प्रमुख विषेषता साम्प्रदायिक सद्भाव में उनका योगदान है।

अन्य मंदिर - चित्तौड़गढ़ में सुरता खेड़ा में
- अजमेर में बराठिया
- छोटा रामदेवरा गुजरात

रामदेव की पत्नि - नेतल-दे
रामदेव की बहन - मेघावल जाति की डालीबाई
रामदेव के गुरू - बालिनाथ
समाधि - राम सरोवर पाल (रूणेचा, जैसलमेर) भाद्रपद शुक्ला एकादशी (1458ई.) 1931 ई. रामदेव जी की समाधि पर बीकानेर महाराजा, गंगासिंह ने मंदिर बनवाया।
- रामदेवरा का मेला साम्प्रदायिक सद्भावना का प्रतीक माना जाता है।
- रामदेवजी को मुस्लिम भक्त रामसा पीर व हिंदू कृष्ण का अवतार मानते है।
- रामदेवजी के मेले का मुख्य आकर्षण-कामड़िया पंथ के लोगांे द्वारा किया जाने वाला तेरह ताली नृत्य है।
- रामदेव जी की फड़ रावण हत्था नामक वाद्ययंत्र के साथ बाँची जाती है।
- सभी लोक देवताओं मे सबसे लम्बा गीत रामदेव जी का ही है।
- रामदेवजी के भक्तों द्वारा गाए जाने वाले गीत बयावले कहलाते है।
- रामदेवजी के मेघवाल भक्तों को रिखिया कहा जाता है।

रामदेव का वाहन - घोड़ा लीला
प्रतीक चिन्ह - पगल्ये
पंचरंगी ध्वजा - नेजा
रचना - चौबीस वाणियाँ
अवतार की तिथि - भाद्रपद शुक्ला द्वितीया (बाबे-री-बीज)
रात्रि जागरण - जम्मा
उपनाम - रामसापीर, रूणेचा का धणी
उनके द्वारा चलाया गया पंथ - कामड़िया पंथ
हिन्दू-मुस्लिम एकता स्थापित करने पर जोर।
1931 ई. रामदेव जी की समाधि पर बीकानेर महाराजा, गंगासिंह ने मंदिर बनवाया।

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