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Wednesday, June 28, 2017

पंछी, नदियां, पवन के झोंके,

पंछी, नदियां, पवन के झोंके,
कोई सरहद न इन्हें रोकें...
  • यह एक फ़िल्म का गाना अवश्य है, पर मानव जाति के उत्थान के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है। यह गाना एक कवि के लिए ही महत्त्व का नही है वरन् हर वह व्यक्ति जो मानव के भविष्य की सुखद कामना करता है, उसे इन शब्दों के भावार्थ को अपने जेहन में अवश्य उतारना चाहिए एवं दैनिक जीवन में उपयोग में लाना चाहिए। इस प्रकृति में सरहदों का बंधन सिर्फ मानव पर ही लागू होती है। पर हमें इन बंधनों को उदार रूप में ही स्वीकारें।
  • यह गाना जब भी सुनता हूँ मैं अपने जीवन का एक अलग ही आभास महसूस करता हूँ। जीवन में कोई इन साहित्यिक चीजों से अपने जीवन में बदलाव नही ला सकता है तो इनका कोई महत्त्व नही।
  • क्या सीखा लोगों ने इन शब्दों से और फ़िल्म से। मन कीभावनाएँ सिर्फ फ़िल्म की समयावधि तक ही उद्वेलित होती है बाद में ऐसा लगता है जैसे किसी सत संगत से कोई भक्त आया हो और किसी श्रेष्ठ संत के प्रवचनों का प्रभाव वहां से निकलने के बाद समाप्त हो गए हो।
  • फ़िल्म रिफ्यूजी कई मायनों में अपना महत्त्व रखती है वह उन दो नए सिने स्टारों के जीवन की पहली सीढ़ी थी जिससे जीवन को एक नई दिशा मिलने वाली थी और मिली भी। उनके लिहाजे से यह सफल कहानी थी। एक निर्देशक और दर्शकों के लिए कुछ खटटा-मीठा अनुभव देनें वाली थी।
  • निष्कर्ष यही निकलता है की हम सिर्फ मनोरंजन को ध्यान में रख कर समाज के और उस फ़िल्म के सार्थक पहलुओं को बहुत कम स्वीकारते है। 

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