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Sunday, May 21, 2017

राजस्थान में लोक देवता



  • मारवाड़ के पंच पीर
  • रामदेव जी, गोगा जी, पाबु जी,हरभू जी, मेहा जी

1. रामदेव जी-

  • रामदेव जी हिन्दू (कृष्ण के अवतार) तथा मुसलमान (रामसापीर) दोनों में ही समान रूप से लोकप्रिय है।
  • जन्म- उंडूकासमेर, शिव तहसील (बाड़मेर) में हुआ था। बाबा रामदेव जी का जन्म भाद्रशुक्ल दूज (बाबेरी बीज) को हुआ। रामदेव जी के पिता अजमल जी तवंर वंशीय राजपूत थे। माता का नाम मैणादे था। इनका विवाह अमरकोट के सोढ़ा राजपूत दलैसिंह की पुत्री नेतलदे से हुआ।
  • रामदेवजी एकमात्र लोक देवता थे, जो एक कवि भी थे। इनकी प्रमुख रचना " चौबीस बाणियां" कहलाती है। रामदेव जी का प्रतीक चिन्ह "पगल्ये" है। इनके लोकगाथा गीत ब्यावले कहलाते हैं। रामदेव जी का गीत सबसे लम्बा लोक गीत है। इनके मेघवाल भक्त "रिखिया " कहलाते हैं।

प्रमुख स्थल-

  • रामदेवरा (रूणीचा), पोकरण तहसील (जैसलमेर) रामदेवजी का मेला भाद्रपद शुक्ल दूज से भाद्र शुक्ल एकादशी तक भरता है। मेले का प्रमुख आकर्षण "तरहताली नृत्य" होता हैं। तेरहताली नृत्य कामड़ सम्प्रदाय की महिलाओं द्वारा किया जाता है। मांगी बाई (उदयपुर) तेरहताली नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यागना है। तेरहताली नृत्य व्यावसासिक श्रेणी का नृत्य है। "बालनाथ" जी इनके गुरू थे। इनकी ध्वजा, नेजा कहताली हैं। नेजा सफेद या पांच रंगों का होता हैं। इनके घोडे़ का नाम लीला था। इनकी फड़ का वाचन मेघवाल जाति या कामड़ पंथ के लोग करते है।


  • सुरताखेड़ा (चित्तौड़गढ़) व बिरांठिया (अजमेर) में और छोटा रामदेवरा गुजरात में भी इनके मंदिर है। इनके यात्री 'जातरू' कहलाते है। जातिगत छुआछूत व भेदभाव को मिटाने के लिए रामदेव जी ने "जम्मा जागरण " अभियान चलाया। इनके चमत्कारों को 'पर्चा' कहते है तथा भजनों को 'ब्यावले' कहलाते हैं।


  • डाली बाई रामदेवजी की भक्त थी और मेघवाल जाति की थी।




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